Pati Patni Sex Kahani – मै मेरी बहन और मेरा पति, Hindi Sex Story

Pati Patni Sex Kahani – मै मेरी बहन और मेरा पति, Hindi Sex Story

मेरा नाम मालनी है ।

ये कहानी तब शुरु हुई जब हमारी शादी ठीक हुई।
मेरे परिवार मे मै मेरी जुड़वा बहन शालनी मेरा छोटा भाई, और मम्मी पापा हैं।
उस टाईम हमारी एज 20 साल थी।
हमारी शादी एक ही घर मे दो भाईयों से ठीक हुई थी मेरी शादी बडे़ लड़के से जिनका नाम साहिल है वो 24 साल के थे। शालू की शादी छोटे भाई सागर 22 साल से होनी वाली थी। दोनो अपना बिजनेस चलाते हैं सागर साथ मे पढ़ाई कर रहा था।

हमे देखने सागर और उसके परिवार वाले आए थे साहिल नही आए थे मै सिर्फ उनका फोटो देखी थी।
मेरी बूआ बोली थी कि साहिल बड़ा अच्छा नेचर का है उसने सिर्फ अपनी मां के कहने पर शादी के लिए बिना मुझे देखे हां कह दी।

अब हमारी शादी हो गई बडे़ घूम धाम से , हम दोनो बहने खुश थीं कि चलो एक ही घर मे एक साथ रहेगें।हम दोनो बहनों मे बहुत प्यार है हम एक दूसरे से सारी बातें करते हैं कुछ नही छुपाते।

हम शादी कर ससुराल पहुंचे जो एक गांव था बहुत बड़ा घर था समझिए नया बना हुआ फार्म हाउस था।
बहुत सारे कमरे थे सारे ग्राउंड फ्लोर पर।

ससुराल पहुंच सारे रिस्तेदारो ने हमारा स्वागत किया सारा दिन दोनों बहने रिश्तेदारों से घिरी रही।
रात हुई हमने खाना खाया हम दोनो बहनो को अलग अलग रूम मे ले जाया गया। रूम बहुत अच्छा सजा हुआ था फूलों से बेड सजा हुआ था। सभी लोग मुझे बेडरूम मे छोड़ चली गई मै अकेले रूम मे थी तभी लाइट चली गई मै बेड पर बैठी थी मै मोबाईल की लाइट जला दी।

कुछ ही देर मे मेरे पति अन्दर आए।
साहिल: आपको डर तो नही लग रहा है अकेले?
मै:( घुंघट डाल बैठी थी) नही।

वो अपनी बहन को आवाज देते हैं। उनकी बहन आती है।
साहिल: दीदी मै कब से बोल रहा था कि जेनरेटर खरीद लेते हैं लेकिन कोई मेरी सुनता कहा है? अब देखो लाइट चली गई रात भर मरो अंधेरे मे।
दीदी: अरे गुस्सा क्यों हो रहा है लाइट आ जाएगी ना।
साहिल: नही आएगी ट्रक ने टक्कर मारी है 11000 का पोल गिर गया है अब कल ही आएगी।
ऐसा करो आप यहां सो जाओ मै इतनी गर्मी मे रूम मे सोने वाला नही हुं मै चला छत पर।
दीदी: अरे पर रूक तो सही।

मेरे पति बिना कुछ सुने चले गए, सच मे बहुत गर्मी थी जून के महीने मे।
मै उनकी बहन के साथ सो गई हल्के कपड़े पहन कर।

सुबह हुई तो उठी मै नहा ली मेरे पति मुझे नजर नही आ रहे थे लाइट अभी तक नही आई थी मै शालू को ढूंढ़ने लगी।
कुछ देर बाद मै उसके कमरे मे गई उसकी आंखें बोझिल सी थीं।
कुछ देर मे दोनो बहने अकेली रूम मे रह गई।

मै:(धीरे से) क्या हुआ, इतनी नींद मे क्यों है?
शालू:(शर्माते हुए) कुछ नही दीदी बस ऐसे ही!
मै समझ गई कि इनसे सुहागरात मना ली।
मै: तूने कर लिया क्या?
शालू:(शर्माते हुए) हां।
मै:(उसके माथे को चूम ली) कैसा लग रहा है?
शालू: थोड़ा दर्द हो रहा है।
मै: हां दर्द तो होगा बूआ बोली थी ना। रूक मै दवाई ला कर देती हूं।
शालू: आपको दर्द नही हो रहा है?
मै: अरे मै अभी की कहां हुं।

तभी किसी के आने की आहट हुई हम दोनो चुप हो गई। हमारी ननद आई थी और हमे बुला रही थीं।

मै शालू को दवाई देती हूं और उसे नहाने बोलती हुं।
सुबह के दस बज गए थे सभी खाना बना रहे थे मेरे पति मुझे कहीं नजर नही आ रहे थे।

कुछ एक घंटे बाद साहिल घर आए जनरेटर चालू होने की आवाज आई। मै अपने रूम मे बैठी थी।
बाहर हॉल मे सभी खाना खाने बैठे हुए थे।
सासू मां: कहां गया था सुबह से तु।
साहिल: देख जनरेटर ले आया मै,।
सासु मां : अच्छा ठीक है अब नहा ले और खाना खा।

सभी हॉल मे खाना खा रहे थे मै और मेरी बहन रूम मे बैठे थीं अपनी ननद के साथ।

कुछ देर मे साहिल नहा कर कमरे मे आए मै उन्हे पहली बार देख रही थी इतने नजदीक से वो भी मुझे शायद पहली बार देख रहे थे फिर उन्होने मेरी बहन को देखा शालू हल्का घूंघट कर ली।
फिर वो बाहर चले गए।

साहिल की बूआ हमें खाना खाने बुलाती हैं।

सभी लेडिस हॉल मे टेबल पर खाने बैठती हैं साहिल नीचे खाने बैठते हैं सागर खाना खा सोफे पर बैठा था।
लाइट आ जाती है जेनरेटर बंद हो जाता है।
सागर: लाइट तो आ गई अब जेनरेटर खरीदने का क्या फायदा हुआ।
साहिल कुछ नही बोले।
बूआ: अरे नीचे क्यों बैठा है ऊपर बैठ!
साहिल: नही बूआ मै नीचे ही ठीक हुं।
बूआ: अरे मेरा प्यारा बेटा आजा इधर।
साहिल: मै कोई आपका प्यारा बेटा नही हुं, आपका भी प्यारा बेटा सागर ही है!
बूआ: अरे नही तु है मेरा प्यारा बेटा।
साहिल:(हंसते हुए) अगर मै प्यारा होता तो जिन्दगी भर आपलोग मुझे दूसरी अच्छी चीज नही देते?
ननद:(हंसते हुए) तु कहना क्या चाहता है?
साहिल: और नही तो क्या सारी जिन्दगी कोई भी चीज या खिलौना जो अच्छा होता वो सागर को देते मुझे दूसरा वाला,। ये देख घड़ी, बूआ तु पिछली बार दो घड़ी लाई थी, ये देख अच्छी वाली उसको मिली  दूसरी वाली मुझे।
बूआ: अरे मैने तो नही दी ना? मै तो तुझे ही प्यार करती हूं।
साहिल:(हंसते हुए) कोई प्यार व्यार नही करती है तू मुझे! अगर प्यार करती तो मेरी शादी सागर के दुल्हन से करवाती। यहां भी मुझे सेकंड बेस्ट लड़की मिली।

मुझे थोड़ा बुरा लगा ये सुनकर।
सागर: जिसकी जैसी किस्मत होगी वैसी मिलेगी।
बूआ: अरे कोई अन्तर तो नही है दोनो मे, मुझे तो दोनो एक सी लगती हैं।
ननद:(हंसते हुए) इसलिए तो देखने बोली थी, जो देखने गया उसे अच्छी मिली तू तो देखने ही नही गया।
साहिल: मै तो बुआ के भरोसे था।

सासु मां: बस कर अब खाना खत्म कर।

मै जल्दी से खाना खत्म की और कमरे मे आ गई।
मै सोचने लगी कि क्या सच मे मै अपने पति को पसन्द नही आई।

हम दोनो बहने जुड़वा हैं बिल्कुल एक जैसी दिखती हैं एक जैसी बॉडी ग्रोथ है दोनो का फिगर एक जैसा है 32_28_34 । दोनो गोरी सुंदर हैं।
दोनों बिल्कुल फोटो कापी लगती हैं।
हां लेकिन अगर दोनो की तुलना करने पर शालू मुझसे अच्छी लगती है।

मै अपने रूम मे अकेली सोच रही थी कि तभी साहिल अंदर आए मै बेड से उठ खड़ी हो गई और बैग उठा कपड़े खोजने का बहाना करने लगी।
साहिल: क्या हुआ खड़ी क्यों हो गई? बैठी रहो।
मै कुछ नही बोली। वो कुछ देर मेरे चेहरे को देखते रहे।

साहिल : क्या मै बाहर जो तुम्हे सेकंड बेस्ट बोला उससे नाराज हो?
मै कुछ नही बोली।
वो मेरे कदमों मे घुटनो के बल बैठ गए और मेरे हाथों को अपने हाथों मे ले चूम लिया।

साहिल: तुम भले ही अपनी बहन से थोड़ी कम सुंदर हो लेकिन मेरे लिए तो तुम ही बेस्ट हो।
मै शर्मा गई।
वो खड़े हुए और मुझे बांहों मे भर मेरे होंठ चूम लिए।

मै:(शर्माते हुए) आह छोड़िए कोई आ जायेगा गेट खुला है।
वो मुझे गोद मे उठा लेते हैं मै छोड़ने को कहती हूं। वो गोद मे उठा मुझे हॉल मे ले आते हैं मै पल्लू कर लेती हैं।

साहिल: आई लव यू बूआ, तू मेरे लिए बेस्ट दुल्हन लाई है!

बूआ:(हंसते हुए) तो गोद मे उठा कर क्यों घूम रहा है?
वो मुझे उतारे हैं मै शर्माते हुए कमरे मे भाग आती हूं सबके सामने वो मुझे गोद मे उठाए थे। सभी हंस रहे थे।

कुछ देर बाद साहिल कमरे मे आते हैं।

साहिल: क्या हुआ तुम भाग क्यों आईं।?
मै: (शर्माते हुए) सबके सामने गोद मे लिए हुए थे सब कितना हंस रहे थे।
साहिल: अरे मेरी बीबी मै जो भी करूं, जमाने को हंसने दो।
वो मुझे बांहों मे भरने लगे।
मै: पहले गेट तो बन्द कर लीजिए।

वो गेट बंद कर आ गए और मुझे बांहों मे भर लिया मै उनकी बांहों मे सिमटती चली गई। मुझे काफी अच्छा लग रहा था, लेकिन मेरी सहेलियां बताई थीं कि थोड़े नखरे करना तो मै छुटने की कोशिश की तो उन्होंने छोड़ दिया मुझे अफसोस हुआ।

अब हम बेड पर बैठ बातें करने लगे वो अपने परिवार के बारे मे बताने लगे मेरे बारे मे पुछने लगे।
कुछ देर बात करते हुए वो मेरे गोद मे सर रख दिए और लेट गए मै उनके बाल सहलाने लगी उनके बाल एक दम रेशम की तरह मुलायम थे।
कुछ देर मे वो सो गए।
मै उनका सर गोद मे रखे ही सो गई।

कुछ 4 बजे ननद जी गेट खटताई तो मै उठ कर दरवाज़ा खोली।

रात को गांव मे एक रस्म होती है जिसमे आम के पत्तों के गुच्छों से सभी भाभी देवर एक दूसरे को मारते हैं कमर पर और घूमते हैं। नए दूल्हे दुल्हन भी एक दुसरे को मारते हैं।

घर के ही अंदर खेतों में सभी गए और सभी देवर भाभी रस्म करने लगे।
साहिल:(मजाक करते हुए) मेरी लुगाई को जो किसी ने ज़ोर से मारा तो उसके सिर के बाल रात मे काट दूंगा।
कोई देवर बोला: अरे मरहम भी लगा देगें।
सभी खूब मजाक कर रहे थे गीत गाए जा रहे थे।
मेरे पति मुझे बहुत धीरे धीरे मार रहे थे यूं कहिए छु रहे थे सभी देवर भी मेरे साथ नर्मी से पेस आए और साहिल को जोरू का गुलाम बोल चिड़ा रहे थे।

अब शालू और सागर घूम रहे थे और उनके बगल मे मै किसी देवर के साथ घूम रही थी सागर ने शालू को ज़ोर से मार दिया मेरा हाथ घूम गया और मै सागर के गान्ड पर ज़ोर से छड़ी से मार दी।

सागर:(हंसते हुए) आह भाभी मुझे क्यों मार रही हो अभी उसके साथ घूम रही हो।
साहिल: अबे ज़ोर से क्यों मारा?
सागर: अरे अपनी बीबी को मारा, तुम्हारी बीबी को थोड़े मारा।
बूआ जी: अरे ये दोनों तो यहां भी झगड़ने लगे।

सभी अब रस्म कर घर आते हैं और खाना खाते हैं।
मै अपने कमरे मे जाती हूं कुछ देर बाद साहिल आते हैं। गेट बंद कर वो मुझे बांहों मे भर लेते हैं मै छुटने की कोशिश करती हुं।

साहिल: देखो मुझे मालूम है सहेलियां सिखाती हैं सबको की थोड़ा नखरे करना, नही तो पति तुम्हें गलत समझेगा, लेकिन मै चाहता हूं कि तुम एन्जॉय करो मै गलत नही समझूंगा।

मै शर्मा गई उनकी बातें सुनकर मेरी सहेलियां सच मे बताई थीं कि नखरे करना टांगे मत फैलाना, कपड़े मत खोलना, किस करने मत देना खास कर होंठों पर। और भी बहुत सी बातें।
लेकिन मै अब सोच ली थी कि सहेलियां जाए मां चुदाने मै तो एन्जॉय करूंगी।

अब वो मुझे बांहों मे भरे हुए जकड़ लिए मै भी हल्का जकड़ ली वो हंसने लगे।
वो अपने होंठ मेरे होंठ तक ले आए मै भी अपने होंठ उनके होंठ से मिला दी। वो मेरे होंठ चूसने लगे मै भी हल्के हल्के चूसने लगी।
ये मेरी लाईफ का पहला किस था मेरा शरीर गंगना गया था।

हम कुछ देर हल्के हल्के एक दूसरे के होंठ चूसते रहे फिर उन्होने होंठ हटा लिए और गाल गर्दन चूसने लगे मेरा और मन था उनके होंठ चूसने का।

वो मेरे कान को चूसने लगे मुझे गुदगुदी होने लगी
वो मेरे कान गले गर्दन कन्धे को चूस रहे थे मै भी उन्हें चूम रही थी हम दोनो मदहोश हो चूके थे।
कुछ देर मे हमारी सांसें फूलने लगी तो हम अलग हुए हमारी नज़रें मिली तो मै शर्मा गई।

अब वो अलमारी खोल एक रिंग निकाल लाए और मुझे पहनाते हुए मेरे हाथों को चूम लिया वो एक प्लैटिनम की बहुत ही सुन्दर रिंग थी।

अब हम बेड पर लेट गए और एक दूसरे को देख देख शरमाने लगे मेरा उनके होंठ चूसने का मन हो रहा था मै शरमाते हुए उनके होंठ से होंठ लगा चूसने लगी।

वो मेरे पीठ कमर सहलाते हुए मेरे होंठ चूसने लगे।
मै उनके गाल ढूठी माथे पर चूम ली, उनके आंख चूम ली। उनके गले गर्दन को चूमने लगी उनकी आह निकल गई। वो मेरे गर्दन के नसों को चूस रहे थे मेरी आह निकल पड़ी।

अब वो मेरी साड़ी का पल्लू हटाने लगे मेरे मम्मे उनके सीने से दबे हुए थे।
साड़ी का पल्लू हटा वो मेरे सीने को चूमने लगे और मेरे चूचों पर हाथ रख सहलाने लगे मेरी आह निकल गई पहली बार किसी ने मेरे मम्मे सहलाए थे।

अब वो ब्लाउज खोलने लगे, मै उनके होंठ चूसे जा रही थी वो धीरे धीरे ब्लाउज खोल दिए फिर ब्रा भी खोल दिए मै शर्मा गई।

मेरे चूंचे उनके सामने थे उन्होंने अपना मुंह सीने पर लगा दिया और मेरे चूंचे चूमने चाटने लगे चूसने लगी मेरी आह निकल जाती लेकिन मै बर्दास्त कर रही थी अपनी आवाज दबा रही थी।

वो चूंचे चूसते हुए मेरे पेट और नाभि चूसने लगे मेरे कमर चूसने लगे।

अब नीचे जा बैठ गए और मेरे पैर पकड़ मेरे पैर चूमने लगे मेरे तलवे चूसने लगे मै छुड़ाने लगी लेकिन वो मेरी पैर की अंगुलियों को चूसने लगे। मुझे गुदगुदी हो रही थी।

अब वो पैर चूमते हुए ऊपर आने लगे मेरे घुटने चूसने लगे मै थोड़ा सा रिसिस्ट की।
अब वो मेरी कमर चूसते हुए मेरी साड़ी खोलने लगे मै उनका हाथ पकड़ ली मै सोची पूरी नंगी हो जाऊंगी तो अच्छा नही लगेगा वो भी अब मेरे ऊपर आ मुझे किस करने लगे मै उनके होंठ चूसने लगी।

अब मुझे मेरी बूआ की बात याद आई उसने कहा था कि तेरा पति नेचर का बहुत अच्छा है मै आजमाने की सोची और खुलकर एन्जॉय करने की सोची।

मै उन्हे पलट दी और उनके ऊपर लेट किस करने लगी और अपने हाथ से शर्ट के बटन खोलने लगी एक बटन नही खुल रहा था तो दोनो हाथ ले जा तोड़ दी।

साहिल:(हंसते हुए) क्या कर रही हो?
मै उनके गर्दन को चूसने लगी उनके सीने को चूसने लगी उनके निप्पल काट लेती उनके पेट को चूमने लगी। मै अब पूरी नंगी होने के मूड मे थी वैसे भी बहुत गर्मी थी मै उनका हाथ पकड़ अपने कमर पर रख दी वो मेरी गान्ड दबाने लगे मेरी आह निकल गई मै सिसकारी भरने लगी मुझे पता नही उनके होंठों मे क्या स्वाद आ रहा था मै उन्हें चूसे जा रही थी।
वो मेरी साड़ी उठाने लगे तो मै लेट गई और उनके हाथ मे अपने पेटिकोट का नाड़ा पकड़ा दिया वो समझ गए ।

वो मेरी नाभि चुसने लगे मेरी सिसकारी निकल गई वो जीभ से नाभि की गहराई नापने लगे।
अब दांतों से नाडे को पकड़ खींच दिए और पेडू चूमते हुए साड़ी पेटीकोट उतारने लगे मै भी गान्ड उठा उतारने मे मदद करी।
वो उतारते जा रहे थे और चूमते जा रहे थे मेरी बूर को पैन्टी के ऊपर से चूम लिया हल्के से मेरी आह निकल गई वो हंसने लगे।

साहिल: ओह माई गॉड इतनी सेक्सी पैन्टी।
मै शर्मा गई ओ जांघ चूमते हुए पूरी साड़ी उतार दिए मै उन्हें अपने ऊपर खींच ली और उनके होंठ चूसने लगी।
वो अब धीरे धीरे चूसते हुए नीचे जाने लगे मेरे मम्मे चूसने लगी मेरे निप्पल चूसने लगे मै आह आह कर रही थी।
मेरे पेट नाभि चूसते हुए वो पेडू चूसने लगे मेरी पैंटी को दांतो मे दबा उतारने लगे, मेरी बूर गीली हो गई थी
अब मै पूरी तरह से नंगी थी।

वो मेरी बूर को देखे जा रहे थे मै अपने पैर चिपकाए हुए थी मेरी बूर धंसी हुई है।
साहिल:(हंसते हुए) मैने सुना था बूर काली होती है तुम्हारी तो एक दम उजली और चिकनी है।
मै:(शर्माते हुए) सुना है या किसी का देखा भी है?
साहिल:(मेरे चूतड को साईड से चूमते हुए) बताओ ना तुम्हारी इतनी गोरी कैसे है?. मेक अप तो नही की हो।
वो हंसते हुए बोले।

मै: नही मेरी और मेरी बहन की गोरी ही है।
मेरे मुंह से गलती से निकल गया शालू के बारे मे।
साहिल:(हंसते हुए) तुम अपनी बहन के बारे मे मुझे क्यों बता रही हो।
मै शर्मा गई।

वो मेरी बूर पर जीभ फिरा दिए मै सिहर उठी।
वो मेरी बूर चूमने लगे और हल्के हल्के पैर खोलने की कोशिश करने लगे मै हल्का विरोध करते हुए मजे ले रही थी।

वो अब मेरी जांघ चूसने लगे धीरे धीरे मै पूरा पैर खोल दी वो मजे से मेरी बूर चूसने लगे मेरी बूर पानी छोड़ तर हो चुकी थी मै आह आह करे जा रही थी।
अब मै उन्हे ऊपर खींच ली और उनके होंठ चूसने लगी जिससे मुझे मेरी बूर का टेस्ट फिल हुआ।
वो अपनी जीभ मेरी मूंह मे डालने लगे मै उनका जीभ चूसने लगी कभी उसे दांतों से दबा लेती उनकी आह निकल जाती।

मै उनके पीठ पर हाथ फिराते हुए उनके पैन्ट को खींचने लगी वो अपना पैंट उतार दिए।
मै पहली बार लन्ड देख रही थी एक दम टाईट था और हल्का काला एक दम काले नाग की तरह मेरी आंखें उसे देख फटी की फटी रह गई। बाल बिल्कुल भी नही थे बिल्कुल चिकना बना रखा था उन्होने उसे।

मै उनके आंखों मे देख शर्मा गई, वो हल्के से लन्ड मेरी तरफ करते हैं मै उसे हल्का सा छू हाथ हटा लेती हूं।
मै अब लेट जाती हूं वो मुझे बेड किनारे खींच खड़े हो जाते हैं और बूर को चूस गिला करते हैं कुछ थूक लन्ड पर लगाते हैं मै सर उठा देखती हूं वो लन्ड के स्कीन को पीछे करते हैं उनका लाल सुपाड़ा बाहर आ चमक रहा था।

वो बूर पर सुपाड़े को घिसते हैं मेरी आह निकल जाती है अब वो हल्के से धक्का लगाते हैं लन्ड फिसल जाता है वो फिर धक्का लगाते हैं उनका सुपाड़ा मेरी बूर मे चला जाता है आधा मेरी आह निकल जाती है वो उसे ही आगे पीछे करते हैं।
अब वो एक झटका दे सुपाड़ा घुसा देते हैं मेरी आह निकल जाती है।
साहिल: दर्द हो रहा है क्या?
मै: हल्का सा, आप ऐसा करो मेरा मूंह बन्द कर दो नही तो मै इतनी जोर से चीखूंगी की पुरा घर उठ जाएगा।
साहिल: अच्छा ठीक है!

वो अब मेरे ऊपर लेट गए और मेरे होंठ अपने होंठ मे भर लिए। मै उनके होंठ चूसने लगी।
अब हल्का झटका दे उन्होने आधा लन्ड घुसा दिया मेरी चीख निकल जाती मै उनके होंठ दांतों से काट ली। वो अपने होंठ छुड़ाने लगे।

वो मुझे स्मूच करते हुए कुछ देर वैसे ही रहे। कुछ देर मे मुझे थोड़ी राहत मिली तो वो हल्के हल्के कमर हिला चोदने लगे मै उनके होंठ चूसे जा रही थी।
साहिल: अब कैसा लग रहा है?
मै: थोड़ा अच्छा लग रहा है, और कितना बाकी है?
साहिल: 3इन्च होगा, डाल दूं?
मै: हां, लेकिन पहले अपने होंठ चूसने दो।
साहिल: नही तू काट कर घायल कर दी है देख खून निकल आया था तु कुछ और डाल।
मै: ठीक है।

मै उनके कन्धे को चूसने लगी, वो हल्के हल्के चोदने लगे मुझे मजा आ रहा था। कुछ देर बाद वो एक झटका दे पुरा लन्ड घुसा दिए मै उनके कन्धे को काट ली अपनी चीख रोकने के लिए । अपने नाखून पीठ मे धंसा दी।
उनकी भी आह निकल गई मेरी आंखों से आंसू निकलने लगे मुझे ऐसा लग रहा था मेरी बूर मे गर्म सरिया घूस गया हो।
मेरे चूतड पर कुछ गर्म महसूस हुआ मै समझ गई खून बह गया है मेरा दर्द से बुरा हाल हो रहा था मै बहुत बर्दास्त कर रही थी।

वो मेरे आंसू पीने लगे मुझे चूमने लगे सहलाने लगे मेरे चूंचे कान गले को चूसने लगे कुछ मिनट बाद मुझे थोड़ी राहत मिली।

साहिल: अब कैसा लग रहा है?
मै: अब पहले से कम दर्द है आप हल्के हल्के करो।
साहिल:(मुसकुराते हुए) क्या करूं।
मै शर्मा गई और उनके गाल चूसने लगी।
वो अब हल्के हल्के चोदने लगे मुझे मीठा मीठा प्यारा प्यारा दर्द हो रहा था मै आहें भर रही थी।
वो कभी गले को चूसते कभी मम्मों को कभी कान को। मै मदहोश हुऐ जा रही थी मै अपनी टांग उनकी कमर पर लपेट ली मै खुलकर मजे ले रही थी।
वो खचा खच चोद रहे थे मेरी बूर लन्ड को कसे हुए थी।
तभी लाइट चली गई।
साहिल: रुको मै जनरेटर चालू कर आता हूं।
मै उन्हें कस कर दबोच ली और चूमने लगी।
साहिल: अरे जाने दो गर्मी से बूरा हाल हो जाएगा।
मै: गर्मी मे भी मजा आएगा।
वो मुझे चोदने लगे हम दोनों पसीने से लथपथ हो गए थे। मुझे उनकी पसीने की खुशबू काफी अच्छी लग रही थी।
मै उनके कन्धे को चूस रही थी जिससे पसीना भी मुंह मे आ रहा था।
मै उनके कांख सूंघने लगी उसे चाटने लगी मुझे उनकी खुशबू बहुत अच्छी लग रही थी।
पसीने से दोनों का शरीर भीग कर चिकना हो गया था।

कुछ 5 मिनट बाद किसी ने जनरेटर चालू किया अब हवा चली तो पसीना सूखा।
वो आराम आराम से चोदते रहे।

कुछ देर मे मेरी बूर मे जैसे भूचाल आ गया हो मै अकड़ने लगी मेरी सांसें फूलने लगी उनकी भी सांसें तेज हो गई थीं मेरी बूर से फ्वारा फूट पड़ा और मै निढाल हो गई कुछ देर मे ही मेरी बूर मे गर्म रस फील हुआ मेरी बूर उस गर्म पानी को बर्दास्त न कर सकी और फिर झड़ गई।

हम दोनो निढाल हो एक दूसरे की बांहों मे पड़े रहे।
कुछ देर बाद हमारी नजरें मिली तो दोनो शर्मा गए और एक दूसरे को चूमने लगे सहलाने लगे।

अब मै उठने लगी तो मेरी बूर मे दर्द हो रहा था उनके लन्ड पर नजर पड़ी तो वो भी लाल हो गई थी और मेरी बूर भी।
वो मुझे गोद मे उठा बाथरूम ले जाते हैं और मुझे खड़ा करते हैं।

मै:(शर्माते हुए) आप जाओ मुझे सुसु करना है।
वो चले जाते हैं।

मै जैसे तैसे दर्द मे बैठती हूं और सुसु कर बूर साफ करती हूं उठने लगी तो फिर दर्द हुआ मै बाहर आ टॉवेल लपेट ली अब वो बाथरूम जा खुद को साफ करते हैं।

वो बाहर आए और मुझे बांहों मे भर लिया।
साहिल: ज्यादा दर्द हो रहा है?
मै: नही हल्का सा?
मुझे दर्द ज्यादा हो रहा था लेकिन मै कम बोल दी।
साहिल: ठीक है मै दवाई देता हूं खा लो, और ये बेडशीट धो देता हूं।
वो मुझे दर्द की दवा दिए और बेडशीट बदल दिए, वो खून से लाल हो गया था।

हम दोनो एक दूसरे को बांहों मे भर बातें करने लगे मै अपना पैर उनके कमर पर चढ़ा दी और सिर सीने पर रख दी और बातें करते हुए सो गए।

सुबह उन्होंने ने मुझे किस करते हुए जगाया मै शर्मा गई लेकिन एक लम्बा स्मूच उनके होंठ पर करी।
साहिल: तू बड़ी ही हॉट है मेरे लिए बेस्ट बीबी।
मै शर्मा गई।
मै: आप भी मेरे लिए बेस्ट हो।
वो मेरे गले को चूसने लगे।
मै: अब हटिए 6 बज गया है। मै नहाने जा रही हूं।

मै उन्हे किस कर बाथरुम मे चली गई और नहा कर कपड़े पहन ली। वो बाहर नहा लिए थे।

अब मै बाहर आई अपनी बहन से मिली वो मुझे देख मुस्करा रही थी।
मेरा दर्द अब ना के बराबर बचा था।
अब खाना खा सभी आराम करने लगे मै अपनी बहन के साथ अपने कमरे मे थी मै उससे बात करना चाहती थी अकेले मे लेकिन घर मे बहुत सारे मेहमान थे।
मै अपनी बहन को अपनी अंगूठी देने लगती हुं।
उसके पास शादी वाली सोने की अंगूठी ही थी।
मै: ये ले प्लैटिनम की रिंग तू पहन ले।
शालू: वाओ दी कितनी सुंदर है, लेकिन आपको जीजाजी ने दिया है तो आप ही पहनो ना।
मै: मेरी हर  चीज पर तेरा हक है तू रख ना, तुझे क्या दिया सागर ने दिखा।
शालू: पायल दिया है वो उधर रखा है।
मै: तू पहनी नही क्यों?
शालू: अरे रात को दिया और टेबल पर रख दिया।

वो कमरे से पायल ला दिखाती है।
हम दोनो कुछ देर बात करते हैं।

अब दोपहर मे आराम कर लिए और शाम को ननद और बूआ हमे घर घुमाने लगी बहुत बड़ा घर था।
कम से कम 2 एकड़ मे बाउंड्री करी हुई थी और 6000 स्क्वायर फीट मे घर बना था जिसमे स्विंग पुल गार्डन झूला आम का बाग लीची का बाग और पता नहीं क्या क्या था।

मै तो घूम घूम कर थक गई।
अब सभी घर आ गए और खाना बना खा लिए और सोने की तैयारी करने लगे।

मै कमरे मे गई कुछ देर मे साहिल आए वो लीची छील लाए थे और मुझे खाने के लिए दिए।
मै उन्हें खिलाने लगी तो वो खाते और उंगलियां काट या चूम लेते वो मुझे खिलाते तो मै भी काट लेती।
अब मै एक लीची अपने होंठ मे दबा उनके तरफ मुंह बढ़ा दी वो मेरे होंठों से लीची खाने लगे और चूसने लगे मुझे बड़ा मजा आ रहा था।

हम बहुत देर तक अटखेलियां करते रहे।
अब हम लेट गए और एक दूसरे को बांहों मे भर चूसने लगे। वो मेरे मम्मे सहलाने लगे मै उन्हें रोक दी।
मै; अभी खेत घूम घूम कर मै थक गई हूं कल करेगें।
साहिल: ठीक है लाओ पैर दबा देता हूं।
वो पैर दबाने लगे।

मै अपने पैर छुड़ाई और उन्हें कस कर बांहों मे भर लेट गई।
मै: चुप चाप सो जाइए।
वो मेरे सीने से लग सो गए ।
अब 3 बजे के करीब मुझे अपनी जांघों के बीच कुछ चुभा मै उठी वो साईड के बल मेरी बांहों मे थे मुझे सुसु आई थी तो मै हटी और बाथरूम जा आईं।

बाहर आईं तो वो पीठ के बल सोए हुऐ थे और उनका लन्ड पैंट में टेंट बनाए हुआ था मै बगल मे लेट गई और उनके बदन से चिपक कर उनके गाल गले कान चूसने लगी अब होंठ उनके होंठ पर रख हल्के हल्के चूसने लगी मुझे नींद आनी थी नही और मेरी बूर टीस उठती थी।

कुछ देर बाद उनकी नींद खुली वो मुझे किस करने लगे। कुछ देर मे मै उनके गले गर्दन को चूसने लगी वो मेरे मम्मे सहलाते हुए कान गले गर्दन सीने को चूसने लगे मै मदहोश होने लगी मेरी सिसकारी निकल गई अब वो ब्लाउज ब्रा खोल दिए मै उनकी गंजी खोल दी और उनके सीने को चूमने लगी वो मेरे मम्मे चूमते चाटते। मेरी आह निकल जाती

अब वो नाभि और पेट चाटने लगे मेरी सिसकारी निकलने लगी।
अब वो साड़ी खोलने लगे।
मै: सुबह होने वाली है, फिर पहनी पड़ेगी।

वो अब साड़ी उठा पेट पर कर दिए और पैर चूसने लगे अब जांघ चूसने लगे और पैन्टी उतार सीधा बूर पर जीभ फिरा दिए मेरी तो आह निकल गई।

अब वो बूर चूमने लगे और चूसने लगे मै मजे से दोहरी हुऐ जा रही थी और आह आह सी सी कर रही थी वो जोर जोर से बूर चूसने लगे मेरी टांगे फैली हुई थी मै उनके बाल सहला रही थी कुछ देर मे मेरी बूर मे तूफान आ गया और मै अकड़ने लगी और उनके मूंह मे ही झड़ गई वो बूर चाट चाट कर साफ कर दिए।
वो अब भी बूर चूसे जा रहे थे कुछ देर मे मै फिर गर्म हो गई।

अब मै उन्हे अपने ऊपर खींच ली और उनके जीभ चूसने लगी मै अपना जीभ उनके मूंह मे डाल रही थी।
अब वो अपनी पैंट उतार लन्ड को बूर पर रख धक्का दिए मेरी आह निकल गई और हल्का दर्द हुआ।
कुछ देर वैसे ही रहने के बाद वो एक झटका दे आधा लन्ड घुसा दिए मै उनके होंठ काट ली मुझे जोर का दर्द हुआ।

साहिल: आह होंठ क्यों काट रही है कल भी काट रही थी।
मै:(दर्द से करहाते हुए) मुझे दर्द हो रहा है?
साहिल: तो रहने देते हैं।
मै उनके गाल चूसने लगी और गांड़ उठा नीचे से धक्का दी।

वो हल्के हल्के चोदने लगे मै आह आह करने लगी धीरे धीरे उन्होने पूरा लन्ड घुसा दिया आराम आराम से मुझे हल्का दर्द हुआ लेकिन मजा भी आ रहा था।

अब वो हल्के हल्के चोदने लगे मै उन्हें बांहों मे भर ली और मजे से चुदवाने लगी वो मेरे गले कान चूसते हुए चोदने लगे मै आह आह करे जा रही थी कुछ 12 मिनट मे मै झड़ गई और निढाल हो गई वो मेरे मम्मे चूस रहे थे।

कुछ देर वो हल्के हल्के चोदते रहे मै फिर गर्म हो गई और मजे लेने लगी कुछ देर मे मै फिर झड़ गई अब मेरी बूर दर्द करने लगी भोर की चुदाई भारी पड़ रही थी वो झड़ ही नही रहे थे। कुछ देर बाद वो झड़ने वाले थे तो लन्ड बूर से निकाल बूर पर झड़ गए।

मै पहली बार मर्द का गाढ़ा रस देखी किसी लन्ड से माल निकलते देखी बहुत मजा आया।

अब उन्होने मुझे उठाया और दोनों बाथरुम जा खुद को साफ किया।
बाहर आ दोनो सो गए।
अब सुबह उठ नहा लिए सारे रिश्तेदार जाने लगे।
अब अगले दिन हम भी साहिल के शहर वाले घर पर आ गए जो 2 मंजिल का 4 बीएचके दोनों फ्लोर पर था हम ऊपर के फ्लोर पर दोनो बहन रहने लगे सास ससुर नीचे के फ्लोर पर।

अगले दिन मेरे पिरियड आ गए तो कुछ हुआ नही।
कुछ दिन बाद दोनो बहनें अपने पत्तियों के साथ मायके आ गई । कुछ दिन मायके मे रही तो शालू के साथ अकेले मे बात करने का मौका मिला।
मै उसे सब बता दी अपनी सुहाग रात के बारे मे।

शालू: दीदी तुम बढ़ा चढ़ा कर बता रही हो मुझे तो इतना मजा नही आया।
मै: नही मै सच बोल रही हूं, शायद सागर अभी नौसिखिया होगा तो उसे कुछ नही आता होगा, और वैसे भी पहली बार मजा नही आता सबको।

शालू:(हंसते हुए) तू कहना क्या चाहती है कि जीजू पहले ही सीखे हुए हैं?
मै:(शर्मा गई) मुझे क्या पता, लेकिन जिस तरह प्यार करते हैं लगता है घाट घाट का पानी पी रखा है।

दोनो बहने हंसने लगीं।
शालू मुझे खुलकर नही बताई बस बोली की मजा नही आया, मै सोची अभी दोनो नए हैं धीरे धीरे सीख जाएंगे।

अब दोनो भाई वापस चले गए हम दोनो बहने अपने घर 2 महीने रही उसके बाद मेरे पति हम दोनो को लेने आ गए वो तो उसी दिन चलने बोल रहे थे लेकिन मम्मी के कहने पर वो रूक गए।

अब रात को वो मेरे कमरे मे थे मै उधर गई और गेट बन्द कर ली वो मुझे बांहों मे भर लिए।

साहिल: आह रानी दो महीने तेरे बिना कैसे कटे तुझे बता नही सकता।
मै:(हंसते हुए) हाए मेरे राजा मै भी तेरे लिए कब से तड़प रही हुं।

मै उनके होंठ चूसने लगी। हम दोनो मदहोशी मे एक दुसरे को चूसे जा रहे थे कपड़े धीरे धीरे हमारे शरीर से उतर गए और हम नंगे हो गए वो मेरे अंग अंग को चूस रहे थे मेरी चूतड चूस और काट रहे थे।
आज मै उनके ऊपर चढ़ कर चुदाई । मजे से रात भर मे तीन बार मै चुदवाई और निढाल हो सो गई।

अब अगले दिन दोनो बहने ससुराल शहर वाले घर आ गई। मै मजे से रहने लगी।
शालू थोड़ी उदास दिखती थी मै उससे पूछती तो वो टाल देती और बोलती की वो खुश है।

धीरे धीरे मै रहते रहते समझने लगी कि दोनो भाईयों मे बिल्कुल नही बनती है दोनो छोटी छोटी बात पर बहस करने लगते कभी कभी तनातनी हो जाती,। मेरी सास उनका बर्ताव देख रो जाती। ससुर जी समझा कर थोड़े देर के लिए मामला ठंडा कर देते लेकिन वे मौका देख फिर बहस करने लगते।

ऐसे ही 1 महीना निकला ।
एक दिन मेरे पति दो दिन के लिए बाहर गए हुए थे। मै सुबह उठी तो शालू थोड़ी उदास थी।

मै: क्या हुआ इतनी उदास क्यों है?
शालू:(लगभग रोते हुए) घर की बहुत याद आ रही है मुझे घर जाना है।
मै: हे रो क्यों रही है घर जाना है तो कुछ दिन मे तेरे जीजू आएंगे तो घर चलना।
शालू: नही मुझे आज ही जाना है।

वो मुझे से लिपट गई।
मै: ठीक है अपने पति को बोल हम दोनो उसके साथ चलेंगे, कुछ दिन रहेगें तो तेरा मन बहल जाएगा।
शालू: नही आप भाई को बुला लो हम उसके साथ चलेंगे।
मै: तू रो क्यों रही है कुछ हुआ है क्या?
शालू: नही मुझे मम्मी की याद आ रही है मुझे घर जाना है।

मै अपनी सास से पुछ ली वो बहुत अच्छी हैं तुरन्त हां बोल दी।

अब मेरा भाई उसी दिन आ गया और हम दोनो बहने उसके साथ शाम को घर पहुंच गई।

घर पहुंच शालू  कमरे मे चेंज कर रही थी मै अचानक पहुंच गई वो ब्लाउज खोल ब्रा मे थी मेरी नजर उसके स्तन पर गई जिसपर मुझे कुछ निशान दिखा।

मै: ये क्या हुआ है दिखा?
वो अपने स्तन ढंक ली और कुछ नही हुआ है बोली।
मै उसके पल्लू हटाई और ब्रा खोल दी वो मना करती रही लेकिन मै खोल दी।
मै: ये लाल कैसे हो गया है निशान जैसा।
शालू: ब्रा की वजह से लाल हो गया होगा।

शालू नही बता रही थी मुझे साफ दिख रहा था कि स्तनों को बेदर्दी से मसला गया है और नोचा गया है नाखून के निशान जहां तहां थे। पीठ देखी तो उधर भी पंजों के निशान थे।

मै: सच बता क्या हुआ , क्या मारा है सागर ने।
शालू कुछ नही बोली बस मुझसे लिपट कर फफक कर रो पड़ी।

मेरा खुनखौल गया ये सोच कर कि उसने मेरी बहन को मारा है अगर अभी वो मेरे सामने होता तो मै उसकी जान ले लेती । मै खून का घूंट पी रही थी,। मन तो कर रहा था अभी जा कर उसे मार दूं।
पर पहले मै अपनी बहन को चुप कराई।
मै: बोल ना क्या मारा उसने तुझे, मै उसे अभी जाकर जान से मार दूंगी साले को।
शालू: नही मारा नही है।

वो और कुछ नही बोली बस रोने लगी। मै उसे चुप कराई। थोड़ी देर मे मां के आने की आहट हुई तो वो चुप हो गई मै अपनी आसूं पोंछ ली।

मै शान्त हुईं तो सोची अपने पति को बता देती हूं फिर सोची वो लड़ाई कर देगें।
मेरे पति का फोन आया तो मै बोली की कुछ दिन के लिए आई हुं फिर घर आ जाऊंगी।

अब कुछ दिन गुजर गए। शालू उदास रहती थी उसका पति उसे फोन करता था एक दिन पता नही दोनो मे क्या फोन पर झगड़ा हुआ शालू अपना फोन पटक पटक कर तोड़ दी।

मै उस टाईम उसके गुस्से को देख कुछ नही बोली।
अगले दिन मै बाजार जा उसके लिए आई फोन 8 ला दी मेरे पहले उसके पास 7 था।

मै: ये ले नया फोन।
शालू: नही मुझे नही चाहिए।
मै: ले ले ना देख मेरे पास अब भी आई फोन 6 है मै तेरे लिए 8 लाई हुं।
शालू: मेरे लिए 8क्यों लाई अपने लिए लेती।
मै: क्यूंकि मेरी प्यारी बहना मेरे पास जो भी बेस्ट होगा मै तुझे दूंगी।
शालू: आपको पति बेस्ट मिला क्या आप मुझे दे दोगी।

मै अचरज मे पड़ गई वो कपस्ते हुए बोल रही थी।
मै: हां दे दुंगी अपना पति भी तुझे।

शालू मुझसे लिपट कर रोने लगी।
मै: क्या हुआ कुछ बोलती भी नही सिर्फ रोए जा रही है।?
शालू:(रोते हुए) दीदी मुझे बहुत बुरा पति मिला है मै उसके पास कभी नही जाऊंगी।
मै; क्या हुआ कुछ बता तो।

वो कुछ नही बोल रही थी मै गुस्से मे अपनी पति को फोन कर बुला ली।

अगले दिन मेरे पति आ गए।
हम दोनो अकेले कमरे मे थे।
साहिल:, क्या हुआ इतनी तत्काल मे क्यों बुलाया?
मै: शालू और सागर मे झगड़ा हुआ है।
साहिल: किस बात पर हुआ है, चलो घर चल कर दोनो खुद झगड़ा सुलझा लेंगे।

मै: शालू नही जाना चाहती है।
साहिल: क्यों?
मै: उस टाईम जब मै अपने भाई के साथ आ गई थी उसके पहले सागर ने शालू को शायद मारा था।
मै उन्हे निशान वाली सब बात बता दी।

वो गुस्सा हो गए की मुझे उसी टाईम क्यों नही बताया, मै उन्हे शान्त कराई मै उन्हे किसी को कुछ नही बताने को बोली।
अगले दिन वो चले गए।
मुझे डर था कि मै बता तो दी थी कही ये जाकर झगड़ा ना कर ले ।

कुछ दिन निकल गए एक दिन मेरी सास का फोन आया वो रो रो कर बता रहीं थीं कि दोनो भाईयों ने मारपिटाई कर ली है मेरी सास बहुत रो रही थी।
मुझे अपने पति पर बहुत गुस्सा आया मै कुछ दिन उनसे बात नही की।

एक दिन मै अपनी सास से अपनी बुआ के यहां मिलने गई। मेरी बुआ और साहिल की बुआ का ससुराल एक ही शहर मे है।

मेरी सास और साहिल की बुआ बहुत रो रही थीं।
मेरी सास: पहले तो सिर्फ तनातनी करते थे लेकिन अब तो मार पीट करने लगे हैं। मै सोची थी शादी के बाद सुधर जायेंगे लेकिन ये तो!
इतना बोल वो रोने लगीं।

साहिल की बूआ: तुम दोनो बहनों मे कितना प्यार है, इसलिए तुम दोनो से शादी करवाई थी कि तुम दोनो सम्हाल लोगी।

फिर मेरी बूआ भी अकेले मे मुझे समझाने लगीं कि देख तू बड़ी है समझदार है जो करना है तुझे ही करना है, तू कुछ ऐसा कर की दोनो भाई प्यार से रहें।

सब मुझे बहुत समझा रहे थे मेरी सास मुझे घर चलने को बोल रही थीं मै बोल दी की कुछ दिन बाद आ जाऊंगी।

अब मै अपने घर आई।
कुछ दिन बाद अपने पति को फोन कर बुला ली।

आते ही अकेले मे उन्हें पहले खूब डांट लगाई।
मै: क्या जरुरत थी झगड़ा करने की?
साहिल: अरे झगड़ा किसी और बात पर हुआ था।
मै: मुझे मत सिखाओ आप, आपने उसी बात की खुन्नस निकाली है।
साहिल: अरे नही यार विस्वास करो मेरा।

वो कितना भी छुपा रहे थे, लेकिन मै समझ गई थी कि इन्होंने उसी बात की खुन्नस निकाली है।
साहिल: अरे अब झगड़ा ही करती रहोगी या घर भी चलोगी, मां तुम्हें बुला रही थी।
मै: इतनी ही मां की चिन्ता है तो झगड़ा क्यों करते हैं दोनो भाई, कल बूआ के यहां मम्मी और बूआ कितना रो रही थीं आपको पता है।

वो कुछ नही बोले।
मै: मै घर चलूंगी लेकिन पहले आप दोनो झगड़ा नही करोगे तब।, पहले मेरी कसम खाओ की अब झगड़ा नही करोगे।
साहिल: ठीक है मै अब झगड़ा नही करुंगा।

अब मै शालू के पास जाती हूं उसे घर चलने को बोलती हुं।
शालू: मै नही जाऊंगी।
मै: क्यों?
शालू; मै बोली थी ना, मै उस आदमी के पास अब कभी नही जाऊंगी, तुम्हारा पति तुम्हें प्यार करता है तुम्हे जाना है जाओ।
वो रोने लगी।

मै: अगर मै अपना पति तुझे दे दूं तो चलेगी।
शालू रोए जा रही थी।

मै: आज से मेरा पति तेरा हुआ।
शालू: तो तू क्या करेगी?
मै: मै तेरा पति ले लूंगी।
शालू: पागल मत बन, वो बहुत बुरा है, मेरे लिए तू अपनी जिन्दगी बर्बाद मत कर।
मै: मै उसे सुधार दूंगी, तू चिन्ता मत कर।

शालू: नही जो मेरी किस्मत मे था वहीं रहेगा।
मै: मै तेरे जीजू को बोल देती हूं कि आज से शालू आपकी बीबी है।
शालू: नही ऐसा मत कर प्लीज।
मै: नही तेरी जिन्दगी संवारना ही मेरी जिन्दगी का मकसद है, मै तो ये करूंगी।

वो मुझे रोकती है लेकिन मै चली जाती हूं।

अब रात को मै साहिल के साथ एक कमरे मे सोने आती हूं मै सोच कर आई थी कि आज आखरी बार साहिल के साथ प्यार कर लेती हूं और उन्हें सब बता देती हूं।

मै अंदर आते ही गेट बन्द कर उन्हें बांहों मे भर ली, हमने बहुत दिनो से चुदाई नही करी थी।
मै काफी इमोशनल हो गई थी।
उन्हे चूमे जा रही थी मै उनके गाल होंठ, कान गले सीने सब जगह चूस रही थी वो भी मेरे अंग अंग को चूस रहे थे।

मेरे मम्मे चूस रहे थे मेरी आह निकल गई अब मेरी साड़ी उठा बूर चूसने लगे मै सिसक सिसक मजे ले रही थी। अब मुझे पलट मेरी चूतड चूसने लगे और पीठ चूसने लगे।

मेरे गले गर्दन को चूसने लगे अब मै बुरी तरह गर्म हो गई थी मै उनको बाहों मे भर ली धीरे धीरे उन्होने लन्ड बूर मे घुसा दिया मै मजे से दोहरी हो गई मै गांड़ उठाने लगी वो हल्के हल्के चोदने लगे मै उनके होंठ चूसे जा रही थी।

हम दोनो एक दूसरे मे समा जाना चाहते थे। वो आराम आराम से चोद रहे थे मै दोनों पैरों और हाथों से उनको अपने अंदर समा लेना चाहती थी।

कुछ 20 मिनट की चुदाई मे मै दो बार झड़ चुकी थी वो आराम से चोद रहे थे जब झड़ने वाले थे तो हटने लगे मै उन्हें बांहों मे भर ली क्योंकि मेरे पिरियड 2 दिन पहले ही बन्द हुए थे।
वो मेरी बूर मे झड़ गए उनके गर्म पानी को मै महसूस कर रही थी मुझे बहुत मजा आया।

कुछ देर मे हमारी सांसे नॉर्मल हुई, तो हम एक दूसरे को चूमने लगे।

मै: अगर मै आपसे कुछ मागूंगी तो क्या आप देगें?
साहिल: तुम्हें तो मै अपनी जान भी दे सकता हूं मांगो क्या मांगना चाहती हो?
मै: मै चाहती हूं कि आप शालू के पति बन जाओ, मै आपके भाई की पत्नी।
साहिल:(चौंकते हुए) ये क्या कह रही हो तुम?
मै: मेरी बात पहले ध्यान से सुनिए, शालू के साथ सागर ने कुछ तो ऐसा किया है जो वो उसके पास नही जाना चाहती और मै भी अपनी बहन को ऐसे आदमी के पास जाने नही दूंगी जो उससे प्यार नही करता, उसे मारता हो।

साहिल: नही मै तुम्हारे बिना नही जी सकता मै मर जाऊंगा।
मै उनके होंठ पर हाथ रख दी।
मै: फिर कभी मरने की बात मत करना।
साहिल:(लगभग रूण्यांसा होते हुए) लेकिन मै तुमसे प्यार करता हूं, और क्या सागर मानेगा इन सबके लिए।
मै: उससे पुछने कौन जाएगा बस आप मान जाओ ना।
साहिल: लेकिन क्या तुम उसके साथ खुश रहोगी, अगर उसने जो शालू के साथ किया वो तुम्हारे साथ किया तो?
मै: मै उसे सुधार दूंगी।

साहिल: पर यार तुम ऐसा क्यों कर रही हो, शालू मेरे छोटे भाई की पत्नी है मेरे सामने वो हमेशा घूंघट करे रहती है मै उससे शादी कैसे कर सकता हूं।
मै: आप शादी तक सोच रहें हैं।
मुझे हंसी आ गई।
साहिल: तुम हंस क्यूं रही हो?
मै: अरे मेरे बुद्धू बालम मै शादी करने को नही कह रही हूं। हम दूनिया के लिए जैसे हैं वैसे ही रहेगें बस अकेले मे आप शालू के पति होगें।

साहिल: मतलब, यार मुझे कुछ समझ नही आ रहा है।
मै: देखो शालू अभी बहुत दुखी है अपने पति से, आपका काम है जैसे मुझे प्यार करते हो वैसे शालू को प्यार करना जब समय के साथ शालू खुश हो जाएगी आपका भाई उसके साथ गिले सिकवे दूर कर लेगा तो मै आपके पास आ जाऊंगी।

साहिल: पक्का ना, तुम हमेशा के लिए मुझे छोड़ तो नही दोगी।
मै; पक्का वादा करती हूं मै।
साहिल: लेकिन शालू क्या मान जाएगी?
मै: उसे मनाना आपका काम है।

साहिल: ठीक है अब वादा कर दिया है तो।
मै: आपके लिए तो अच्छा ही है, आप तो बोले ही थे कि शालू बेस्ट है तो मिल गई।
साहिल: ताना मार रही हो ऐसा करोगी तो मै करुंगा भी नही।
मै हंसने लगी।
मै: अच्छा ठीक है बाबा नही मारती ताना। अब चलो आखरी बार मुझे प्यार करने दो।
मै उनके होंठ चूसने लगी।
साहिल:(नखरे करते हुए) नही छोड़ो, मुझे प्यार नही करना अब।

मै उन्हे मना लेती हूं और रात भर जम कर चुदाई करती हूं।

सुबह उठ वो चलने को बोलते हैं मै शालू को बोलती हुं तो वो मना कर देती है मै उन्हें कुछ दिन बाद आने को बोलती हुं।

अब महीने बीत गए एक दिन साहिल ने बताया कि सागर 6 महीने के लिए बाहर जाने वाला है ट्रेनिंग के लिए।
अब मै शालू को ये बात बताई।
मै: तेरा पति 6 महीने के लिए बाहर जा रहा है अब तो चलेगी।
शालू: कोई पति नही है वो मेरा, और ये मुझे मत सुनाया कर कौन कहां जा रहा है।
मै: ठीक है साहिल ही तेरे पति हैं, लेकिन अब तो वो वहां नही रहेगा, तब तो चल सकती है।
शालू: जब चला जाएगा तब चली जाऊंगी, अभी माथा मत खराब कर।
मै: परसों वो चला जाएगा तो कल चलेंगे।
शालू: नही उसके जाने के बाद जाऊंगी।
मै: अरे तू उसके सामने मत जाना।

मै शालू को कल चलने के लिए मना लेती हूं।

अब अगले दिन हम साहिल के साथ शहर वाले घर आ गए।

शालू मेरे कमरे मे ऊपर थी जब मै बाहर आती तो वो अन्दर से गेट बंद कर लेती सागर से वो मिलना नही चाहती थी।
रात को खाना भी वो ऊपर रूम मे खाई।

अब खाना खा साहिल नीचे थे मै शालू के साथ अपने कमरे मे थी।
सागर ऊपर आया और कमरे मे झांकने लगा।

मै कमरे से बाहर आई तो वो अपने कमरे मे चला गया मै उसके पीछे उसके कमरे मे गई गेट बन्द कर सीधे दो झापड़ लगा दी।

सागर: ये क्या बत्तमीजी है भाभी क्यों मारी मुझे?
मै:(एक झापड़ और लगा दी) कमीने तेरी हिम्मत कैसे हुई थी मेरी बहन को मारने की।
सागर बुरी तरह मेरा ये रूप देख डर गया।

सागर: मैने कब मारा भाभी, मैने उसे कभी नही मारा मै कसम खा कर कहता हूं।
मै: तो बोल उस रात क्या किया था तुमने उसके साथ उसके जिस्म पर लाल निशान कैसे आए।

सागर: सॉरी भाभी उस घटना के लिए मै खुद बहुत शर्मिंदा हूं मेरी उससे नजरें मिलाने की भी हिम्मत नही हो रही है।
मै: नजरें मिलाने की तो दूर अब वो तुम्हें देखने को भी नही मिलेगी। वो तुझे देखना भी नही चाहती।
सागर: हां भाभी मेरी गलती की इतनी सजा तो मै डिजर्व करता हूं।
मै: सिर्फ ये सजा नही मिलेगी, अब तेरी बीबी भी तुझे नही मिलेगी आज से शालू साहिल की बीबी और मै तुम्हारी, अच्छे चीज की तुझे कदर नही है ना अब मै तुझे सिखाऊंगी।
सागर: ऐसा मत कहो भाभी मै शालू से प्यार करता हूं।
मै: तू प्यार का मतलब नही समझता अगर प्यार करता तो उसे इतनी बुरी तरह नही मारता।
सागर: मैने मारा नही था भाभी, वो तो उस दिन मै दवाई खा लिया था……
मै: बोल पूरा बोल।
सागर: सॉरी भाभी वो उस दिन मै वो वाली दवाई खा लिया था तो ज्यादा उत्तेजना मे मै उसके साथ थोड़ा जादती कर बैठा।

मै: तू हर मामले मे अपने भाई से खुद को आगे मानता है ना, लेकिन एक मामले मे तू उनसे कोसों पिछे है।
सागर: किस मामले मे?
मै: प्यार के मामले मे, नेचर के मामले मे लड़की को कैसे प्यार किया जाता है उसके मामले मे।
सागर: हां भाभी शायद आप सही हो। मै आप से और शालू से माफी मांगना चाहता हूं ।
मै: शालू को तो तुम भूल ही जाओ वो अभी बहुत गुस्सा है तुम पहले ट्रेनिंग से आओ, तब तक शायद उसका गुस्सा ठंडा हो जाए।

ये सब कह कर मै चली आई।
शालू मेरे कमरे मे सो रही थी वो अन्दर से बन्द था मै दूसरे कमरे मे गई उसमे साहिल सो रहे थे मै अन्दर गई उनसे लिपट कर सो गई।

अगले दिन सागर 1बजे चला गया, तब तक शालू कमरे से नही निकली।

अब रात को मै शालू और साहिल को साथ सोने बोली। साहिल ना नुकुर करने लगे मै दूसरे कमरे मे चली गई और बंद हो सो गई उन दोनो को एक कमरे मे बन्द कर दी।

अगले दिन उठी तो कमरे मे देखा नीचे एक बेडशीट लगा साहिल सो रहे हैं।
मै उन्हें अकेले मे ले जाकर बोली।
मै: नीचे क्यों सो रहे थे।
साहिल: अरे यार वो मेरे छोटे भाई की पत्नी है मै उसके साथ कैसे सो सकता हूं।

मै समझ गई कि ये थोड़ा संकोच कर रहे हैं।
अब कुछ दिन गुजरने लगे मै शालू और साहिल पर दवाब डालती साथ सोने को लेकिन शालू कुछ नही बोलती बस कहती मुझे अच्छा नही लगता ये सब।
मै समझने लगी कि उसे कभी इस तरह का प्यार मिला नही होगा।

धीरे धीरे मुझे लगा कि यहां कुछ नही होने वाला इन्हे अकेले मे थोड़ा टाईम दिया जाए।
अब नवम्बर या गया था गांव मे खेती थी तो धान कटवाने जाना था तो साहिल के साथ दोनो बहने भी आ गई।

हमे घर पहुंचते पहुंचते शाम हो गई इतने बडे़ घर मे कोई नही रहता था बस देख रेख करने वाले उधर सर्वेंट क्वार्टर मे रहते थे।
हम घर से बना हुआ खाना खा लिए और सोने की तैयारी करने लगे।

दोनो अलग अलग कमरे मे सोने को बोल रहे थे लेकिन मै बोली कि हम तीनों एक ही कमरे मे सो जाते हैं।

अब एक कमरे मे बेड पर बीच मे मै और दोनो तरफ वो दोनो सो गए।

रात को मै चुप चाप उठ कर एक साईड हो गई।
करीब 3 बजे साहिल मुझे हिला कर उठाए।
मै देखी तो शालू साहिल से चिपकी हुई थी उसे ठंड लग रही थी।
साहिल: (धीरे से) तुम उधर कब गई, इसका फेस अपनी तरफ करो।
मै: चुप चाप सो जाइए ना।
मै दोनो को अपनी साड़ी के पल्लू से ढंक देती हूं।

अब सुबह उठती हूं तो मै खाना बनाती हुं।
शालू साहिल के सामने हमेशा पल्लू करे रहती है तो उसे मना करती हूं।

शालू हमेशा उदास रहती थी मुझे बड़ा दुख होता उसे उदास देख वो पहले कितनी चंचल थी लेकिन अब मानो उसकी चंचलता मर गई हो।
दोपहर मे जब साहिल बाहर गए थे तो मै शालू से बात की।

मै: क्या हुआ है तुझे शालू तू इतनी उदास क्यों रहती है।
शालू: उदास कहां हुं ठीक ही तो हूं।
मै: झूठ मत बोल तू पहले कितनी खुश रहती थी, और तू साहिल के साथ क्यों नही सोती। मै उन पर कितना दवाब डालती हूं।
शालू: सच कहूं दीदी तो मुझे ना अब इन चीजों से डर लगता है कोई मर्द मुझे छूता है तो मै कांपने लगती हूं।
मै: सारे मर्द एक जैसे नही होते हैं शालू, तू तेरे जीजा को ही देख कल रात तू उनके साथ चिपकी हुई थी तुझे कुछ पता चला।
शालू: झूठ मत बोल मै तो तुम्हारे साथ सो रही थी।
मै: नही तू साहिल के साथ चिपक कर सोई थी। विस्वास नही है तो आने दो उन्हे पूछ लेना।
शालू: नही मत पूछना मुझे शर्म आएगी।
मै: अरे तुझे यकिन तो हो जाएगा।

कुछ देर बाद साहिल आ गए हम सोफे पर ही बैठे थे शालू सिर पर पल्लू कर ली मै उसे मना की।

मै: अच्छा आप बताइए शालू किसके साथ सुबह मे चिपक कर सो रही थी।
साहिल थोड़ा अक्चका गए।
मै: अरे इसे लग रहा है ये मेरे साथ सोई थी।
साहिल: तुम्हारे साथ चिपकी होती तो तुम्हारे ये बलून बीच मे उसे फिल होते ना।

मै उन्हे तकिया फेंक मारी शालू बूरी तरह शर्मा गई उनकी ये बात सुन।

हम दोनो हंसने लगे।
अब मै साहिल से अकेले मे बात करी की शालू इसी तरह की फनी बात करने से धीरे धीरे नॉर्मल होगी।

अब आगे की कहानी शालू के प्वाइंट ऑफ व्यू से देखते हैं।

हेलो मेरा नाम शालू है।
बाकी सब दीदी ने तो बता ही दिया होगा अब मै बताती हूं।
हमारी शादी हुई मै थोड़ी बहुत एक्साइटेड थी शादी को ले कर।

अब रात मे सुहाग रात के टाईम लाइट चली गई सागर रूम मे आए गर्मी बहुत थी उस रात मै घूंघट डाल बैठी थी वो गेट बन्द कर दिए। मोबाइल की लाईट जला उन्होने मेरा घूंघट उठाया।

कुछ देर बात की और मुझे एक पायल निकाल दिया जिसे टेबल पर रख दिया।
अब मुझे लिटा मेरे बगल मे लेट गए और मेरे स्तन पर हाथ रख दबाने लगे मै थोड़ी असहज महसूस कर रही थी। मै हाथ हटाने लगी तो वो ज़ोर ज़ोर से दबाने लगे मेरी ब्लाउज खोल ब्रा उतार दिया और जोर जोर से दबाने लगे मुझे दर्द हो रहा था लेकिन मै बर्दास्त कर रही थी।

अब वो मेरे होंठ चूसने लगे मुझे बिल्कुल अच्छा नही लग रहा था अब वो मेरे ऊपर चढ़ गए और अपना पैंट उतार मेरा लहंगा उठा मेरी पैन्टी उतार दिए।
मै हड़बड़ा गई लेकिन उन्होने मुझे कस कर जकड़ रखा था।

अब मेरे मुंह में मेरी ब्रा डाल दिए और लन्ड मेरी बूर पर रख धक्का लगा दिए। मुझे दर्द हो रहा था।
लन्ड एक दो बार फिसला लेकिन फिर बूर मे अचानक घूस गया मेरी जान निकल गई मेरी सहेलियां बताई थीं कि पहली बार दर्द होता है मै बर्दास्त कर रही थी।

अब अचानक कस कर धक्का लगा दिया मै दर्द से बेहोश हो गई।

अब जब होश मे आई तो सुबह होने वाली थी मेरी बूर मे असहनीय दर्द हो रहा था मेरे कपड़े जैसे तैसे हो रखे थे मेरी बूर पर कुछ लगा था जो सुख गया था।
मै अपनी हालत देख रो पड़ी अंदर से।

मै हिम्मत कर धीरे से अपना मोबाईल जला देखी अंधेरे मे अपने कपड़े सही की और बाथरूम जा खुद को साफ की, मेरी बूर पर खून जमा था और वापस आ सो गई।
सुबह बेडशीट पर खून देख मै डर गई और उसे धो दी कुछ देर बाद दीदी ने दर्द की दवाई दी तो दर्द कम हुआ।

अब कुछ रात तो उन्होने ने कुछ नही किया फिर एक रात वैसे ही किया मै दर्द से तड़पती हुई रोने लगी लेकिन वो नही रुके।

वो हर 6 या 7 दिन पर करते, मुझे लगता की सेक्स ऐसे ही होता होगा । लेकिन जब मायके आई तो दीदी बोली कि उसे बहुत मजा आता है कुछ ओर्गास्म होता है। मै तो कभी मजा फिल ही नही करी ऑर्गेज्म तो दूर की बात।
मै सहेलियों से भी बात की तो वो भी बोली बहुत मजा आता है।

अब मै उस हादसे के बारे मे बताती हूं।
उस रात मै सोने गई थोड़ी देर मे वो आए और मेरे ऊपर चढ़ मेरे होंठ चूसने लगे मेरे ब्लाउज खोल स्तन कस कर दबाने लगे और नोचने लगी मै दर्द से तड़प उठी मना करने लगी लेकिन वो नही माने और मेरी साड़ी उठा पैन्टी उतार दी और अपने लन्ड पर कॉन्डम चढ़ा लिया।

अब मुझे कस कर दबोच कर बूर मे लन्ड घुसा दिया मेरी दर्द से जान निकल गई मै रोने लगी तो मेरा गला दबा चोदने लगे मेरे मम्मे बुरी तरह मसल रहे थे मै रोए जा रही थी मै दर्द से तड़प रही थी।
कुछ देर बाद वो लन्ड निकाला मेरे सीने पर बैठ गए और लन्ड मेरे मूंह मे डालने की कोशिश करने लगे मै मुंह ज़ोर से बन्द कर ली तो वो लन्ड से चेहरे पर मारने लगे।

मै अपना चेहरा छुपाने के लिए पलट गई तो वो मेरी गान्ड पर लन्ड रख घुसाने की कोशिश करने लगे मै अपनी साड़ी से अपने चूतड ढंक ली और पैर मोड़ ली तो उसने मेरे पीठ पर पंजे से ज़ोर से मार दिया मै दर्द से तड़प गई और रोने लगी।

अब उसने मुझे जबरदस्ती सीधा लिटा दिया और मुझे दबोच कर चोदने लगा ज़ोर ज़ोर से मै बेहोश बेसुध सी हो पड़ी रही वो चोदता रहा।
कुछ देर बाद मै बेहोश हो गई। सुबह उठी तो मै खूब रोई अपनी हालत पर फिर खुद को सही की और फिर दीदी को बोल घर आ गई।

अब जिस दिन फोन तोड़ी थी उस दिन की बात बताती हूं।
उस दिन फोन आया था वो मुझे आने को बोल रहा था मै सीधा मना कर दी।
वो उधर से कहने लगा कि फिर तुझे वैसा ही चोदूंगा पिछली बार तो गान्ड छोड़ दी थी इस बार फाड़ दूंगा।
मै गुस्से मे फोन तोड़ दी और अपनी किस्मत पर खूब रोई।

अब उसके अगले दिन दीदी मुझे मोबाईल ला कर दी तो मै गुस्से मे बोल तो दी की “तूझे अच्छा पति मिला है तो क्या मुझे दे देगी”

मेरी दीदी मुझे बहुत प्यार करती है मै उसे जानती हूं उसने जब सोच लिया है कि वो अपना पति मुझे दे देगी तो दे देगी।
एक दिन तो मै दोनो को बात करते भी सुनी थी कि जब तक आप शालू को खुश नही कर देते उसे पहले जैसा चंचल नही बना देते, हम दोनो प्यार नही करेगें।

दीदी मुझे बहुत फोर्स करती जीजू के साथ सोने के लिए।

जिस दिन सागर ट्रेनिंग के लिए गया था उस रात को मै दीदी के कमरे मे लेटी  थी।
मेरे कमरे के बाहर दीदी जीजू को मेरे साथ सोने के लिए फोर्स कर रही थीं मै इधर जान बुझ कर पूरे बेड पर फैल कर लेट गई उधर दीदी जीजू को कमरे मे भेज बाहर से गेट बंद कर दी।
मै पूरे बेड पर फैली थी और सोने का नाटक कर रही थी।

जीजू कुछ देर तो कुर्सी पर बैठे रहे फिर अलमारी से एक बेडशीट निकाला और नीचे बिछा कर सो गए मुझे बहुत बुरा लगा लेकिन मै कुछ कर भी नही सकती थी। जब 2 बजे के करीब मुझे ठंड लगने लगी तो मै उठी देखी तो जीजू अपने घुटने मोड़ सो रहे थे शायद उन्हें भी ठंड लग रही थी मै उन्हे एक पतली चादर धीरे से ओढ़ा देती हूं।

कुछ दिन तो दीदी मुझे और जीजू को फोर्स करती है फिर हम तीनो गांव आ जाते हैं।

रात को बीच मे दीदी सोई थी मै भोर मे जब मुझे ठंड लगने लगी तो मै दीदी को बांहों मे भर ली और उससे चिपक कर सो रही थी दीदी अपने आंचल से ढकी हुई थी।

लेकिन दीदी सुबह बोली कि मै जीजू से चिपकी हुई थी मुझे विश्वास नही हुआ, फिर जीजू ने जो मजाक किया मै शर्मा कर लाल हो गई।

अब जीजू और दीदी मुझसे थोड़ा थोड़ा मजाक करने लगे थे जैसे एक दिन मै रूम से बाहर निकली तो सोफे पर दीदी बैठी थी जीजू उनके हाथ मे पॉलिश लगा रहे थे।
मै: आप रहने दीजिए मै लगा देती हूं।
वो मुझे नेल पॉलिश दे दिए फिर दुसरी नेल पॉलिश ला दीदी के पैरों मे लगाने लगे।
मै दीदी को पैर हटाने का इशारा की लेकिन वो मुस्कुरा कर रह गई।
मै: आप रहने दीजिए मै लगा दूंगी।
जीजू: अरे मै भी तो खाली बैठा हुं मै लगा देता हूं।

वो पैर मे लगा दिए दीदी पैर की ऊंगली उनके होंठों से सटा दी।
मै: ये क्या गन्दी हरकत है?
जीजू उसके तलवे चूम लिए।
दोनो हंसने लगे मै चुप हो गई।
अब मै अपने हाथ मे लगाने लगी तो जीजू मेरे पैर मे मुझे बिना छुए लगाने लगे मै पैर हटा ली दीदी मेरे पैर अपने पैर पर रख पकड़ ली और जीजू नेल पॉलिश लगाने लगे मै हटाने की कोशिश करी तो जीजू मेरे पैर पकड़ लिए मै थोड़ी असहज हो गई वो नेल पॉलिश लगा दिए।

रात को हम तीनो साथ ही सोते सोते समय दीदी बीच मे होती लेकिन रात मे उठ वो किनारे चली जाती, जीजू मुझे हाथ भी नही लगाते।
दीदी मुझे और जीजू पर बहुत दवाब बना रही थी।

एक दिन तो दीदी मेरी आंखें बन्द कर ले जाने लगी और सीधा स्विमिंग पूल मे कूदा दी।
मै साड़ी मे ही थी। मै पीछे पलटी तो थोड़ी दूर पर जीजू सिर्फ हॉफ पैंट मे नहा रहे थे।
मुझे देख वो शर्मा गए और अंदर भाग गए दीदी उन्हे रोकती रही लेकिन वो नही रुके।

धीरे धीरे मै भी नॉर्मल हो रही थी दीदी जीजू कभी नहा कर निकलते तो उनका टॉवल खिंचने का प्रयास करती कभी वो उन्हे गुदगुदी करती कभी जीजू दीदी को गुदगुदी करते। कभी दीदी मुझे गुदगुदी करती।

मै समझ रही थी कि दोनो मुझे खुश देखने के लिए ये सब कर रहे हैं।

एक रात को दीदी मुझे जबरदस्ती जीजू के साईड सुला दी और मेरा उनके हाथ मे दे दिया।

मै थोड़ी असहज महसूस कर रही थी जीजू मेरा हाथ पकड़े रहे।
मै चुप चाप लेटी रही जीजू भी ऊंगली पकड़ सो गए।

अब धीरे धीरे मुझे जीजू के छूने से असहज महसूस नही होती मै अब दिन मे भी कभी कभी उनसे टच हो जाती।

अब कभी कभी जीजू मुझे भी गुदगुदी करने लगे थे मै भी उन्हें गुदगुदी करती।

अब एक दिन शाम को जीजू बाहर गए थे खेतों की तरफ हल्के बादल लगने लगे घर के सामने ही लगभग 100 बोर धान खुले मे रखे थे घर मे सर्वेंट्स भी खेतों मे गए थे दीदी और मै अकेले थे घर मे दीदी धान के बोरों को खींच कर अंदर रूम मे करने लगी मै भी थोड़ी मदद की। हमसे बोरे तो उठ नही सके लेकिन दीदी और मै मिलकर बोरे अंदर कर दिए कुछ 10 बोरे हल्के भीग भी गए।

कुछ देर बाद जीजू आए वो पूरी तरह भीग गए थे, दीदी उन्हे कपड़े बदलने बोली तो वो बाथरूम जा नहा लिए दीदी उन्हें डांटी।
अब दीदी उनका सर टॉवल से पोंछ दी।
दीदी भी थक गई थी तो मै खाना बनाई और सबको खिला दी बारिश हल्की हल्की अभी भी हो रही थी।

अब सोने टाईम मुझे बीच मे सुला दिया। जीजू ठंड मे भी सिर्फ हॉफ पैंट और बनियान यानि गंजी मे सोते थे , हम तीनो एक ही रजाई मे सो गए।

रात को मेरी नींद खुली तो देखी जीजू ठंड से ठिठुर रहे हैं और अपने पैर मोड़ रखे हैं।
मै दीदी को उठाई तो वो नही उठी वो थकी हुई थी तो गहरी नींद मे थीं। अब जीजू को उठाने के लिए उन्हें टच की तो देखी उनका बदन एक दम ठंडा है,
उन्हे हिलाई तो वो नही उठे मै उन्हें एक और रजाई से ढक दी वो अब भी ठिठूर रहे थे।

मै थोड़ी देर सोची फिर अपना हाथ उनके ऊपर रख दी और पैर भी। थोड़ी देर मे उनका ठिठुरना बन्द हुआ। सुबह होते होते वो मुझसे चिपक गए।

अगली रात को जब सोने जाने लगे ।
मै: जीजू आप स्वेटर या थर्मल पहन कर सोइए, रात को जब ठंड लगती है तो आप बहुत चिपकते हैं।
मै मुस्कुरा कर बोली।

जीजू: अरे कल रात मै तुमसे चिपक गया था क्या मुझे लगा मेरी बीबी है, तभी मै कहूं कि कुछ अलग सा कैसे फील हो रहा है।
मै: ज्यादा बनो मत आप, आपको नही पता होता कि आपकी बीबी साईड मे सोती है।
दीदी:(हंसते हुए) मै अब उनकी बीबी थोड़े हूं, उनकी बीबी तो तू है।

जीजू चुप हो गए।
दीदी: और मै बोली थी इनको नही नहाने को लेकिन ये माने तब ना।

जीजू: अभी तो तुम बोली कि तुम मेरी बीबी नही हो तो तुम्हारी बात क्यों मानू।
दीदी: अच्छा तो अपनी बीबी की बात तो मान लो।
मै: मै तो कह रही हूं कि स्वेटर पहन लो।
जीजू: अरे रात को मुझे गर्मी लगने लगती है, मुझे ऐसा ही सोना पसन्द है।

जीजू मेरा हाथ अपनी हाथ मे ले मेरी उंगलियों से खेलने लगे।

हम तीनो एक ही रजाई मे लेटे थे मै बीच मे थी।
दीदी: तुम दोनो के बीच कितनी जगह है इधर मै बेड से गिर जाऊंगी।
वो मुझे धक्का दे जीजू से चिपका देती है।

सभी पीठ के बल लेटे थे जीजू के बाएं तरफ मै थी।

दीदी: इधर देखो हाथ लाओ देखूं बुखार तो नही है।
वो जीजू को बाई करवट सोने को कहती है और उनका दायां हाथ अपने हाथ मे ले मेरे पेट से होते हुए चेक करती हैं।

जीजू का हाथ मेरे पेट पर हाथ वो हटाने लगे लेकिन दीदी नही हटाने देती।
मै स्वेटर पहनी थी तो नंगे पेट पर हाथ नही लगा।

धीरे से दीदी स्वेटर हटा दी उनका हाथ मेरे नंगे पेट पर रख दिया। मै हटाने लगी तो दोनों मुझे गुदगुदी करने लगे। मै भी दोनो को गुदगुदी करने लगी।
अब जीजू मेरे पैर पकड़ मेरे पैरों मे गुदगुदी करने लगे। मै हंसे जा रही थी। दीदी भी कभी मेरी तरफ मिल जीजू को गुदगुदी करती तो कभी मुझे ही करने लगती।
जीजू मेरी पैर को कभी चूम लेते।
मै उनके कमर मे गुदगुदी कर रही थी।
दीदी: अरे इनके कांख मे गुदगुदी कर इनको बर्दास्त नही होगा।
दीदी उनके कांख मे गुदगुदी करने लगी जीजू मुझे छोड़ दीदी से बचने लगे।
मै भी उनके कांख मे गुदगुदी करने लगी।
जीजू दीदी के कमर मे गुदगुदी करने लगे दीदी अपना मूंह जीजू के कांख से लगा दी और उसे चूसने लगी।

जीजू हंसते हंसते हार मान गए।
जीजू: आह अब बस कर।

कुछ देर दीदी ने और गुदगुदी करी।
दीदी: क्या हुआ अपनी पर आईं तो बस कर।
जीजू: (अपनी सांस सही करते हुए) अरे तू साईड मे चूम रही थी तो मुझसे बर्दास्त नही होता।
दीदी: शालू याद रख ले ये जब भी गुदगुदी करें ना तो बस इनके कांख को चूमने लगना ये खुद हार मान जाएंगे।

मै: अरे लेकिन तुम साईड मे चूम क्यों रही थी सिर्फ गुदगुदी करने से भी तो हार जाते।
दीदी: अरे इनके साईड की खुशबू मुझे बहुत पसन्द है, तू एक बार सूंघ कर देख।

मै:( हंसते हुए) नही, नही ऐसे शौक तू ही पाल।
दीदी: कितनी प्यारी लगती है मेरी बहन हंसते हुए।

दीदी मुझे सीने से लगा लेती हैं और मेरे माथे पर चूम लेती है।
अब दीदी मुझे बांहों मे भर सो जाती हैं मेरा चेहरा उनकी तरफ था।
जीजू थोड़ा दूर मेरी पीठ के तरफ पीठ कर लेटे थे।
दीदी: आप क्यों इतना दूर सो रहे हो, आप भी आ जाओ इधर।

जीजू थोड़ा मेरी तरफ सरकते हैं।
दीदी उन्हे और करीब खींच मुझसे हल्का चिपका लेती है और उनका हाथ मेरी कमर से होते हुए अपने हाथ मे ले सो जाती है।

अगली सुबह मेरी नींद खुलती है तो मेरी गान्ड पर कुछ चुभ रहा था मुझे लगा जीजू के पैकेट मे मोबाइल है मै रजाई हटाती हूं तो देखी जीजू का लन्ड पैंट मे तंबू बनाए हुए था मै थोड़ी सहम गई और हड़बड़ा कर दीदी के तरफ ज्यादा सरक गई दीदी उठ गई।

दीदी: क्या हुआ इतनी सुबह क्यों उठ गई।
मै सहमी हुई सी कुछ नही बोली।
दीदी: क्या हुआ तू सहमी हुई सी क्यों है।
मै जीजू के लन्ड की तरफ इशारा की।
दीदी: अरे तू इससे डरती है, पागल, ये कुछ नही है।
मै: ये ऐसा क्यों हो रखा है कहीं जीजू कुछ करेगें तो नही ना।
मेरी हालत पतली हो गई थी।

दीदी: अरे ये सबका सुबह मे ऐसा हो जाता है, और तेरे जीजू कुछ नही करेगें तेरी मर्जी के खिलाफ। और तू इससे डर मत ये कुछ नही है, तू ये समझ ये बाहर जो गाड़ी खड़ी है उसका गियर है। देख मै तुझे गियर बदल कर दिखाती हूं।
दीदी जीजू को हल्का सा पलटती है वो पीठ के बल हो जाते हैं।
वो पैंट के ऊपर से लन्ड पकड़ लेती है, और गाड़ी के गियर के जैसे शिफ्ट करने लगती हैं।
दीदी: देख कितना स्मूथ गियर लग रहा है।

जीजू की नींद खुल जाती है।
जीजू: गियर तोड़ मत देना।

मै शर्मा कर बाहर चली जाती हूं।
मै बाथरूम से फ्रेस हो रूम मे उन्हें जगाने आ रही थी तभी दरवाजे से उनकी बातें सुनती हूं।

मै परदे से कमरे मे झांकती हुं। दोनो एक दूसरे को बांहों मे जकड़े थे।

जीजू: यार कब तक तुमसे यू दूर दूर रहूंगा।
दीदी: रहना तो पड़ेगा ना जान, हमने एक दुसरे से वादा किया है।
जीजू: यार मुझसे अब ये दूरी बर्दास्त नही होती।
दीदी: मुझसे भी ये सर्द भरी रातें अकेले नही कटती। लेकिन मै क्या कर सकती हूं हम एक दूसरे के वचन से बंधे हुए हैं।

जीजू: आज कितने दिनों बाद तुम्हें बांहों मे भर सुकून मिला है।
दीदी: मुझे भी लग रहा है जैसे सारी जिन्दगी तुम्हारी बाहों मे गुजार दूं।
दीदी: तुम जल्दी कोशिश क्यों नही करते।
जीजू; यार मै कर तो रहा हूं। शालू को अभी थोड़ा और टाईम चाहिए।
दीदी: हां उसे थोड़ा और टाईम लगेगा।

वो दोनो अपने होठ एक दूसरे के होठों के करीब लाते हैं कुछ देर वैसे ही रखते हैं उनके होठों के बीच करीब आधे ईंच का फासला होगा लेकिन वो किस नही करते हैं। अब दोनो उठने लगते हैं तो मै हॉल मे आ टेबल पर बैठ जाती हूं।

मै बैठे बैठे सोच रही थी कि मेरी वजह से मेरी दीदी जीजा प्यार नही कर पा रहे हैं। मुझे बहुत बुरा लग रहा था।
खाना खा जीजू बाहर चले गए तो मै दीदी से बात करी।

मै: आप दोनो प्यार क्यों नही कर रहे हैं?
दीदी: क्या प्यारमै कुछ समझी नही।
मै: अब से आप दोनो अकेले सोया करो मेरी वजह से आप दोनो क्यो दूर रहते हो।
दीदी: कौन दोनो साथ सोया करो।
मै: ज्यादा बनो मत, मै आपकी और जीजा जी की बात कर रही हुं।

दीदी: अब वो तेरे नही मेरे जीजा हैं, तू चाहती है कि मै तेरे पति के साथ सोऊं। (दीदी हंसते हुए बोली)
मै: ज्यादा बनो मत दीदी।

दीदी:(थोड़ा सीरियस होते हुए) देख शालू मैने और तेरे जीजा ने एक दूसरे से वादा किया है कि जब तक तेरा जो ये सेक्स से डर है नही भाग जाता हम दोनो भी प्यार नही करेंगे।

मै: दीदी मुझे ये सब नही पसन्द है मै क्या करूं।
दीदी: देख शालू हर मर्द एक जैसे नही होते तेरे जीजा मुझे बहुत प्यार करते हैं, वो तुझे भी बहुत प्यार करेगें।
मै: वो मालूम है मुझे, लेकिन मै क्या करूं मेरा मन ही नही करता ये सब करने को।

दीदी: अरे तेरे जीजू मे वो जादू है जो एक बार उनसे प्यार कर लेगी तो तो तू कभी उनको छोड़ने के बारे मे सोचेगी भी नही।

मै: मै तुम दोनो को छोड़ने के बारे मे कभी नही सोच सकती।

दीदी: तो तू फिर कुछ करती क्यों नही?
मै:, दीदी मुझे नही मन करता।
दीदी: देख तुझे पहले किसी के टच करने से भी डर लगता था, लेकिन जब तू जीजू के बाहों मे कभी होती है तो कैसा लगता है।
मै: ऐसा लगता है जैसे मै तुम्हारी बाहों मे हुं।

दीदी: और ऐसा तुझे इसलिए लगता है क्यूंकि जितना मै तुझे प्यार करती हूं उतना तेरे जीजू भी तुझे प्यार करते हैं।

मै भी अब थोड़ा मन बनाने लगी थी।

अब रात को सोने टाईम दीदी मुझे बोली कि जा तु आज जीजू के साथ अकेले सो जा। मै मना कर दी कि अभी नही। वो प्रेशर देने लगी मेरे मूंह से गलती से निकल गया कि मेरे पेरिड्स हैं। तो दीदी बोली ठीक है पीरियड्स के बाद तुझे पक्का सोना पड़ेगा।
मै अब कसमकस मे थी।

अब रात को सोते समय दीदी जीजू के कान मे कुछ कहती है जीजू मुझसे चिपक कर सोते हैं मेरा मूंह उनकी तरफ था।

वो मेरी आंखों मे देख रहे थे मै शर्मा रही थी, मुझे लग रहा था दीदी ने बता दिया है कि मै तैयार हुं।

वो मेरे चेहरे को देख मुस्कुरा रहे थे।
मै:(शर्माते हुए) आप मुझे देख यूं मुस्कुराना बंद करेगें या नही।
जीजू: (मुसकुराते हुए) नही मै तो मुस्कुराना बंद नहीं करुंगा।
मै: ठीक है मै दूसरी तरफ मूंह कर लेती हूं।

मै दूसरी तरफ मुंह कर ली।
जीजू मेरी नंगी पीठ पर होंठ लगा दिए मै सिहर गई।
अपना हाथ आगे कर मेरे पेट पर रख दिया दीदी अपनी एक टांग मेरी कमर पर रख दी।

धीरे धीरे हम वैसे ही सो गए।
ठंड के दिन मे गांव मे बहुत ठंड पड़ती है कोहरा भी घना छाया रहता है।

हम शहर की लड़कियां कभी कोहरा इतना नही देखी थी तो एक रात सबका मूड बना सुबह कि कल सुबह कोहरा देखने जायेंगे।

अगली सुबह सब जल्दी उठकर खेतों की तरफ निकल पड़े।7 बज चूके थे लेकिन हाथों को हाथ नही दिख रहा था। काफी ज्यादा ठंड थी। सभी जैकेट पहन रखे थे।

हम दोनो बहने जीजू का हाथ पकड़ चल रहे थे सारे अपने ही खेत थे।
आम के बाग मे तो इतना अंधेरा था कि मुझे उधर से जाने मे भी डर लग रहा था।

मै जीजू का बांह पकड़ चल रही थी।
कहीं पतले मेड पर गिर कर मेरी चप्पल भी टूट गई।
अब मै खाली पैर चलने लगी घास पर गिरी ओस की बूंदे मेरे पैर को बहुत ठंडी लग रही थी।

दीदी मुझे अपना चप्पल मुझे दे दी।
दीदी: आह ये शीत तो सच मे ठंडी है।
जीजू: आज गोद मे उठा लूं तूझे।

जीजू दीदी को गोद मे उठा लिए मेरा हाथ उनके हाथ से अब छुट गया तो मुझे डर लगने लगा।
मै: लो अपनी चप्पल पहन लो मै खाली पैर ही चल लुंगी।
जीजू: खाली पैर क्यों चलोगी साली साहिबा आओ तुम्हें गोद मे उठा लूं।
मै मना करती रही लेकिन जीजू मुझे गोद मे उठा लिए।

थोड़ी दूर चल कर हम रूक गए।

मै: अब वापस चलते हैं बहुत दूर आ गए हैं।
दीदी: हां ठीक है। चलो अब।

जीजू: यार ऐसी ठंड मे ना मुझे किस करने का मन कर रहा है।

दीदी: मै नही दूंगी अपनी बीबी से मांग लो।
मै: मै भी नही दूंगी।
जीजू: ठीक है, तो मै भाग कर चला जाता हूं तुमलोग रास्ता खोजते हुए अकेले आ जाओ, और थोड़ा ध्यान रखना इधर तेंदुआ कभी कभी आ जाता है।

दीदी: शालू तू दे दे ना। तूझे तो पता है मै वादा करी हुं।
मै:(शर्माते हुए) मै कैसे दे दूं। तू ना गाल पर दे दे।
जीजू: अगर गाल पर दिया तो दोनो को देना पड़ेगा।

दीदी: ठीक है पहले शालू देगी।
मै शर्माते हुए हल्का गाल पर चूम ली।
अब दीदी जीजू के गाल पर कस कर चुम्मी दी और हल्का काट ली, जीजू भी दीदी को पकड़ गाल चूसने लगे।

दीदी: आह छोड़ो, अब हो गया ना अब चलो।

जीजू अब मुझे अपनी चप्पल देते हैं उनकी बड़ी सी चप्पल से मुझे चलने मे नही हो रहा था ऊपर से शीत से चप्पल भीग कर फिसल रहा था।

जीजू मुझे अब कन्धे पर चढ़ा लेते हैं मेरे मम्मे दब रहे थे। कुछ दूर चल मै उतर जाती हूं।

अब घर के नजदीक लीची के बाग मे एक चबूतरे पर थोड़ी देर बैठते हैं।
दोनो बहने उनके कन्धे पर सिर रखे थी।

दीदी: इतनी धुंध मे लुक्का छिपी खेलने मे कितना मजा आएगा ना।
जीजू: अरे हां जब छोटे थे तो वहां खलियान मे सभी लुक्का छिपी खेलते थे सभी भाई बहन मै सागर, दीदी, बूआ, और चचेरे भाई बहन। कितना मजा करते थे सब मिलकर।

जीजू अपनी बचपन की बातें बताने लगे की कैसे वो सब एक साथ रहते थे खूब मजा करते थे।

दीदी: समय कितना बुरा होता है ना, बचपन मे जिस भाई बहन के साथ खेलते हैं मजे करते हैं वही भाई बहन बडे़ हो आंखों को नही सुहाते।

जीजू चुप हो गए और उठ कर चले गए।
मै: ऐसा क्यों बोल दी तुम देख उन्हें बूरा लग गया।

दीदी: अरे उन्हे तो मै यूं मना लूंगी।

दीदी उठ कर कोई रोमांटिक गाना गाने लगी जीजू पेड़ों के पीछे घूमने लगे दीदी उन्हे गाना गाते हुए चेज करने लगी।
अब हल्की धूप खिलने लगी थी 10 बज चूके थे धूप की किरण धुंध को चीरते हुए आ रही थी।
जीजू दूर भाग अटखेलियां कर रहे थे और दीदी गाना गा नाचते हुए उन्हे मना रही थी।

मै बैठ कर देख रही थी मुझे ऐसा लग रहा था जैसे पुराने फिल्मों मे कोई प्रेमिका अपने प्रेमी को मनाती हो।

दोनो के बीच अथाह प्रेम की झलक दिख रही थी।
कुछ देर मे दीदी और जीजू कुछ देर के लिए एक पेड़ के पीछे ओझल हो जाते हैं मुझे लगा कहां गायब हो गए मुझे अकेला छोड़।

मै आवाज दी दीदी जीजू आप चले गए क्या?

कुछ सैकंड मे वो एक पेड़ के पीछे से निकले।
मै उनके पास जाने लगी।
अब हम घर की तरफ जाने लगे। मेरी नजर दीदी के गर्दन पर गई जहां कुछ निशान था।

मै: दीदी गर्दन पर कोई कीड़ा काट लिया क्या?
दीदी शर्मा गई।
दीदी: (हंसते हुए) हां देख जीजू को भी काट लिया है।
वो जीजू को पकड़ उनके गर्दन पर भी दिखाई। मै ध्यान से देखी तो ये दीदी के काटने का निशान था।

मै शर्मा गई दोनो ने एक दूसरे को लव बाइट दिया था।

अब हम घर पहुंच खाना बनाए और खा कर आराम किए।

अब दीदी मुझे पूछी की तेरे पीरियड्स बन्द हुऐ।
मै उन्हे सच बता दी। अब मेरे सच मे पिरियड आ गए थे। दीदी बोली कोई बात नही तेरा जब पूरी तरह मन हो तभी करना।

अब जब मै दोनो के बीच सोती तो जीजू से चिपक कर सोने मे मुझे कोई दिक्कत नही होती।
एक रात तो सोते समय जीजू मेरी कमर पर हाथ रख सहलाते रहे।

मै: आपको सच मे ठंड नही लगती या आप रोज चिपकने के बहाने से कम कपड़े पहन कर सोते हैं।
जीजू:(हंसते हुए) दोनो थोड़ा थोड़ा।
दीदी: पता नही इनको ठंड क्यों नही लगती, इतनी ठंड मे भी ये रोज नहाते हैं मै दो दिन से नही नहाई हूं।

जीजू: इसलिए तो मुझसे खुशबू आती है।
दीदी: हां, और जब ठंड लग जाएगी ना तब किसी खुशबू से चिपकने जाइएगा, मेरे पास मत आइएगा।
जीजू: किसी और के पास क्यों जाऊंगा मेरी साली है ना मुझे गर्मी देने के लिए।

जीजू मुझे बांहों मे भर लिए मेरा चेहरा उनके सीने से लगा था मुझे उनके साईड की खुशबू आ रही थी जो मेरे नाकों मे गुदगुदी कर रही थी।
सच दीदी कहती थी उनके साईड मे से बहुत अच्छी खुशबू आती थी।

अब मै डायरेक्ट वहां पर नाक लगा कर तो सूंघ नही सकती थी तो मै वैसे ही सो गई सुबह उठी तो मेरा मन एक बार फिर उनके कांख की खुशबू सूंघने का हुआ।

दोनो सो रहे थे मै हल्का सा रजाई हटाई और उनका हाथ धीरे से पकड़ ऊपर सरका दी और बाजू के नीचे लेट मै कांख की खुशबू सूंघने लगी मुझे बहुत अच्छा लाग।
कुछ देर मे दीदी उठ गई और मुझे साईड की खुशबू लेते देख ली।
दीदी:(धीरे से) क्या कर रही है?
मै: तू सही बोली थी साईड से बहुत अच्छी खुशबू आती है।

दीदी:(हंसते हुए) तो चुपके चुपके क्यों सूंघ रही है, उठा कर उसे चूम ले बहुत अच्छा लगेगा।

मै नही नही करती रही लेकिन दीदी मेरा मुंह उनके साईड मे सटा दी अब दीदी दूसरी साईड चली गई और हाथ हटा साईड मे चूसने लगी। जीजू की नींद खुल गई तो मै शर्मा कर भाग गई।

अब दिन मे खाना खा मै और दीदी सोफे पर बैठे थे कुछ देर बाद जीजू आ गए और साथ मे स्ट्राबेरी लाए थे।
वो प्लेट मे स्ट्रेबरीज निकाल दिए और दीदी के गोद मे
लेट गए।
हम बातें कर रहे थे और स्ट्राबेरी खा रहे थे जीजू को दीदी हाथ से खिला रही थी।
मै दीदी को इशारा की मुंह से खिलाने को।
दीदी: क्या कह रही है मुझे कुछ समझ नही आ रहा।
मै उसके कान मे बोली।

दीदी: (हंसते हुए) तेरा मन है तो तू ही खिला दे।
जीजू: क्या हुआ?
दीदी: अरे शालू आपको होंठों से खिलाना चाहती है।
मै दीदी का मूंह बन्द कर दी फिर शर्मा कर भाग गई।

अब रात को जब सोने गए तो मै जीजू के तरफ़ मूंह कर लेटी थी।
जीजू: अपनी आंख बन्द करो।
मै: क्यों?
जीजू: करो ना।
मै आंख बन्द कर ली।
अब जीजू शायद स्ट्रेबरी मेरी गर्दन से होते हुए मेरी गालों पर फिराने लगे फिर मेरे होंठों पर फिराने लगे।

मै:(शर्माते हुए) क्या कर रहे हैं जीजू?
जीजू: तुम बस आंख बन्द रखो और एन्जॉय करो।

जीजू होंठों पर स्ट्राबेरी फिराते रहे और थोड़ा थोड़ा  मूंह मे डालते रहे मै थोड़ा चूसती कभी खाती अब खत्म हो गया तो मै आंख खोली।

मै: अब हो गया खत्म।
जीजू: अभी कहां अभी होंठों पर लगा है।

अब जीजू मेरे होंठों पर ऊंगली फेरने लगे मुझे हंसी आ रही थी वो मेरे होंठों से ऊंगली से स्ट्राबेरी हटा अपने मूंह मे ले जा चूसते। कभी मेरे दांत छु देते कभी जीभ।

जीजू: तेरी जीभ पिंक हो गई है।
मै: आपकी भी।
दीदी: हाथ से हटा क्यों चाट रहे हैं डायरेक्ट होंठ लगा दिजिए।

मै शर्मा गई।
जीजू: अरे धीरे धीरे गाड़ी आगे बढ़ती है डायरेक्ट 5वे गियर मे नही।

दीदी: पता नही कब आप दोनो की गाड़ी आगे बढ़ेगी, कही गियर मे जंग न लग जाए।
जीजू: इसलिए तो कह रहा हूं तुम अपना गिरिस गियर मे लगा दो।

दोनो पता नही क्या बोल रहे थे लेकिन इतना पता थ कि दोनो डबल मीनिंग बात कर रहे थे और हंस रहे थे।

कुछ देर बाद जीजू मेरे चेहरे पर सहलाने मेरे कान सहलाने लगे कभी होंठ सहलाते हुए मेरे दांत छू देते तो मै काट लेती, मुझे उनका स्पर्स बहुत अच्छा लग रहा था।

मै: क्या कर रहे हो जीजू अब बस भी करो, नही तो अबकी बार मै ऊंगली जोर से काट लूंगी।
जीजू: तेरे ये मोती जैसे दांत बहुत खूबसुरत हैं।
मै शर्मा गई।

मै: अच्छा ठीक है अब सो जाओ।
जीजू: तुम्हारी ये जुल्फें कितनी मुलायम हैं।
मै: कहां जीजू बाल तो आपके हैं एक दम मुलायम।
मै उनके बालों मे हाथ फेरते हुए बोली।

वो मेरी चोटी का सिरा जो उनकी तरफ था उसे चूम रहे थे और सूंघ रहे थे।
मै: अब बस भी करो और सो जाओ।
जीजू: एक किस दे दो मै सो जाऊंगा।
मै: आप बहुत नॉटी हो रहे हो जीजू।
जीजू: अरे मै तुमसे नही मांगता लेकिन तुम्हारी दीदी सो गई तो।

मै उनके गाल पर हल्के से चूम ली और सोने बोली।

वो मुझे माथे पर चूम लिए और मुझे बांहों मे भर लिए।
जीजू: मै अगर ऐसे सो जाऊं तो तुम्हें कोई दिक्कत होगी?
मै: कोई दिक्कत नही होगी बस आप सो जाओ।

हम वैसे ही सो गए।

अगले दिन दीदी और मै अकेले बैठे थे।
दीदी: और बता कल कहां तक बात बढ़ी।?
मै: बात बढ़ी मतलब कौन सी?
दीदी: अरे कल रात मेरे सोने के बाद जीजू के साथ वाली बात, किस विश किया या नही।
मै शर्मा गई।
दीदी: अरे शर्मा मत बता भी दे।
मै:(हंसते हुए) हां वो किस मांगने लगे और तुम तो सो गई थी तो मै गाल पर किस की।
दीदी: अरे तू भी ना गाल पर बस, तूझे ना उनके होंठ चूसने चाहिए इतने रसीले हैं उनके होंठ तू चूसेगी ना तो मान जाएगी। और स्ट्रैबरी लगे होंठ तो और कितने रसीले हो जाते होंगे। हाय मै तो सोच कर ही पागल हो रही हुं।

मै:(हंसते हुए) तो तु स्ट्राबेरी लगे होंठ चूस ले तूझे किसने रोका है।
दीदी: नही यार वचन लिया है तो निभाना पड़ेगा ना, तूझे पता है मै उनके रसीले होंठ 4 महीने से नही चूसी हूं।

मै:(हंसते हुए) तो पहले कभी स्ट्राबेरी खा कर किस नही किया था।
दीदी: नही यार, हां लीची खा कर किया था बहुत मजेदार लगा था।

दोनो हंसने लगी।
दीदी: आज तू थोड़ा और आगे बढ़।
मै: पर दीदी,,,
दीदी: पर वर कुछ नही, ये बता कैसा लगता है तूझे जब वो तूझे टच करते हैं,। या तू जब उनके बाहों मे होती है।
मै:(शर्माते हुए) अच्छा लगता है, और कभी कभी तो मुझे पता ही नही चलता मै तुम्हारे साथ चिपकी हूं या उनके साथ।

दीदी: मै बोली थी ना सब एक जैसे नही होते, इनमे कुछ बात है इनके छूने मे एक कसीस है इनके प्यार करने मे एक अलग बात है। तू नोटिस करी होगी इनकी बाहों मे जब सोती है तो बीच रात मे नींद नही खुलती या आधी नींद नही आती इतना सुकुन सो कर मिलता है इनके साथ की मै क्या ही बताऊं।

मै:(हंसते हुए) अब अपने पति की तारीफ खत्म हो गई हो तो कुछ इनकी सुध ले, सुबह से लापता हैं।
दीदी: हां, मै फोन करती हूं।
दीदी: (फोन पर) हां जी घर मे इतनी कमसिन जवान हंसीं लड़कियों को अकेला छोड़ कर कहां मस्ती करी जा रही है।
जीजू: आ रहा हूं जान बस कुछ देर और।
अब फोन रख दी।

दीदी: आज ना आते ही चढ़ जइयो।
मै:(हंसते हुए) पहले पीरियड्स तो खत्म हो जाने दे।
दीदी: अच्छा आज कम से कम किस होंठों पर करना तेरे बहाने मै भी कर लूंगी।
मै: मेरे बहाने क्यों तू तो कभी भी कर सकती है।
दीदी: नही तू करेगी तो मै करूंगी नही तो नही करूंगी, प्लीज कर लेना ना आज मेरा बहुत मन कर रहा है उसके होठ चूसने का।
मै: ठीक है स्ट्राबेरी बचा कर रखना।
दोनो बहने हंस रही थीं।

अब रात को खाना खा हम सब बेड पर बैठ गए दीदी प्लेट मे स्ट्रेबरीज ले आई।
जीजू: बहुत स्ट्राबेरी पसन्द आया तुम्हे लगता है।
दीदी: हां आज कुछ अलग करते हैं, ।

पहले दीदी जीजू के होंठों मे स्ट्राबेरी डालती है और खुद बिना होंठ टच करे खाती है, मुझे सच मे लगा था कि दीदी मुझे बोलेगी मै मन ही मन हंस पड़ी।
अब जीजू दीदी के होंठ से खाते हैं।
अब मेरी बारी थी मै काफी एक्साइटेड थी थोड़ी शर्मा भी रही थी।

मै जीजू के होंठ से स्ट्राबेरी लेने लगी दीदी मेरे सिर पर हल्का धक्का दे दी मेरे होंठ जीजू के होंठ से सट गए।
दीदी: हार गई, हार गई शालू हार गई।
मै: नही तूने चीटिंग की है।

दीदी; नही तू हार अब तूझे जीजू के होंठों पर चूमना होगा।
मै शर्मा रही थी फिर मै हल्का सा जीजू के होठ चूम पीछे हट गई।
मै: ले हो गया।
दीदी: नही ये कैसा किस था ये मान्य नही होगा, स्मूच करना पड़ेगा।
मै:(शर्माते हुए) मै नही करुंगी स्मूच, और मुझे करना भी नही आता।

दीदी: अरे आप क्या देख रहे हो आप करके बताओ।
जीजू मेरी ओर आ गए मै थोड़ी तैयार नही थी।
वो मेरे आंखों मे देखते हैं मै शर्मा रही थी।
अब वो मेरा हाथ पकड़ मेरे हाथ चूम लेते हैं मै शर्मा कर पानी पानी हो रही थी।

दीदी: देख कितने रोमांटिक हैं तेरे जीजू, चल अब तू थोड़ा आगे बढ़।

मै उनकी तरफ चेहरा की वो मेरे होंठ से अपने होंठ लगा दिए हल्का सा चूसा मेरे दोनो होंठों को और वापस हो गए।

दीदी: अरे ऐसे स्मूच करते हैं क्या?
जीजू: हां पहली बार ऐसे ही करते हैं।
मै शर्मा रही थी।
दीदी:मुझे तो पहली बार ऐसा नही किया था!
जीजू: तो कैसे किया था?

दीदी जीजू पर लद गई और और बुरी तरह उनके होंठ चूसने लगी वो उनके गोद मे बैठी थी और चेहरे को पकड़ बूरी तरह होंठों को चूस रही थी फिर जीभ उनके मूंह मे डाल दी जीजू भी जीभ उसके मूंह मे डाल दिए जिसे वो चूसे जा रही थी कभी जीभ काट लेती।
करीब 5 मिनट हो गए वो दोनो अलग ही नही हो रहे थे वो दोनो खुद मे ही खो चूके थे। मुझे तो भूल ही गए थे जैसे।

कुछ देर मे और देखती रही।
मै: हुं, हूं, हूं मै भी यहीं हूं।
दोनो का ध्यान टूटा तो अलग हुए ।

मै: आप दोनो तो खुद मे ही खो गए।
दीदी: अरे वो बहुत दिनो बाद मौका मिला था तो थोड़ा…..
जीजू: हां कभी तो किस ही ना करो और जब करो तो होंठ काट दो, देखो खून आ गया।

दीदी हंसने लगी।

जीजू उसके बाजू पर काट लिए और लिटा कर पेट पर काटने लगे और चूसने लगे और फट फट की आवाज निकालने लगे नाभि पर होंठों को लगा।

दीदी गुदगुदी के मारे हंसते हुए लोटने लगी।
जीजू मुझे भी वैसा करने बोले मै भी करने लगे।

दीदी: (हंसते हुए) अच्छा अब बस करो मेरा पेट दर्द करने लगेगा हंसते हंसते।

जीजू: हां जब तुम तो मेरे साईड मे गुदगुदी करती हो तब तो नही रुकती।
दीदी: अच्छा अब वहां पर जाते हैं। अब तू जीजू को स्मूच कर देखते हैं कितना सीखी हमे देख कर इस बार लम्बा करना l

मै अब शर्माते हुए अपने होंठ जीजू के होंठ के तरफ बढ़ाई। मै हल्के हल्के चूसने लगी दीदी ने सच मे होंठ काट लिया था हल्का खून का टेस्ट आ रहा था।
जीजू: जब मै लोअर लिप्स सक करूं तो तुम अपर लिप्स करना।
जीजू मुझे समझाने लगे मै वैसा ही करने लगी। हल्के हल्के किस की वजह से मुझे बड़ा ही आनंद आ रहा था जिन्दगी मे किसी ने मुझे इतने प्यार से किस नही किया था मै मदहोश होने लगी।

अब मै थोड़ा रूक गई।
मै: (शर्माते हुए) ठीक है अब बस करते हैं। और सोते हैं।
मै जीजू को गाल पर चूम ली और रजाई मे अंदर घुस गई

अब सभी रजाई मे आ गए मै बीच मे सोई थी।
मुझे जीजू के होंठ अपने होंठ पर अब भी फिल हो रहें थे।

कुछ देर बाद दीदी मेरे तरफ से उठ कर जीजू के तरफ चली गई।
दीदी: (धीरे से) शालू सो गई क्या?
वो मुझे चेक कर रही थी कि मै सोई या नही। मै सोने का नाटक कर कुछ नही बोली।

अब दीदी जीजू पर चढ़ गई रजाई के अंदर। वो दोनो पर जीजू के अगल बगल कर जीजू पर लेटी थी उसका दायां घुटना मेरी कमर के पास था।

जीजू: क्या हुआ नींद नही आ रही है क्या?
दीदी: धीरे बोलो।
वो दोनो अब धीरे धीरे बातें करने लगे लेकिन मुझे सब सुनाई दे रहा था मै उनके तरफ पीठ कर लेटी थी।

दीदी: अपने बाहों मे कस कर भर लो मुझे।
जीजू: आह तेरी बाहों मे कीतना सुकून मिलता है।
दीदी: आई लव यू जान!
जीजू: आई लव यू टू जान!

दोनो अब स्मूच कर रहे थे उनके होंठ चूसे जाने की आवाज़ चुपड़ चूपड़ आ रही थी।
दीदी: आह जान तुम्हारी बाहों मे आ सारी सर्दी भाग गई।
जीजू: मेरी भी।
दीदी: देखो मेरी जांघ कितनी ठंडी है।
जीजू: हां ये तो बहुत ठंडी है, मै उधर चूस लूं थोड़ा सा।
दीदी: अभी नही जान इतने दिन रूक गए तो कुछ दिन और सही।
जीजू: ठीक है।

वो दोनो फिर स्मूच करने लगे।
जीजू: होंठ काटो मत ।
दीदी: आह, अपनी जीभ दो।
जीजू: ठीक है पर काटना मत।

दीदी अब जीजू का जीभ चूस रही थी।
जीजू: आह, निप्पल मत काटो यार।

दीदी शायद जीजू के निप्पल चूस और काट रही थी।
दोनो बहुत देर तक चूपड चुपड़ करते रहे और धीरे धीरे बातें करते रहे।
कुछ देर बाद दीदी उसी तरफ सो गई जीजू बीच मे सो गए।

अगले दिन मै उठी हल्का सा पिरियड मेरे अभी भी चल रहे थे।
अब दिन मे हमने थोडी मस्ती की कभी दीदी को गुदगुदी कभी जीजू को। थोड़ा कान किया धान स्टोरेज का।

रात को हम खाना खा सोने आ गए। दीदी मुझे इशारा की अकेले सोने को लेकिन मै मना कर दी।

मै: (हंसते हुए) जीजू आप बीच मे सो जाओ, रात को तो दोनो को बातें करनी ही है।
दीदी;(मेरा कान पकड़ते हुए) तो तू कल रात जाग रही थी।

मै: हां, आपकी चुपड चुपड़ की आवाज़ सोने कहां दे रही थी।

जीजू: आजा इधर मेरी बाहों मे तुझे बड़ी ठंड लगती है ना।
दीदी:(हंसते हुए) ठंड आपको लगती और ऊपर से गंजी पहन कर सोते हैं, रात को जब ठंड लगती है तो पैर हाथ मोड़ चिपक जाते हैं।

मै: हां ठंड इनको लगती तो है, इनर पहन लीजिए ना आप।
जीजू: अरे नही मुझे ऐसे ही सोना पसंद है।
दीदी: ठीक है सोने दे उन्हे और जब रात को ठंड लगेगी तो चिपकना मत।

जीजू: ठीक है।
अब मै बीच मे सोई थी जीजू के तरफ मुंह करके।
जीजू और मेरे बीच थोड़ा गैप था।
जीजू मुझे किस का इशारा करते हैं।

मै उन्हें जीभ निकाल चिढ़ाती हूं। वो हल्के से नजदीक आ जाते हैं। मै उन्हे जीभ निकाल चिढ़ा रही थी।

जीजू मौका देख मेरी जीभ अपने दांतों से पकड़ लिए और थोड़ा चूस कर छोड़ दिए।
अब वो जीभ चिढ़ा रहे थे मै भी मौका देख उनके होंठ से होंठ मिला दी।

अब वो मेरी कमर पर हाथ रख खुद से चिपका लिए।
इतनी सर्द भरी रात मे भी उनके बाहों मे जा बहुत आराम मिला।

धीरे धीरे अब हमारे होंठ मिल गए थे वो धीरे धीरे स्मूच कर रहे थे मै भी स्मूच कर रही थी।
वो अपने पैर से मेरी पैर की उंगलियां सहला रहे थे मुझे बहुत अच्छा लग रहा था।

अब वो मेरी जीभ चूसने लगी मेरे मूंह मे जीभ डाल मेरे दांतों को छू लेते मै भी उनके जीभ चूस रही थी।
कुछ देर मे हमारी सांसें भारी हो गई तो मै रूक गई मै उनके गाल पर किस कर सोने बोली वो भी मुझे बाहों मे भर मेरे माथे को चूम लिए, और सोने लगे। मै अपनी एक पैर उनके पैर पर चढ़ा कर सो गई।

भोर मे मुझे सूसू आई तो मै उठ कर बाथरूम गई टाईम साढ़े चार हुआ था। मै बेड पर आने लगी तो जीजू पीठ के बल सोए थे मै उनके तरफ से ही बेड पर चढ़ रही थी।
मेरी नजर उन पर पड़ी उनके होंठो पर पड़ी मुझे पता नही क्या हुआ मै हल्के से उनके होठ चूम ली मेरा फिर मन हुआ मै फिर चूम ली। दो तीन बार धिरे से चूम कर मै उनके बगल मे लेट गई और उन्हें देखने लगी।

मेरे आने से कुछ देर रजाई उनके ऊपर से हटी थी तो उन्हे ठंड लगने लगी तो वो अपने हाथ पैर मोड़ मेरी तरफ मुंह कर लिए मै रजाई उन्हें ओढ़ा दी और बाहों मे धीरे धीरे भरने लगी।

उनकी गर्म सांसें मेरे चेहरे पर पड़ रहीं थीं।
मै अपने होंठ धिरे से उनके होठ पर सटा दी। कभी चूमती कभी हटाती ।
कुछ देर मे उनकी नींद खुल गई मै शर्मा गई।
वो मेरे सीने पर सर लगा लिए। मै उनके सर को अपने हाथों से अपने सीने सीने पर चिपकाई थी।

वो बड़ी ही प्यारी नींद मे थे मै उनके बाल सहलाती हुई सो गई।

अगले दिन भी थोड़ा काम थोड़ा घूमना फिरना हुआ ।

रात को खाना खा कर हम बेड पर आए मेरे पिरियड कल ही खत्म हुए थे तो दीदी मुझे इशारा की, मै मुस्कुरा दी दीदी उसे हां समझ बैठी कुछ देर मे मुझे याद आया कि मेरे तो जंगल उगे हुए हैं मै दीदी को बोलना चाहती थी।

दीदी: अब तुम लोग आज अकेले सो जाओ मै जा रही हूं।
मै उसे इशारे मे मना की।
दीदी: क्या हुआ अभी तो हां बोली और अब क्या हो गया, तू डर मत बाबा।
मै: मै डर नही रही हूं।
मै उसके कान मे बोली कि मेरे बाल बडे़ हुए हैं।
दीदी  हंसने लगी।

जीजू; क्या हुआ इतनी हंसी क्यों आ रही है।
दीदी: अरे इसने जंगल…….
मै दीदी का मूंह बन्द कर दी और शर्मा गई।

जीजू:(हंसते हुए) हां मै समझ गया।
दीदी: (हंसते हुए) कितना बड़ा जंगल है, ज्यादा बड़ा है तो मत करो आज।
मै:(शर्माते हुए) दीदी तुम भी ना।

जीजू: यार शालू एक बात बोलूं?
मै: हां बोलिए!
जीजू: यार मैने ना कभी जंगल नही देखा, तुम्हारी दीदी हमेशा एक्सप्रेक्स वे जैसा चिकना रखती है, क्या तुम दिखा सकती हो।

मै:(शर्मा गई) धत्त जीजू आप ना बडे़ वो हो!
दीदी: अरे शर्मा क्यों रही है दिखा दे ना।
मै: तू दिखा दे ना अपना।
दीदी; अरे मेरा तो चूम चूम कर देख चूके हैं तू दिखा ना।
मै:(हंसते हुए) नही मै नही दिखाती।

जीजू: दिखा दो ना प्लीज शालू।
जीजू मुझे मनाने लगे मुझे शर्म आ रही थी।

दोनो मिल मुझे गुदगुदी करने लगे जीजू मेरी नाभी चूसने लगे।
मै हंस रही थी और उन्हें मना कर रही थी।
दीदी अब मेरे कमर पेट मे गुदगुदी करने लगी और जीजू मेरे पैर मे ,वो मेरे पैर चूमने चाटने लगे उसे चूसने लगे।

मै:( हंसते हुए) आह छोड़ो ना जीजू वो भी कोई चूमने की जगह है।

जीजू: बस एक बार दिखा दो।
वो मेरी अंगुलिया चूसे जा रहे थे मुझे बड़ी गुदगुदी हो रही थी।

मै: ठीक है लेकिन बस देखिएगा।
जीजू: ठीक है।

मै धीरे से साड़ी उठाने लगी मुझे बहुत शर्म आ रही थी।
जीजू: तुम रहने दो मै उठा देता हूं।

अब दीदी और जीजू मेरी साड़ी उठाने लगे मै बेड पर दीवाल से लद कर बैठी थी।

जीजू मेरी साड़ी उठाते जा रहे थे साथ मे मेरे पैर चूम रहे थे मेरे घुटने चूम रहे थे।
अब मुझे बेड पर लिटा दिया और साड़ी मेरी जांघों से ऊपर उठा दिया मै शर्मा गई।

वो मेरे जांघों को चूमने चूसने लगे मै अपने दोनो पैर चिपकाए थी।

अब मेरी पैन्टी दिखने लगी मेरी बूर के बाल पैन्टी से झांक रहे थे।

मै:(शर्माते हुए) अब हो गया रहने दीजिए।
जीजू: यार अभी देखा कहां है।

वो मेरी पैन्टी से निकलते मेरे बालों को सहलाने लगे मेरे पैन्टी पर से मेरी बूर पर मूंह लगा दिए।

मै: आह जीजू क्या कर रहे हो।
जीजू: पैन्टी उतार कर दिखा दो बस।
मै:(शर्माते हुए) जीजू आप ना बडे़ गंदे हो।
दीदी:(हंसते हुए) अरे अभी देखी कहां है, पूरा तो कल देखेगी।

जीजू: यार अब उतार भी दो ना।
मै:(शर्माते हुए) ठीक है जीजू मै अपना सब कुछ आपको सौंप रही हूं।
जीजू:(हंसते हुए) ठीक है सौंप दो।

अब जीजू मेरी पैन्टी उतार दिए मै अपनी टांग चिपकाए हुए थी। दीदी और जीजू मेरी बूर गौर से देख रहे थे।
मै: (शर्माते हुए) दीदी तुम क्यों देख रही हो, तुम उधर देखो ना।
दीदी: ओहो अपने जीजा को सिर्फ दिखाना चाहती है,।
मै: अरे मुझे शर्म आ रही है तुम बस उधर देखो।
दीदी: अरे मुझसे कैसी शर्म मै तो तेरी बूर कई बार देख चुकी हूं।

मै दीदी के मुंह से बूर सुन शर्मा जाती हूं।
मै:(शर्माते हुए) क्या अनाब शनाब बोल रही है।

इधर जीजू मेरी बूर देखते हुए मेरी बूर पर मूंह लगा दिए।
मै: आह जीजू क्या कर रहे हो छोड़ो अब।
जीजू थोड़ी देर चूमते हैं मेरी बूर की बालों को मुंह मे भरते हैं।

जीजू: आह कितने घने और मुलायम बाल हैं तेरे लगभग 3 इंच तो होगें।
मै: (शर्मा गई) ठीक है अब देख लिया अब छोड़ो।
दीदी: मै भी थोड़ी देख लूं। आह कितने बड़े हैं कल मै साफ कर दूंगी।

जीजू: करना तो थोड़ा सा इधर ऐसे डिजाईन बना देना यहां पर बहुत सुंदर लगेगा।
दीदी: आप खुद ही बना देना मुझे समझ नही आ रहा आप कैसा डिजाईन बोल रहे हो।

मै:(हंसते हुए) आप लोग ख्याली पुलाव मत बनाओ मै खुद बना लूंगी।

जीजू: ठीक है लेकिन काट मत लेना।

मै: ठीक है छोड़ो अब।
जीजू एक बार फिर मेरी बूर पर मूंह लगा देते हैं मेरी आह निकल जाती है थोड़ी देर मे वो हट जाते हैं।
मै अपनी साड़ी नीची करती हूं।

मै: पैन्टी तो दे दो अब।
जीजू:(मेरी पैंटी सूंघते हुए) आज बिना पैंटी के सो जाओ ना यार।

मै हंसने लगी।
जीजू: यार अब एक किस दे दो।
मै:(हंसते हुए) पहले मुंह मूंह धो कर आईए।

जीजू बाथरूम मे चले जाते हैं।
मै और दीदी जल्दी से रजाई मे चले जाते हैं।

जीजू मेरे बगल मे आकर लेटते हैं और अपने ठंडे पैर दीदी मे सटाते हैं।
दीदी: आह पैर क्यों भीगा लिया अपना, कभी ठंड लगेगी तो पता चलेगा।

मै जीजू के तरफ मूंह कर लेटी थी मै धीरे से अपना पैर उनके पैर से रगड़ने लगी और सहलाने लगी। उनका पैर ठंडा था।

मै धीरे धीरे अपने होंठ उनके होंठ के नजदीक ले आई। अब हम दोनो धीरे से एक दुसरे के होंठ चूसते कभी अलग होते।
कभी उनके थोड़ा जीभ चूसती कभी कभी वो मेरी जीभ चूसते। वो मेरी कमर पकड़ मुझे खुद से चिपका लिए मै भी उनके गले मे बाहें डाल दी।
मुझे लगा दीदी सो गई।

मै:(धीरे से) एक बात बोलूं जीजू।
जीजू: हां बोलो ना जान।
मै: आप जितना प्यार मुझे कर रहे हो उतना प्यार मुझे कभी नही मिला, कहीं आप मुझे छोड़ तो नही दोगे।
जीजू: अपनी दीदी पर भरोसा है तुम्हें?
मै: खुद से भी ज्यादा।
जीजू; मुझ पर भरोसा है तुम्हें?
मै: हां!
जीजू: मै तुम दोनो को कभी नही छोडूंगा। मै अगले सात जन्मों तक तुम दोनो को पाना चाहता हूं।

दीदी: हां लेकिन अगले जन्म मे आप इसके पति बनना और मेरे जीजू और मुझे भी ऐसे ही प्यार करना जैसे इसे कर रहे हैं।

जीजू: तुम्हें तो अभी भी वैसे प्यार कर सकता हूं।
दीदी हंसते हुए मुझे पीछे से चिपक गई।
मै: तुम जाग रही थी क्या?
दीदी: हां और तुम्हारी सारी बातें सुन रही थी, तुझे ऐसा क्यों लगता है ये तूझे छोड़ देगें?
मै कुछ नही बोली।
दीदी: अरे मेरा बच्चा मै और तेरे जीजू तूझे कभी नही छोड़ेंगे, हम तीनो जन्मों जन्म तक साथ रहेगें।

दीदी मेरे माथे पर चूमते हुए बोली।
जीजू मुझे कस कर बाहों मे भर लिए दीदी भी मुझसे चिपक गई।

हम तीनो वैसे ही सो गए। अब अगले दिन हम उठे जब मै नहाने जा रही थी।

जीजू: (हंसते हुए)चलो आज मै भी तुम्हारे साथ नहा लेता हूं।
मै: (शर्माते हुए)ज्यादा बनो मत जीजू!
जीजू: अच्छा ठीक है ये लो ट्रिमर।

जीजू मुझे ट्रिमर देते हुए मुझे बाहों मे भर लिए और चूम लिए।

दीदी: चल मै भी चलती हूं।
मै: कोई जरुरत नही है मै कर लूंगी।
दीदी: अच्छा ये ले क्रीम।

मै अब बाथरूम जा पहले ट्रिम की उसके बाद एक दम साफ कर दी बस हल्का सा जैसा जीजा जी बता रहे थे वैसा डिजाईन बनाने की ट्राई करी।

अब दिन गुजर गया रात हो गई मै थोड़ी नर्वस थी।
अब हम बेड पर आ गए।

दीदी: तुम दोनो यहीं रहो मै चलती हूं।
मै: तुम भी यहीं रहो ना।
जीजू दीदी को अपनी बाहों मे भर लेते हैं और स्मूच करने लगते हैं।
जीजू: तुम अकेले क्या करोगी जा कर रूक जाओ।
दीदी: ठीक है।

अब हम तीनो बेड पर रजाई मे आ गए।
मै शर्मा रही थी।

थोड़ी देर हमने बात करी इधर उधर की जीजू मुझे बाहों मे भरे हल्के हल्के सहला रहे थे।

दीदी: अब बहुत टाईम पास हो गया अब शुरु करते हैं।
अब किस करो पहले।

मै शर्मा रही थी।
जीजू मेरे तरफ होंठ बढ़ाए। मै भी बढ़ाई और किस करने लगी। मै उनके होंठ चूसे जा रही थी वो कभी मेरे गाल चूसते कभी कान।
मेरी आह निकल जाती जब जीजू मेरे कान और गले को चूसते , मुझे गुदगुदी भी हो रही थी।

अब जीजू मेरे गले से होते हुए मेरे सीने पर चूमने चूसने लगे।
मेरी सिसकारी निकल जाती लेकिन मै बर्दास्त कर रही थी।
जीजू मेरी आंखों मे देखने लगे मै शर्मा कर आंखें नीची कर ली। जीजू मेरी ढूढी चूसने लगे।
जीजू: शालू बेबी कैसा लग रहा है?
मै:(शर्माते हुए) अच्छा लग रहा है।
दीदी; शालू, तू खुलकर एंजॉय कर आवाज निकालने का मन करेगा तो आवाज निकाल, सिसकारी निकाल।

मै: ठीक है।
जीजू मेरे होंठ चूसने लगे।
अब जीजू मेरी सीने पर मेरे चूचों पर मूंह लगा दिए।
अब वो स्वेटर खोलने लगे।
मै:(हंसते हुए)  ठंड लगने लगेगी मत खोलिए।
दीदी: जीजू आज तेरी सारी ठंड भगा देगें।

जीजू धीरे धीरे स्वेटर खोल दिए अब ब्लाउज खोलने लगे मै हल्का सा मना करी वो मेरे हाथ चूम लिए और धीरे धीरे ब्लाउज खोल दिए मै अपने मम्मे हाथ से ब्रा को ढंक ली।

जीजू धीरे धीरे मेरे हाथ हटा मेरे मम्मे ब्रा से झांकते हुए को चूसने लगे और चूमने लगे।
अब वो ब्रा खोलने के लिए पीछे हाथ ले जाने लगे तो मै मना कर दी।

दीदी: शालू, पूरा उतार दे ना, तेरे जीजू जब मम्मे चुसेंगे तो तूझे अपार मजा आएगा।

मै शर्मा रही थी और जीजू के तरफ पीठ कर दी।
जीजू मेरे कन्धे चूसते हुए मेरी पीठ चूसने लगे और धीरे से ब्रा की स्ट्रीप चूसने और खोल दिया।

अब नीचे चूसते हुए मेरी कमर तक आ गए।
अब मुझे पलटने लगे।
मै शर्मा गई और पलट कर सीधे उनके सीने से लग गई वो मुझे बाहों मे भर लिए।

मै: ठंड लग रही है।
जीजू अपनी गंजी उतार मुझे अपने नंगे सीने से लगा लिए मेरे मम्मे उनके सीने मे दब रहे थे दीदी मेरी पीठ से चिपक गई हम कम्बल के अंदर थे।

जीजू मेरी कमर सहला रहे थे उनके सीने से लग मुझे गर्मी सा महसूस हुआ।

जीजू मेरे गले कान को चूसने लगे।
दीदी:(हंसते हुए) यार जल्दी करो तुम लोग फिर मुझे भी करना है।
मै:(हंसते हुए) तो पहले तुम ही कर लो।
दीदी: पहले तुम ही करो लेकिन थोड़ी जल्दी करो।

जीजू:( दीदी का हाथ पकड़ चूसने लगे) जान आराम से करने का मजा ही कुछ और है।

अब वो मेरे मम्मे देखने लगे मै शर्मा रही थी।
वो अब मम्मे सहलाने लगे मेरी सिसकारी निकल गई।
अब वो मम्मे चूसने और चाटने लगे निप्पल पर जीभ फिरा रहे थे मेरी आह निकल गई मुझे आज के पहले ऐसा कभी नही फील हुआ था मेरी मजे से आंखें बन्द होने लगी।

वो मेरे पूरे मम्मे को प्यार से चूस रहे थे। कभी दोनो को साथ मे चूसते कभी साईड मे चूसते।
अब वो पेट पर चूसने लगे मेरी मजे से आह निकल गई जब नाभि मे जीभ फिराई।

अब जीजू मेरी साड़ी सरकाने लगे मेरी कमर चूसने लगे।
मै: (जीजू का हाथ पकड़ ली) पूरे कपड़े मत उतारो ना प्लीज जीजू।
जीजू: ओके मेरी जान।

अब जीजू मेरे पैर के तरफ चले गए और पैर चूसने लगे मुझे गुदगुदी हो रही थी।
अब वो साड़ी उठाते हुए मेरे पैर चूम रहे थे।
अब जांघ तक पहुंच गए।
अब रजाई हटा दिए मै अपने पैर चिपकाए हुए थी।

अब जीजू मेरी टांगें फैलाने लगे और पैंटी पर मूंह लगा दिया मै सिहर उठी।
अब धीरे से मूंह मे पैन्टी भर उतारने लगे मै अपनी गान्ड उठा ली।
जीजू: वाओ मेरी जान बढ़िया डिजाइन बनाई हो।
दीदी: मुझे भी दिखाओ।

मै शर्मा गई और अपनी बूर छुपाने लगी।
दीदी:(हंसते हुए) ओहो अपने जीजू की ख्वाहिश याद कर रखी थी।
जीजू अब जांघ चूमने चूसने लगे और बूर के आस पास चूमने लगे।

मै: आह जीजू मत करो ना ऐसे मुझे कुछ कुछ होता है।
जीजू: क्या होता है मेरी जान।
जीजू अब मेरी बूर पर जीभ फिरा दिए।
मै सिसक उठी।
मै: आह जीजू वहां पर मत करो ना।
दीदी: करने दे ना बहुत मजा आता है बूर चटवाने मे और तेरे जीजू बहुत मजा देते हैं।

जीजू अब बूर चूसने लगे मै आह आह करने लगी मै इतना मजा कभी महसूस नही की थी पहली बार कोई मेरी बूर चाट रहा था मेरा शरीर झनझना जाता।
मुझे अजीब सा अनोखा मजा आ रहा था। मै सिसकारी भरने लगी।
जीजू अब क्लीट चूसने लगे और पूरी बूर मूंह मे भर रहे थे।

मै: आह जीजू मुझे कुछ अजीब सा लग रहा है हट जाओ।
दीदी: कैसा लग रहा है?
मै: आह सूसू आ रहा है हट जाओ।
जीजू: तो कर दो ना जान मै पी जाऊंगा।
दीदी: अरे वो सुसु नही ओर्गासोम है तू रिलैक्स हो मजे ले।

मै आह आह करते हुए भर भरा गई और मेरी बूर से कुछ निकला मै झड़ गई थी मेरी बूर फड़फड़ा रही थी।
कुछ देर मे मेरी सासें नॉर्मल हुई।
जीजू: कैसा लगा मेरी जान।

मै: बहुत अच्छा लगा जीजू।
जीजू का मूंह गिला था वो मुझे किस करने के लिए ऊपर आने लगे।
मै: ओह जीजू छी पहले मूंह धो कर आओ।
दीदी जीजू को किस करने लगी और उनका मूंह चूस चाट कर साफ कर दी।

दीदी: यम्मी काफी टेस्टी है।
मै अब जीजू को किस करने लगी जीजू मेरे मम्मे सहलाने लगे वो इतने आराम से सहला रहे थे जैसे कोई गुलाब का फूल बदन पर फेर रहा हो।

वो मेरे गले को चूसने लगे मेरे गाल कान को चूसने लगे, अब वो मेरे मम्मे चूसने लगे और सहलाने लगे वो पूरे मम्मे को चूस रहे थे कभी निप्पल, कभी मम्मों के बीच चूसते।

मै मजे से आह आह कर रही थी।
अब जीजू मेरे पेट चूसने लगे मेरी नाभि चुसने लगे अब साड़ी उठा पेडू चूसने लगे मेरी सिसकारी निकल गई अब बूर चूसने लगे।

मै: आह जीजू फिर से मत करो ना।
जीजू: रानी अब सिर्फ चूस कर गिला करुंगा।
दीदी: अपना पैंट तो उतार दीजिए।

दीदी जीजू का पैंट उतार दी मै उनका लन्ड देखी एक दम लोहे जैसा खड़ा था और एक भी बाल नही था एक दम चिकना था मेरी नजरे फटी रह गई।

मै:(शर्माते हुए) क्या लड़के भी नीचे बाल साफ करते हैं।
दीदी:( हंसते हुए) सभी नही करते लेकिन तेरे जीजू करते हैं।

जीजू: जाने मन क्या तुम तैयार हो।
मै कुछ नही बोली।
दीदी: क्या हुआ तू तैयार है ना?
मै: आई लव यू जीजू, हां मै तैयार हुं अभी तक आपने इतना प्यार किया है तो आगे भी अच्छे से ही करेगें।
जीजू:(मेरे गर्दन चूसते हुए) आई लव यू टू मेरी जान।
मै इतने प्यार से करूंगा कि पता भी नही चलेगा।

अब जीजू मेरी बूर पर लन्ड रख घिसने लगे। मेरी सिसकारी निकल गई जीजू का लन्ड बहुत गर्म था।
कुछ देर लन्ड घिसने के बाद जीजू हल्का लन्ड घुसा दिए मेरी बूर पूरी तरह गीली हो चुकी थी मुझे इतना मजा कभी नही आया।
वो अब एक धक्का दे आधा लन्ड घुसा दिए मेरी आह निकल गई जीजू मेरी पेट सहला रहे थे मेरी दीदी मेरा हाथ पकड़ ली और चेहरे को सहलाने लगी।

कुछ देर जीजू वैसे ही रहे वो हल्के हल्के चोदने लगे हल्के हल्के करते हुए आराम से पूरा लन्ड घुसा दिए और मुझ पर लेट किस करने लगे।
जीजू: आह कैसा लग रहा है मेरी जान?
मै: आह ऐसा लग रहा है जैसे जन्नत मे हूं। आई लव यू।

मै जीजू को चूमने चूसने लगी उन्हें बाहों मे भर ली।
मेरी बूर थोड़ी मचली तो अपनी गान्ड उठाने लगी।
जीजू धीरे धीरे चोदने लगे।
मै: आह जीजू कितने प्यार से कर रहे हो आप, बहुत मजा आ रहा है।

जीजू अब मेरी गर्दन गाल कान चूसते हुए चोद रहे थे धीरे धीरे हमे हल्का पसीना आ गया मै रजाई पैर से फेंक दी और पैर और हाथ को जीजू के चारों ओर लपेट ली हम दोनों एक दूसरे मे समा जाना चाहते थे।

जीजू हल्के हल्के आराम से चोद रहे थे मै आह आह करते हुए मजे ले रही थी अब मेरी बूर फिर उबाल मारने लगी।
मै: आह जीजू मुझे कुछ हो रहा है।
जीजू मेरी कान गले चूसने लगे और चोदते रहे मेरी चूंची कभी पीते मै उबलते हुए झड़ गई जीजू कुछ देर रूक गए और मुझे चूसे जा रहे थे मै अपनी सासें ले रही थी।

जीजू:(मुझे चूसते हुए) दर्द तो नही हो रहा है जान।
मै: नही जीजू ऐसा मजा मुझे कभी नही आया।
जीजू धीरे धीरे फिर चोदने लगे हमारी चुदाई की मधुर संगीत कानो मे घुल रही थी चिप चिप पट पट आवाज आ रही थी।

जीजू मेरे कान गले गर्दन मम्मे सब जगह चूस रहे थे मै भी उन्हें चूम रही थी। कुछ देर बाद मेरी बूर फिर उबलने लगी मेरी सांसे भारी हो गई मै नीचे से गान्ड उठाने लगी जीजू आराम से चोद रहे थे उनकी भी सासें भारी होने लगीं।
मै: जीजू मुझे फिर कुछ हो रहा है।
जीजू: मै भी आ रहा हूं जान।
दीदी मेरा हाथ पकड़ ली!

कुछ देर मे मेरी बूर उबाल कर बहने लगी तभी मेरी बूर मे गर्म सा महसूस हुआ जीजू मेरे अंदर झड़ रहे थे। मेरी बूर गर्म पानी फिल कर मस्त हो गई। जीजू मुझे चूम रहे थे मै जीजू को चूम रही थी।

कुछ देर वो मेरे ऊपर लेट मुझे प्यार करते रहे।
हमारी सासें नॉर्मल हुई तो मुझे सूसू लगा।
मै: आई लव यू जीजू।
जीजू: आई लव यू टू मेरी जान।
दीदी:(मेरे माथे पर चूमते हुए) मै बोली थी ना जीजू तूझे अच्छे से प्यार देगें।
मै दीदी के गले लगने लगी।

मै; अब हटो जीजू मुझे सूसू आई है।
जीजू हट गए और मुझे चूम लिया मै उठ कर बाथरूम गई खुद को साफ करी और कपड़े सही कर ली।

बाहर आई तो दीदी जीजू रजाई के अंदर थे दीदी जीजू पर चढ़ी हुई थी मै रजाई के अंदर जाने के लिए रजाई हटाई तो दीदी पूरी नंगी हो जीजू पर चढ़ी थी।

मै:( हंसते हुए) पूरे कपड़े क्यों उतार रखी है? ठंड लग जाएगी।
दीदी: (हंसते हुए) तेरे जीजू मुझे गर्मी दे रहे हैं।
वो जीजू से लिपटी थी और उनके सीने गले को चूसे जा रही थी रजाई से मै उसके पीठ तक ढक दी।

जीजू: मुझे तो गंजी पहन कर सोने पर भी डांट लगाती है और अब खुद कुछ नही पहनी है।
दीदी (जीजू के होंठ चूसते हुए) आज आपके जिस्म की गर्मी से मै ठंड से बचूंगी।

जीजू: आह होंठ क्यों काट रही है?
मै: अरे होंठ मत काटा कर ना!
दीदी: बड़ी अपने जीजू की चिन्ता हो रही है।
मै शर्मा गई और दोनो की ओर मूंह कर लेट गई और जीजू के होंठ चूसने लगी और गाल चूम ली।

अब दीदी जीजू के सीने को चुसने लगी और काटने लगी जीजू की आह निकल जाती।
रजाई के अंदर ही दीदी जीजू का लन्ड बूर मे घुसा ली और ऊपर से चूसते हुए चोदने लगी।

मै:(हैरान थी) तू ऊपर क्यों है तूझे नीचे होना चाहिए।
जीजू: आह शालू बेबी क्या तुम भी ऊपर हो चुदना चाहोगी बड़ा मजा आएगा।
मै जीजू के मूंह से चुदना शब्द सुन शर्मा गई।
दीदी: आह ऊपर से भी बड़ा मजा आता है सारा कंट्रोल अपने हाथ मे। तू करेगी एक बार फिर।
मै:(शर्माते हुए) ना बाबा ना मेरे वहां दर्द हो जाएगा तो।
दीदी: क्या दर्द हो रहा है तुझे?
मै:(शर्माते हुए) हां लेकिन मीठा मीठा।

अब दीदी कमर उठा धक्के मार रही थी और जीजू को चूम चूस रही थी।
मै उन्हे देख रही थी।

दीदी: आह आई लव यू जीजू!
जीजू: ओए क्या बोली?
दीदी: आई लव यू जीजू, जीजू जीजू।
जीजू: यार जीजू मत बोल ना।
दीदी:(हंसते हुए) अब जब तुम मेरे जीजू हो तो और क्या बोलूं।
जीजू: जान बोल!
दीदी: नही मै तो अब जीजू ही बोलूंगी। आह चूंटी मत काटो ना।

शायद जीजू ने दीदी को रजाई के अंदर से गान्ड के पर काटी थी।
जीजू: जान बोलो पहले।
दीदी: (कमर उठा चुदवा रही थी) आह आई लव यू जीजू।
जीजू उसे सीने से लगा कस लिए और कंधे कान चूसने लगे!

दीदी; आह छोड़ो कितनी ज़ोर से दबा रखा है।
जीजू: पहले जान बोलो।
दीदी: आई लव यू जान।
जीजू: आई लव यू टू जान।

जीजू अब चूसते हुए दीदी को नीचे से कमर उठा चोद रहे थे।

कुछ देर मे दोनो को हल्की गर्मी लगी तो दोनो रजाई हटा दिए मै दीदी का नंगा जिस्म देख हैरान रह गई एक दम मदहोश हो दोनो चुदाई कर रहे थे दीदी अब लन्ड पर उछल रही थी उसके मम्मे भी उछल रहे थे पहले दोनो के मम्मे एक जैसे थे लेकिन अब दीदी के मम्मे गजब के सेक्सी लग रहे थे।
मेरी नजर दीदी के गांड़ पर पड़ी तो वो और भी हिलती हुई खूबसूरत लग रही थी जीजू सेक्सी चूतड को सहला रहे थे। कभी कमर पकड़ ऊपर नीचे झूला रहे थे।

दीदी: आह जानू मै आ रही हूं।
जीजू अब दीदी को बाहों मे भर उसकी कमर पकड़ नीचे से धक्का लगाने लगे , कुछ देर मे दीदी आह आह करते हुए झड़ गई उसकी बूर बहुत पानी फेंक रही थी।
दोनो वैसे ही पड़े थे और स्मूच कर रहे थे कुछ देर मे जब उनकी सांसें नॉर्मल हुई तो दीदी फिर कमर उछाल लन्ड पर कूदने लगी और आह आह करने लगी वो फिर चुदाई शुरू कर दिए।

कुछ देर बाद दीदी स्पीड बढ़ा दी दोनो आह आह करते हुए मजे ले रहे थे कुछ 15  मिनट बाद दोनो फिर झड़ गए।

कुछ देर वो वैसे ही रहे और एक दूसरे को प्यार करते रहे।
जीजू उठ कर बाथरूम चले गए तो दीदी मुझे बाहों मे भर ली मै रजाई से ढक दी, दीदी नंगी ही मुझे जकड़े थी और मेरे गाल और माथे पर चूम रही थी।

दीदी: तूझे मजा आया ना शालू?
मै: (शर्माते हुए) हां दीदी बहुत मजा आया, जीजू बहुत अच्छे से प्यार किए।

मै उनके नंगे मम्मे पे सर रखे थी।
जीजू बेड पर आ कर दीदी से चिपक गए।

दीदी: अपने ठंडे पैर मत सटाओ।
मै: चल अब कपड़े पहन लो।
दीदी:(जीजू को बाहों मे भरते हुए) आज मै ऐसे ही सोऊंगी।

मै: अच्छा तो पहले खुद को साफ तो कर आ।
दीदी अब बाथरूम गई।

जीजू मुझे बाहों मे भर लिए मै उनके नंगे जिस्म से चिपक गई मै अपने पैर से उनके ठंडे पैर सहला रही थी जीजू अपने ठंडे हाथ मेरे चेहरे पर रख दिए मुझे उनका ठंडा हाथ अच्छा लग रहा था।

अब वो हाथ फेरने लगे मै अपने होंठ उनके होंठों से लगा दी हम धीरे स्मूच करने लगे।
दीदी बाथरूम से आई और रजाई मे जीजू के ऊपर चढ़ गई और दोनो के गाल पर चूसने लगी।

जीजू बाई करवट थे मै उनके ओर थी दीदी उनके दाई शरीर पर चढ़ी हुई थी।
अब दीदी जीजू के होंठ चूसने लगी और काटने लगी।

मै: काट क्यों रही है।?
दीदी:(हंसते हुए) बड़ा अपने भतार की चिन्ता हो रही है।
मै:(शर्माते हुए) तू ना हमेशा काटती है होंठ, और तेरा हाथ पैर भी तो भीगा है और हमसे सट रहा है हमने तो कुछ नही बोला।
जीजू हंसते हुए मेरे गाल चूम लिए।
दीदी:(हंसते हुए) एक ही दिन मे तू अपने भतार का साईड लेने लगी। ले मै फिर काट लूंगी।
दीदी फिर जीजू का होंठ काटने लगी उनकी आह निकल गई।
मै दीदी के होंठ पर होंठ लगा दी और चूसते हुए काट ली।
मै अचानक ये कर बैठी मै कभी दीदी के होंठ पर किस नही करी थी।
जीजू:(हंसते हुए) हां ठीक की बहुत मेरे होंठ काटी है।
दीदी मेरे उसके होंठ चूसने से  हैरान थी और शर्मा भी गई थी । मै भी शर्मा गई थी और अपनी शर्माहट दूर करने के लिए मै जीजू को चूसने लगी।

मै: देखो ऐसे स्मूच किया जाता है प्यार से।
दोनो हंसने लगे और मुझे प्यार करने लगे।
दीदी: यार तुम पैंट पहन लो ये तुम्हारा गियर रात भर चूभेगा।

जीजू: तुम ही पहना दो।
दीदी: शालू ला पैंट पहना दे।

मै टेबल से पैंट ला कर देती हूं दीदी रजाई मे अंदर जा पैंट पहना देती हैं और बीच मे आ जीजू पर एक टांग चढ़ा सोने लगती हैं।
दीदी: आह अच्छे से चिपको ठंडी लग रही है।
मै: तो कपड़े पहन ले ना।
दीदी: नही आज ऐसे ही सोऊंगी कितने दिनो बाद तो बिना कपड़ों के सो रही हूं।

जीजू कस कर दीदी को बाहों मे भरे थे मुझे भी दीदी से चिपका लिए मै दीदी के नंगे पीठ से चिपक गई जीजू मेरा हाथ पकड़ आगे ला दीदी के मम्मे पर रख देते हैं उसके मम्मे एक दम मुलायम रूई जैसे थे मै अपनी टांग दीदी की कमर पर चढ़ा देती हूं।

कुछ देर मे हमे नींद आ जाती है।
अब जब मेरी नींद खुली तो सुबह होने वाली थी मुझे सूसू आई थी मै उठी तो देखी दीदी बेड पर रजाई ओढ़ लेटी है और जाग रही है जीजू नही दिखे।

मै: जीजू इतनी सुबह सुबह कहां चले गए।
दीदी रजाई हटा दी, जीजू रजाई मे दीदी की बूर चूस रहे थे मै दीदी की गीली बूर देख शर्मा गई।
जीजू बूरी तरह बूर चूस रहे थे। मै उठी और बाथरूम चली गई।

जब फ्रेश हो आई तो दोनो रजाई मे जम कर चुदाई कर रहे थे जीजू दीदी के ऊपर चढ़े थे दोनो शायद झड़ने वाले थे दोनो की सासें भारी हो गई थी कुछ देर मे दोनो झड़ गए और एक दूसरे को चूसने और प्यार करने लगे।

मै बेड के किनारे गई ठंड सुबह मे बहुत थी और कोहरा भी बहुत था तो मै रजाई मे आ गई दीदी और जीजू मुझे चूमने लगे।
मै: आह जीजू कितना प्यार करोगे अब।
जीजू मेरे ठंडे हाथ पैर सहलाने लगे।
दीदी मेरे गाल चूस रही थी।

अब थोड़ी देर हम वैसे ही बेड पर एक दूसरे से लिपट पड़े रहे कुछ देर बाद दीदी उठ कर कपड़े पहन ली और फ्रेस होने गई।
जीजू मुझे बाहों मे भर सो गए बहुत चुदाई करी थी उन्होने।

अब अगली रात भी हम वैसा ही किए मै एक बार चुदाई और दीदी दो बार।
अब ऐसा ही चलने लगा जीजू हम दोनो को बहुत प्यार करते दीदी कभी उन्हें छेड़ने के लिए जीजू बोलती।

एक सुबह बहुत कोहरा छाया था हमने रात मे चुदाई नही करी थी मै उठी फ्रेस हुई बाहर निकली तो घना कोहरा था मै चादर ले रखी थी मेरा मन घूमने का करने लगा मै रूम मे गई तो जीजू फ्रेस हो बाहर निकले।

मै: जीजू चलो ना थोड़ा घूम कर आते हैं।
जीजू: यार अभी 5 ही बजे हैं अभी रात ही है।
मै दीदी को उठाने लगी।
दीदी: तुम दोनो चले जाओ मै अभी सोती हूं।

अब मै जीजू को मना घर से निकल जाती हूं अपने ही खेत मे बाग मे गार्डन मे घूमने लगी। अंधेरा काफी था मै जीजू को पकड़े हुए थी।
एक जगह गार्डन मे मै झूले पर बैठ गई शीत से झूला भीगा हुआ था जीजू भी बैठ गए।

मै उन्हे स्मूच करने लगी अब मै उनके गोद मे बैठ गई।
जीजू: आह क्या बात है रानी आज तो तुम काफी हॉट तरह से किस कर रही हो।
मै उनके मूंह मे जीभ डाल दी झूला हिल रहा था जीजू का लन्ड खड़ा हो रहा था।

जीजू: क्या कर रही हो जान चलो घर चल कर करते हैं।
मै: आह जीजू आज यहीं करते हैं।
अब जीजू मेरी कमर पकड़ सहलाने लगे।
मेरे मम्मे सहलाने लगे मेरी गर्दन कान गले चूसने लगे मै उनका पेंट सरका अपनी साड़ी उठा पैन्टी उतार उनके गोद मे बैठ गई धीरे से लन्ड बूर मे दबा ली।

मेरी आह निकल गई अब झूला झूलते हुए चुदाने लगी इतना मजा आ रहा था क्या बताऊं आपको।
बहुत देर चुदाने के बाद जीजू झड़ने को हुए मै तीन बार झड़ चुकी थी। जीजू मेरी बूर से बाहर निकाल झड़ गए कुछ देर हम वैसे ही प्यार करते रहे फिर कपड़े सही कर घर आ गए।

अब जीजू मेरी और दीदी की लगभग रोज चुदाई करते हैं मै भी धीरे धीरे पूरी नंगी हो चुदाने लगी और नंगी ही सो जाती।
एक रात हमने चुदाई नही करी थी लेकिन सभी नंगे ही सो रहे थे मै जीजू से चिपक कर बीच मे सोई थी।

रात करीब 4 बजे मेरे पेट मे लन्ड चुभा तो मेरी नींद खुल गई मै अपना हाथ नीचे ले गई तो लन्ड हाथ से छू गया मै जल्दी से हटा ली फिर कुछ देर बाद लन्ड को छू कर देखी बहुत गर्म था।

पता नही कैसे इतनी ठंड मे भी जीजू का लन्ड कैसे गर्म रहता है जबकि मेरी और दीदी की जांघें एक दम ठंडी रहती है।

मै पहली बार हाथ से लन्ड पकड़ रही थी वो एक दम सख्त हो रखा था उसकी गर्मी मेरे हाथों को बहुत अच्छी लग रही थी। मै उसे पकड़ सहला रही थी फिर अचानक उसकी स्कीन पीछे हो गई और मेरे हाथ सुपाड़े पर लग गए।

मै रजाई हटा देखी एकदम लाल सुपाड़ा था मै रजाई वापस ओढ़ ली और स्किन आगे कर दी।
अब धीरे धीरे सहलाने लगी थोड़ी देर मे जीजू की नींद खुल गई वो मुझे बाहों मे भर लिए।

जीजू: आह क्या कर रही हो जान।
मै शर्मा कर लन्ड छोड़ दी और अपने होठ उनके होंठ से लगा दी।
जीजू मुझे चूमने लगे मै अपनी एक टांग उनके ऊपर चढ़ा दी वो मेरे गर्दन गले कान सब जगह चूसने लगे और मेरी गान्ड सहलाने लगे मेरी आह निकल गई जब उन्होने एक ऊंगली मेरी बूर की फांकों मे फेर दी कुछ देर मेरी बूर सहलाई मै बूरी तरह गीली हो गई और उनका लन्ड पकड़ अपनी बूर से सटा दी वो मेरी गान्ड पकड़ लन्ड को ज़ोर लगाया है थोड़ा घुसा दिया मेरी आह निकल गई।

अब साईड मे लेटे हुए ही चोदने लगे मै उनके होंठ चूसे जा रही थी बेड हिलने से दीदी जाग गई और मेरी गान्ड से चिपक गई जिससे लन्ड मेरी बूर मे पूरा घुस गया मेरी आह निकल गई।
दीदी मेरी पीठ चूम रही थी और कन्धे चूस रही थी।
जीजू हल्के हल्के चोद रहे थे।
कुछ देर मे मै झड़ने वाली थी मेरी बूर फड़फड़ा गई मै कांपने लगी और झड़ गई।

जीजू लन्ड निकाल लिए और मुझे प्यार से सहलाने लगे।

अब जीजू और दीदी स्मूच करने लगे।
जीजू दीदी को चूसने लगे और मेरा हाथ पकड़ दीदी के मम्मे पर रख दिए मै हटा ली।

अब दीदी बीच मे लेटी थीं और जीजू उनके मम्मे चूस रहे थे मै उन्हे देख रही थी दीदी मेरी तरफ देखी और मुझे खींच कर मेरे माथे को चूम ली मै उनके गाल चूम ली। दीदी मेरे होंठ चूसने लगी मै भी मदहोशी मे चूसने लगी अब दीदी मेरे मूंह मे अपने एक निप्पल देने लगी।

मै थोड़ी शरमाई और उनके मम्मे चूसने लगी जीजू और मै उनके मम्मे चूस रहे थे दीदी मदहोश हो आह आह कर रही थीं मुझे उनके सेक्सी मम्मे चूसने मे बड़ा मजा आ रहा था।

अब जीजू नीचे जा उनके पेट नाभि पेडू चूसने लगे और रजाई मे जा दीदी की बूर और जांघ चूसने लगे दीदी आह आह करने लगी और कुछ देर मे झड़ गई जीजू बूर चाट फिर गर्म कर दिए और चोदने लगे।
काफी देर बाद दोनो झड़ गए।

कुछ देर आराम कर दोनो मेरे बूब्स चूसने लगे दीदी से बूब्स चुसवा मुझे मजा आ रहा था। अब जीजू मुझे खुद के ऊपर लिटा चोदने लगे मै भी कमर उठा उठा कर चुदाने लगी।

कुछ देर मे मै थक गई तो मै नीचे चली गई और जीजू को अपनी बाहों मे लपेट ली वो चोदने लगे मै उन्हें चूमे जा रही थी अपनी टांग उनके कमर पर लपेट ली मै आह आह कर रही थी कुछ आधे घण्टे मे मै तीन बार झड़ी और जीजू एक बार मेरी बूर पर दीदी जीजू के पैंट से मेरा बूर साफ कर दी।

हम वैसे ही चिपक कर सोए रहे।
कुछ देर मे सुबह हुई तो उठी मेरी बूर मे मीठा मीठा दर्द हो रहा था।
मै; हाय जीजू कैसे किया आपने हल्का मीठा मीठा प्यारा प्यारा दर्द दे दिया।
दीदी: (हंसते हुए) सुबह मे चुदवाने से ऐसा ही होता है।
मै शर्मा गई।
जीजू मुझे स्मूच करते हुए अंगड़ाई लेते हुए उठे।

अब हम सब बहुत खुश थे समय धीरे धीरे बीत रहा था मै हर जगह चुदवा चुकी थी खलिहान मे खेत मे बाग मे खुली धूप मे जब सरसों के खेतों मे फूल लहलहा रहे थे तो एक बार मै सरसों के खेतों मे भी चुदाई।

बहुत मजा आया था खुले मे चुदवा कर।
अब मार्च आ गया था हम बहुत दिन से गांव मे थे बस बीच मे दो बार शहर आए थे मां जी अब हमे बुलाने लगी की आ जाओ। हम अब शहर आ गए थे।
शहर मे भी हम तीनो साथ सोते।

धीरे धीरे समय बिता एक दिन दीदी जीजू से अकेले मे बोल रही थी कि सागर आ जाएगा कुछ हफ्ते मे , मै उनकी बात सुन ली।

मुझे उसका नाम सुन वो सब याद आ गया जो उसने मेरे साथ जबरदस्ती करी थी मै उदास हो गई।

जब रात को मै जीजू के बाहों मे सो रही थी तो मुझे वहीं बात याद आ गई मेरी आंखें भर आई मै उसके सामने जाने से भी डर रही थी मै सोचने लगी कैसे रहूंगी मैं उसके साथ एक घर मे क्या मै मायके चली जाऊं या गांव चली जाऊं।
ये सोच कर मुझे रोना आ गया और मै सिसकने लगी जीजू की नींद खुल गई।

जीजू: क्या हुआ मेरा बच्चा रो क्यों रहा है?
मै कुछ नही बोली बस सिसकने लगी।
जीजू मेरे चेहरे को पकड़ थाम लिए और मेरे आंसू पीने लगे।
जीजू: हे क्या हुआ।
अब दीदी भी उठ गई।
दीदी: क्या हुआ रो क्यों रही है।
मै: जीजू कहीं आप मुझे छोड़ तो नही दोगे ना।
जीजू::(मेरे गाल पिचका मेरे होंठ चूसते हुए) हे तू क्या सागर के आने से परेशान है, मै तूझे कभी नही छोडूंगा।

दीदी: तू उसके आने से परेशान क्यों हो रही है, मै उसे तूझे हाथ भी नही लगाने दूंगी तू डर मत।
मै:(रोते हुए) नही मै घर चली जाऊंगी।
दीदी: अरे पहले आने तो दे।
जीजू मेरे सर को सहलाते हुए मेरे माथे को चूम लेते हैं।

अब आगे की कहानी दीदी लिखेगी।
हाई मै मालनी अब तक शालू बहुत खुश थी अपने जीजू के साथ लेकिन जब से उसने सागर के आने की खबर सुनी वो उदास हो गई।
इतने दिन मे मै कभी कभी सागर से फोन पर बात कर लेती थी जिसके बारे मे शालू को नही बताई थी।
सागर शालू के बारे मे पूछता तो मै बोल देती कि अभी बहुत नाराज है।

अब सागर आ गया शालू ऊपर ही कमरे मे बन्द थी।

रात को सागर ने मुझे कहा कि वो शालू से माफी मांगना चाहता है मै बोली की अभी वो काफी गुस्सा है थोड़ा समय बीतेगा तो वो खुद माफ कर देगी।

अब कुछ दिन बिता शालू सागर के सामने भी नही जाती सासू मां को कुछ पता नही था वो एक दिन ऊपर कमरे मे शालू से मिलने आई वो बोली की क्या बात है शालू तुम्हारी तबियत तो ठीक है आज कल तू नीचे आती ही नही है।
शालू कुछ नही बोली बस अब थोड़ा नीचे जाने लगी जिससे सागर कभी उसे दिख जाता।
मै और शालू एक कमरे मे सोते साहिल अलग कमरे मे और सागर अलग कमरे मे।

एक दिन सासू मां थोड़ी रो रही थीं। मै पूछी तो बोली की मेरे दोनो बेटे आपस मे बात नही करते।

अब मै कुछ सोची अपने मन मे।
मै एक रात खाना खा सागर के कमरे मे गई।
सागर: क्या हुआ भाभी शालू मान गई क्या?
उसने बडे़ ही आशा भरी आवाज मे पूछा।
मै: शालू को तो तुम भूल ही जाओ, वो तेरे भाई के साथ खुश है ।

वो थोड़ा उदास सा हो गया।
मै:क्या हुआ क्या सोचने लगे।?
सागर: क्या सच मे शालू भाई के साथ?
मै: हां, जिसे लोगों की कद्र होती है उसे सब मिल जाता है और जिसे कद्र नही होती उसे मिलकर भी छीन जाता है।
सागर; क्या भाई इसके लिए मान गया था।
मै: हूं।

सागर: सॉरी भाभी मै बहुत शर्मिन्दा हूं।
मै: उसकी कोई जरूरत नही है अब शालू तो नही मिलेगी।
सागर: ऐसा क्यों बोल रही हो भाभी आप कुछ जुगाड लगाओ ना बस एक बार बात करवा दो मै उससे माफी मांग लूंगा।
मै: वो सब कुछ नही होगा।
सागर: मतलब मै जिन्दगी भर बिना बीबी के रहूंगा।
मै: नही ऐसा नही है मै तेरी किस्मत मे लिखी हुं।
सागर: क्या मतलब भाभी?
मै: मतलब अब मै तेरी बीबी हुं!

सागर: वाओ, अच्छा ही है वैसे भी आप शालू से ज्यादा सेक्सी लगने लगी हो।
मै:(एक थपड़ मारते हुए) तेरी हिम्मत कैसे हुई मेरी बहन को मुझसे कम सेक्सी बोलने की।

सागर: (मुसकुराते हुए) सच भाभी आप ज्यादा सेक्सी हो। क्या खिलाया भाई ने जो इतनी सेक्सी हो गई।
मै उसके पीठ पर मारी।
सागर: आह भाभी आप मारती बहुत हो।

मै: मुझे पता है तूझे कुछ करना नही आता, तू मुझे खुश कर पाएगा।
सागर:(मुझे बाहों मे भर बेड पर खिंचते हुए) तो आप सीखा दो ना भाभी।
मै फिर मारी।
मै: छोड़ कमीने कैसा है तू तेरे भाई को शालू के लिए मनाने मे मुझे कितना टाईम लगा था और एक तू है अपनी भाभी के साथ तुरन्त राजी हो गया।
सागर: इतनी सेक्सी हो गई हो आप की कैसे मै नखरा करता।

मै: मेरी जवानी तू सम्हाल पाएगा?
सागर: एक मौका तो दो भाभी।
मै: अच्छा ठीक है आजा चल आज खुश कर मुझे।

मै बेड पर लेट गई अपनी एक टांग मोड़ कर और अपनी दोनो बाजू ऊपर कर।
वो मेरे बगल मे लेट गया और मुझे होंठों पर चूमने लगा और चूसने लगा वो अच्छे से नही कर रहा था मै एक थपड़ मार दी।
सागर: भाभी आप बहुत मारती हो।
मै: अबे तूझे तो किस करना भी नही आता।

मै उसे अब किस करने लगी उसे सिखाने लगी।
वो थोड़ा अच्छे से किया तो अब हाथ सीधा मेरे मम्मे पर रख मसलने लगा मै फिर मार दी।

मै: अबे साले सीधा मम्मे मत मसल प्यार कर। और कभी इसे मसलना नही सहलाना।
मै उसे एक थपड़ और मार दी।
सागर: आह भाभी अब क्यों मारी अभी तो मैने कुछ किया भी नही।
मै: अबे तेरी गलती करने का इन्तजार करुंगी मै।
मै फिर मार दी।

मै उसे मार मार कर सहन शील बनाना चाहती थी।

सागर: ठीक है अब क्या करूं।

मै: मेरे गले कान गर्दन सब जगह चूस।
वो वैसा ही करने लगा।
मै: अब ब्लाउज खोल और मम्मे चूस।
वो ब्लाउज खोल मम्मे चूसने लगा मै कभी बिना मतलब के मार देती पीठ पर कभी गाल पर कभी बाल खींच देती।
सागर: वाओ भाभी आपके मम्मे कितने सॉफ्ट हैं।

वो मम्मे चूस रहा था। मै उसे पेट नाभि चूसने बोली वो चूसता रहा।
मै: चल अब पैर चूस मेरे।
सागर: क्या भाभी कुछ भी करवा रही हो।

मै: जितना बोल रही हूं उतना कर।
वो धीरे से पैर उठा पैर चूमने लगा।
मै उससे तलबे चटवाई उंगलियां चुसवाई। मुझे अपने पति जितना मजा नही आ रहा था उनके छूने से भी मै सिहर जाती हूं उनके छूने मे कुछ अलग बात है।

मै: चल अब बूर चाट।
सागर चौंक गया।
सागर: क्या भाभी क्या करवा रही हो मुझसे।
वो शर्मा रहा था और मना कर रहा था।
मै उसे बेड पर धक्का दी और अपनी साड़ी उठा अपनी बूर उसके मूंह पर रख दी थोड़ी देर उसने थोड़ा नखरा किया फिर चाटने लगा।

मेरी हल्के से आंखें बन्द होने लगीं मजे से। मै बूर रगड़ती रही।
कुछ देर बाद मै उसके मूंह पर ही झड़ गई।
सागर: कितनी गन्दी हो भाभी आप मेरे पर सूसू कर दी।
मै: अबे सुन बे ये सूसू नही रज है औरत को जब चोदो तो ये कन्फर्म करो की उसका रज निकले।

अब मै खड़ी हो उसके मुंह पर अपना पैर रगड़ने लगी उसके सीने पर रख दी। अब उसके लौड़े पर रख सहलाने लगी उसका लन्ड खड़ा था उसकी आह निकल गई।
वो अपने कपड़े उतार दिया उसकी झांटे भरी हुई थी मै उसे पकड़ कर खींच दी उसकी आह निकल गई।
मै: कल ये सब साफ मिलना चाहिए।
सागर: ठीक है भाभी।

मै उसके लन्ड पर बैठ गई वो मुझे नीचे कर चोदने के चक्कर मे था मै उसे फिर मारी मै उसके लन्ड पर कूदने लगी। उसकी आह निकल जाती।
कुछ देर मे मै जब थक गई तो मै नीचे आ गई।
मै: चल अब मुझे चोद।
सागर: कॉन्डम पहन लूं।

वो अलमारी से निकाल कॉन्डम पहन लिया। और बूर मे लन्ड डाल दिया।
मै: धीरे धीरे करना और जब कहूं रूक जाना।
मै उसे बीच बीच मे मारती कुछ देर मे वो झड़ गया।
मै भी झड़ने के करीब थी।

मै: चल अब मेरी बूर चाट कर मुझे झड़ा।
वो आज्ञाकारी लड़के की तरह मेरी बात मान रहा था और मेरी बूर चाट झड़ा दिया।
मै उसपर कूद कूद उसे थका दी थी और उसे मार कर लाल कर दी थी।

अब मै अपने कपड़े सही कर हॉल मे आई।
शालू जिस कमरे मे थी वो बन्द था रात के एक बजने वाला था मै साहिल के कमरे मे गई वो सो रहे थे मै नहा ली और उनसे चिपक कर सोने लगी वो जाग गए।

मै उन्हे स्मूच करने लगी मै उनसे बिना बताए सागर से चुदवाने चली गई थी मै अब उन्हे बता देना चाहती थी। मै जानती थी वो नाराज नही होंगें।
मै: एक बात बतानी थी आपसे।
साहिल: मै जानता हूं।
मै: क्या, कैसे जानते हैं?
साहिल:(हंसते हुए) यहीं ना की अब तुम मेरी भाभी बन गई हो।
मै उनके गाल काट ली।
मै: यार भाभी तो मत बोलो।
साहिल: नही मै तो अब भाभी ही बोलूंगा।
मै उनके होंठ चूस उन्हे चुप कराई। उनके होंठ काटने लगी।

साहिल: अच्छा अब काटना बन्द करो, ये बताओ कैसा लगा मेरे भाई से चुदवा कर भाभी जी?
वो हंसते हुए मुझे छेड़ रहे थे।
मै: यार उसे तो कुछ भी नही आता है सब सीखना पड़ा उसे।
साहिल: ठीक है अभी बच्चा है तुम सब सिखा दोगी उसको, ये बताओ मजा आया या नही।
मै:(शरमाते हुए) मजा आया लेकिन उतना नही जितना मजा तुम्हारे साथ आता है।
साहिल: तो मै मजा दूं कुछ।
मै: (उन्हें चूमते हुए) अभी नही अभी सो जाइए।

साहिल: चलो शालू के पास चलकर सोते हैं।
हम उठकर शालू के कमरे का दरवाजा खटखटाए उसने गेट खोला। रूम को उसने ऐसी चला कर एक दम ठंडा कर रखा था और कम्बल ओढ़ सोई थी हम भी कम्बल मे लेट गए।
शालू: आप लोग अकेले सोए थे।
मै: नही मै सागर के साथ थी।
शालू: तुम उसके साथ क्या कर रही थी।
साहिल:(हंसते हुए) अब ये मेरी भाभी बन गई है।
शालू: मतलब।
मै: मतलब मै सागर के साथ सेक्स कर रही थी।
शालू: मै कितनी बार बोली हूं उसका नाम मत लिया करो मेरे सामने, और तू क्यों करने गई उसके साथ,?
मै: अरे देख वो भी तो अपने ही घर का है ना।
शालू: मै वो सब नही जानती तू उसके पास मत जाया कर।
मै: अरे सुन तो पहले अब वो पहले जैसा नही है उसे अफसोस है तेरा दिल दुखाने का, वो तो तुमसे माफी भी मांगना चाहता है।
शालू: मै उसे कभी माफ नही कर सकती,अभी तू गई
है कल तू मुझे जाने बोलेगी।
मै: अरे मै तुझे जाने नही बोलूंगी, लेकिन मेरा मानना है कि सभी को एक दूसरा मौका तो मिलना ही चाहिए।
शालू गुस्सा थी वो बोलते हुए रोने लगी।

साहिल:(उसे अपने सीने से लगा लिए) आह क्या करती हो तुम भी रुला दिया ना इसे।
मै: देख शालू मै तूझे उसके पास जाने नही बोल रही हूं, बस मै सोचती हूं कि वो भी तो एक इन्सान है, और अभी वो सिर्फ 23 साल का है उसकी शादी हुई है उसकी भी कुछ जरुरत है।

मै उसे समझाने लगी वो रोते हुए सो गई।
मै: और आप भी उससे बात क्यों नही करते।
वो कुछ नही बोले।
मै: सुन रहे हैं कि सो गए, आपको मेरी कसम अब आप दोनो प्यार से रहा करो।
साहिल: मुश्किल है तोड़ा एक बार कोई चीज टूट जाती है तो जुटना।
मै: मै आप दोनो को जोड़ दूंगी बस आप सहयोग करना।
साहिल: अभी थोड़ा टाईम लगेगा।

अब हम सो गए।

अगले कुछ दिन तक मै किसी रात सागर के कमरे मे जाती और उसे कुछ सिखाती, चुदवाती , मारती काटती कुछ बातें समझाती और चली आती।
एक रात मुझे चोद कर वो करवट बदल लेट गया मुझे लगा इसे तो आदत लग जाएगी अकेले सोने की मै पीठ पर कस कर मारी।

सागर: आह भाभी आप बहुत मारती हो।
मै: अबे सुन चुदाई कर कभी पलट कर मत सोना अपने पार्टनर को बाहों मे भर कर प्यार करते हुए सोना।
सागर: रोज तो आप चली जाती हो तो किसके साथ सोऊं।
मै उसे अब बाहों मे भर ली और उसे सहलाने बोली।
कुछ देर हमने बात की उसने शालू के बारे मे पूछा और सो गए।
वो हर रात शालू के बारे मे पूछता बोलता कि वो उससे माफी मांगना चाहता है मै बोल देती कि थोड़ा टाईम लगेगा।

शालू भी थोड़े दिन मुझसे नाराज रही फिर मान गई मै साहिल से नही चुद रही थी एक अजीब सी झिझक महसूस हो रही थी मुझे उनकी याद आती अपने बूर मे उनका लन्ड महसूस करती उनका वो मेरे तलवे चूसना मेरे मम्मे नाभि पेडू चूसना मेरी बूर चूसना बहुत याद आती थी।

अब महीने बीत गए मै एक नीचे से काम निपटा ऊपर आई सागर नीचे ही था शालू नीचे रूम मे थी साहिल ने कमरे मे आते ही मुझे बांहों मे भर लिया।

मै: क्या हुआ?
साहिल:( लगभग रूआंसा होते हुए) क्या तुम मुझे भूल गई।
मै: ऐसा क्यों बोल रहे हैं?
साहिल: नही मुझे लगता है मै तुम्हे खो रहा हूं।
वो रोने जैसे बोल रहे थे।
मै उनके बाल सहला रही थी वो अपना सिर मेरे सीने से लगाए थे।
साहिल: क्या सच मे तुम अब मेरे पास नही आओगी।
मै: ऐसा क्यों बोल रहे हैं? मै आपकी हूं और आपकी रहूंगी।
साहिल: मै तुम्हारे बिना नही जी सकता मै मर जाऊंगा तुम्हारे बिना।
वो रोने लगे, मै उनके आसू पीने लगी।
मै; मै बोली थी ना कभी ऐसी बात मत करना।

साहिल: नही मै तुमसे दूर नही रह सकता अब।
मै: बस कुछ ही दिनों की बात है फिर सब ठीक हो जाएगा।

मै अब उन्हे स्मूच करने लगी वो पहले छूटने लगे मै चूसती रही मै गेट बंद करी अभी 10 ही बजे थे मै उन्हे बेड पर ले आई और उनके कपड़े उतार उनके अंग अंग को चूसने लगी उन्हें प्यार करने लगी।

उनके होंठ चूसते हुए अपने सारे कपड़े उतार दी और उनका लन्ड बूर मे डाल ली मुझे इतना सुकुन मिला उनके सीने से लग मै क्या बताऊं। अब मै चुदाने लगी मै उनके गले कान सीने सब जगह चूस रही थी उनके निप्पल काट लेती।

कुछ देर मे मै झड़ गई मै साइड लेट गई वो मेरे कान गले गर्दन चूसते हुए मुझे चोदने लगे मेरे मम्मे चूसने लगे मै आह आह करते हुए झड़ गई वो भी बाहर निकल झड़ गए।

मै उनके बाल सहलाती हुई उनसे बात करने लगी उन्हे समझाने लगी वो मेरे सीने से लग किसी बच्चे की तरह सो गए।

अब सुबह उठ मै सोची की ये दोनो भाई तो आपस मे बात ही नही करते मेरी सास ससुर बहुत दुखी होते।

अब राखी पर मेरी बूआ सास  आई हुईं थीं मेरी ननद भी आईं थीं। मै अपने भाई को भी बुला ली थी।
अब तो शालू को तकलीफ होनी थी क्योंकि सबके सामने तो वो सागर को देख भाग नही सकती थी।

अब सबने अपने भाई को राखी बांध दी।
अब दिन तो निकल गया रात को सोना था मेरी ननद और उसके बच्चे मेरे बगल के रुम मे सो गए मै अपने रूम मे मेरा भाई और बूआ जी के बेटे उसी फ्लोर पर एक रूम मे अब शालू को मजबूरी मे सागर के साथ रूम मे सोना पड़ा।

मै सागर को बोल दी कि अगर वो बात ना करे तो तुम भी कुछ मत बोलना।

मेरा भाई अगले दिन चला गया मेरी बूआ सास मुझे और शालू को अकेले मे बुला कर रोते हुए बहुत समझाई की दोनो भाई आपस मे बात नही करते तुम दोनो ही दोनो को मिला सकती हो।

अब समय बीतने लगा मै सागर के साथ सोती और शालू साहिल के साथ। साहिल मेरे बिना बहुत उदास रहने लगे थे शालू तो जबसे सागर आया था तब से ही उदास थी।
सागर भी उदास ही रहता बस जब तक मै उसके साथ होती थोड़ा खुश होता अब शालू और सागर मे थोड़ी बात हो जाती थी जैसे सासू मां उसे खाना देने बोलती तो वो खाना दे देती नही तो पहले तो सीधा किचन मे जाती तो निकलती ही नही तो मुझे देना होता।

सागर भी धीरे धीरे चोदना सीख गया लेकिन अभी भी जो मजा साहिल की बाहों मे आता वो सागर की बाहों मे नही शायद यहीं प्यार है।

एक बार सागर कुछ काम से दो तीन हफ्तों के लिए बाहर गया हुआ था मै नीचे काम निपटा ऊपर आई शालू और साहिल कम्बल मे थे और कुछ बातें कर रहे थे मै दरवाजे से उनकी बातें सुनने लगी। एसी से रूम ठंडा हो रखा था।

शालू: जीजू मेरी वजह से आप दोनो को अलग रहना पड़ रहा है आप को कितना दुख हो रहा है ना।
साहिल: अरे नही ऐसा नही है।
शालू: नही मै उस दिन आपकी और दीदी की बात सुन ली थी।

साहिल: किस दिन।?
शालू: उस दिन जिस दिन आप रो रो कर दीदी के गले लगे हुए थे और जल्दी से गेट बंद कर लिए थे।
साहिल: तुमने सब सुन लिया था।
शालू: हां, और उस दिन आप लोगों के गेट बंद कर लेने से सागर को मुझसे बोलने का मौका मिल गया।

साहिल: क्या बोला उसने?
शालू: कुछ नही मै दरवाजे के पास खड़ी थी तो वो अपने दरवाजे से मुझसे माफी मांगने लगा।
साहिल: तो तुमने क्या किया।
शालू; मै दूसरे रूम मे चली गई और दरवाजा बन्द कर ली।

साहिल: अच्छा राखी दिन जब कमरे मे साथ साए थे तो उसने कुछ कहा क्या?
शालू: हां कहा ना? मै जाते ही बोल दी कि ये देखो चाकू अगर कुछ करने की कोशिश करी तो या तो तुमको मार दूंगी या खुद मार लूंगी।

साहिल:(हंसते हुए) पागल चाकू से कौन डराता है।
शालू: और नही तो क्या।
साहिल: फिर क्या कहा उसने?
शालू: क्या बोलता नीचे जमीन पर बेडशीट लगा सो गया मै ऊपर सो गई बस बहुत देर तक बोलता रहा माफी मांगता रहा मै चुप चाप सो गई।

साहिल: तो तुमने क्या सोचा?
शालू: जीजू, मै अब सोच रही हूं उसे माफ कर दूं और उसके पास चली जाऊं।
साहिल: मतलब अब तुम भी मुझे अपनी दीदी की तरह छोड़ कर चली जाओगी।
साहिल थोड़ा रूआंसा हो बोले।
मै अंदर आ गई अब।
शालू:(साहिल को चूमते हुए) नही जीजू मै आपको कभी छोड़ कर नही जाऊंगी।

मै: क्या बात हो रही है जीजा साली मे ।
शालू: देखो ना दीदी जीजू को लगता है कि तुम छोड़ कर चली गई हो और अब मै भी छोड़ कर चली जाऊंगी।

मै: कोई किसी को छोड़ कर नही जाएगा हम सब एक साथ रहेगें।

मै अब साहिल पर चढ़ गई और उन्हे चूमने चूसने लगी अब बिच मे उन्हे कर दोनो बहने उनके गाल चूसने लगी उनके होंठ चूसने लगी मै कभी काट लेती उनके रसीले होंठ।

अब गंजी उतार उनके सीने को चूसने लगी उनके निप्पल चूसने लगी उनकी आह निकल जाती , अब उनके गले गर्दन को चूसने लगी शालू उनके पेट नाभी चूसने लगी और पैंट उतार दी।

साहिल: आह अब रुको मुझे भी कुछ करने दो।
साहिल अब हम दोनो को लिटा दिए दोनो ने पूरे कपड़े उतार दिए अब दोनो को बारी बारी से स्मूच करने लगे दोनो के मम्मे पीने लगे और सहलाने लगे मेरी आह निकल जाती दोनो के कान गले गर्दन चूसने लगे।
अब पेट नाभि पेडू चूसने लगे मेरी सिसकारी निकल गई।

अब मेरी बूर को मूंह मे भर लिए मेरी आह निकल गई वो बूर चाटने चूसने लगे बहुत दिन बाद बूर चुसवा रही थी मै मजे से सिसकारी भरने लगी कुछ देर मे ही मै झड़ गई।
वो सारा रस चाट गए।
अब वो शालू की बूर चूसने लगे वो मजे से आह आह करने लगी वो शालू की चूतड चूस रहे थे। कुछ देर मे वो भी झड़ गई।

अब वो मेरी चुदाई करने लगे मै सिसकारी भरने लगी मै उन्हे बाहों मे भर ली उन्हे खुद मे समा लेना चाहती थी कुछ देर मे दोनो ही झड़ गए।

कुछ देर मे शालू उन्हे स्मूच करने लगी और उनके ऊपर चढ़ कर चुदने लगी , जब वो थक गई तो नीचे आ गई।
शालू; जीजू कमर को गोल गोल घुमाओ ना।
साहिल कमर गोल गोल घुमा चोदने लगे।
कुछ देर मे दोनो झड़ गए। हम तीनो वैसे ही सो गए।

अब मै धीरे धीरे महीने भर तक शालू के सामने सागर की तारीफ करने लगी वो शर्मा जाती जब मै उसे कहती की अब उसे चोदना आ गया है।
मै सागर के साथ सोती और उसे बता दी की शालू अब मान जाएगी वो बहुत खुश हुआ।
मै उसे कह दी की जब तक वो अच्छे से राजी ना हो तुम कुछ कहना मत। मै उसे और चुदाई मे ट्रेंड कर दी।

एक दिन मै कमरे मे बैठी थी शालू मेरे गोद मे सिर रख बैठी थी हम अकेले थे।
शालू: दीदी क्या सच मे सागर अब सुधर गया है?
मै: तू ऐसा क्यों पूछ रही है?
शालू: वो दीदी मै सोच रही थी कि सागर से अपने रिश्ते सुधार लूं। मेरी वजह से आप दोनो अलग अलग रहते हो, जीजू तो रात रात भर आपको याद कर जागते रहते हैं।

मै: हां, तू तो जानती है मेरे बिना वो कैसे हो जाते हैं और ऊपर से सागर से उनकी अभी तक बात चित बन्द है, मै तो समझा कर थक गई लेकिन वो मानते ही नही। और सागर के केस मे अभी तू जल्दीबाजी मत कर हमारे लिए अभी तू उससे थोड़ा थोड़ा घुलमिल जा।

शालू: ठीक है मै घुलने का प्रयास करती हूं,। हां वो कल सासू मां बूआ जी से बात करते हुए रो रही थीं दोनो भाईयों के बीच बोलचाल बन्द है उसकी वजह से।
मै: हां यार कल अपनी बूआ भी मुझे फोन कर बताई।
शालू: इन दोनो को मिलाने के लिए कुछ तो करना पड़ेगा।

मै: एक आईडिया है,?
शालू: क्या?
मै:  जब तेरा सागर से पैचअप हो जाएगा तो क्यूं ना हम चारो एक साथ एक ही कमरे मे चुदाई करें।
शालू:(हंसते हुए) हे क्या बोल रही हो दीदी तुम भी।
मै: यार चुदाई ही दोनो भाईयों को जोर सकता है।
बस तू अपने जीजू को सम्हाल लेना सागर को तो मै जो कहूँगी वो करेगा।

शालू: क्या दीदी मुझे शर्म आएगी, लेकिन मै जीजू को छोड़ना भी नही चाहती,।
मै: तो ठीक है तू जीजू को सम्हाल लेना।

हम दोनो अब प्लान बना लेते हैं। लेकिन प्लान को शहर मे अंजाम देना थोड़ा रिस्की था तो हमने गांव मे करने की सोची।

जब कुछ महिने मे ठंड आने लगी तो हम गांव चले गए धान कटवाने।
मै सागर को बोल दी कि वो दो दिन बाद आ जाए,
बाकि हम तीनो आ गए दो दिन धान का काम चला।

अगले दिन सागर आ गया उस समय साहिल घर पर नही थे मै उसे एक रूम मे छुपा दी।

जब शाम को साहिल आए तो हमने खाना बना खा लिया सागर को मै चुपके से खाना दे आई।
अब हम कमरे मे आ गए।

हम दोनो बहने साहिल को बेड पर लिटा उन्हे प्यार करने लगी उनके अंग अंग को चूसने लगी शालू भी सागर का सामना करने के लिए तैयार थी।

अब हमारे कपड़े उतर गए हम कम्बल मे आ गए। कुछ देर चूसने के बाद मै कुछ बहाना कर बाहर आ गई और बिजली काट दी सागर को हमारे प्लान के बारे मे कुछ पता नही था था मै उसे पूरा नंगा होने बोली थोड़ा सवाल जवाब कर वो कपड़े उतार दिया कपड़े तो मेरे भी उतरे थे।

मै उसे कमरे मे ले गई कमरे मे एक दम अंधेरा था मेरे कहे मुताबिक शालू ने साहिल को चुप करा रखा था।

वो दोनो कंबल के अंदर थे।
मै सागर को ये बोलकर लाई थी कि शालू तुमसे अंधेरे मे मिलना चाहती है और तुम्हारे भईया दूसरे रूम मे हैं।

हम दोनो दबे पाव बेड पर आए दोनो के बेड पर बैठते ही साहिल बोल पड़े।

साहिल: कहां गई थी जान, शालू अब दीदी आ गई मुझे जाने दो मै जनरेटर चालू कर आता हूं?
सागर चौंक गया अपने भाई की आवाज सुन।
वो चुपके से जाने लगा। मै उसे बेड पर धक्का दी।

साहिल:(कम्बल से बाहर आते हुए)क्या हुआ जान?

वो भी सागर को देख चौंक गए शालू उन्हे कम्बल मे वापस खींच ली।

साहिल: छोड़ो मुझे क्या कर रही हो तुम दोनो।

मै:(सागर पर चढ़ जाती हूं)  जान मै चाहती हूं कि अब से हम साथ सोए।
साहिल: क्या वकवास है ये।

वो जबरदस्ती उठ कर टॉवेल लपेट बाहर चले गए।

मै उन्हे बाहर जा पकड़ ली और सोफे पर ले जा उनसे लिपट गई।

साहिल: क्या कर रही हो यार तुम?
मै: (उन्हे स्मूच करने लगी) जान कब तक दोनो भाई लड़ते रहोगे मै मम्मी जी और बूआ जी को वादा कर आई हूं कि दोनो भाई को मिलाकर दम लूंगी।

साहिल: छोड़ो यार!
मै: मेरी खातिर मान जाओ ना।
कुछ देर मे शालू आ गई और अंधेरे मे ही हमसे आ लिपट गई।
शालू: प्लीज जीजू मान जाओ ना चलो ना अंदर।
साहिल: क्या करूं अंदर जा कर।
मै: हम दोनो बहने चाहती हैं कि आप दोनो भाई हमे मिलकर प्यार करो।
साहिल: क्या वकवास कर रही हो।
मै: जान शालू को देखो आज कितने महीनो बाद सागर से मिलन करने वाली है।

कुछ देर मे साहिल मान गए।
शालू:( उन्हे स्मूच करते हुए) लव यू जीजू। चलो अब जल्दी से।
साहिल: पहले लाइट तो आने दो।
मै: आप जाओ मै लाइट लाती हूं।

मै फ्यूज लगाने गई और वापस रूम मे आई मै नंगी थी सागर ने टॉवेल लपेट रखा था और साहिल के पैर पकड़ माफी मांग रहा था। शालू नाइट ड्रेस पहन रखी थी।

साहिल: अरे भाई होकर माफी मांग रहा है आ गले मिल।
मै: उन दोनो से गले जा मिली और शालू को भी अपने साथ खींच ली।

मै: आह कितना अच्छा लग रहा है सब एक साथ गले मिल, अब से हम सभी साथ रहेगें कोई झगड़ा नही करेगा।
सागर: हां भाभी बहुत अच्छा लग रहा है।

अब मै शालू का हाथ सागर के हाथ मे देती हूं शालू थोड़ी शर्मा रही थी थोड़ी नर्वस थी।
मै: अब तुम दोनो भी प्यार से रहो।
सागर: हां भाभी, शालू मै तुमसे माफी मांगता हूं अपने गलत व्यवहार के लिए।
शालू: (शर्माते हुए) कोई बात नही।

अब साहिल सागर को समझाने लगे कुछ।
मुझे ठंड लगने लगी नंगी खड़ी होने से।

मै: अब चलो बेड पर मुझे ठंड लग रही है।
सागर: हां आ जाओ सब एक साथ सोते हैं।
शालू: एक बेड पर सभी नही आ पाएंगे।

अब साहिल और सागर ने दो गद्दे नीचे जमीन पर बिछा दिए मै अलमारी से एक बड़ा सा कम्बल निकाल ली सब नीचे ही बैठ गए सागर शालू को बाहों मे भरने लगा शालू थोड़ी नर्वस थी साहिल समझ गए।

साहिल :(शालू को अपनी बाहों मे भरते हुए) आ जाओ साली साहिबा आज आखरी बार आपको प्यार कर लूं।
सागर; आखरी बार क्यों अब हम तो साथ ही रहेगें सारी उम्र।

शालू साहिल के बाहों मे चली गई और मै सागर पर चढ़ गई।
शालू: (धीरे से साहिल के कान मे) आखरी बार नही जीजू आपको हर दिन मुझे प्यार करना होगा।

मै: आजा मेरे देवर आज तू मुझे चोद कर दिखा दे शालू को कि मेरे चेले ने कितना सीखा है।

सागर: हा भाभी आज मै अपने एक्जाम की तरह परफार्म करुंगा।

अब मै सागर पर चढ़ गई और उसका गला अपने हाथ से दबा उसे किस करने लगे उधर शालू साहिल को स्मूच कर रही थी और दोनो हमे देख भी रहे थे।

मै सागर के मूंह पर बैठ गई और अपनी बूर चुसवाने लगी उधर शालू को साहिल हर अंग चूस रहे थे अब उसे लिटा उसकी बूर चूसने लगे।

मै अब बूरी तरह से गीली हो गई मै सीधा सागर के लन्ड पर बैठ गई और बूर मे घुसा ली।
मै सागर को मार रही थी और आह आह कर रही थी।

सागर: आह भाभी आप मारती बहुत हो।
शालू: (हंसते हुए) आपको मारती है और जीजू को काटती है।

मै फिर सागर को मारी मै उसके लन्ड पर कूद रही थी।

अब मै शालू को पकड़ उसके होंठ चूसने लगी और उसके मूंह को पकड़ सागर के तरफ झुकाई।
वो हल्के से सागर को किस करी फिर स्मूच करने लगी मै लन्ड पर कूद रही थी साहिल शालू की चूतड और बूर चूस रहे थे अब शालू सागर को किस करते हुए अपना हाथ पीछे कर साहिल का लन्ड अपनी बूर से लगा दी साहिल धीरे धीरे चोदने लगे शालू आह आह करने लगी। मै साहिल को किस कर रही थी और लन्ड पर कूद रही थी।

कुछ देर मे मै सागर को ऊपर आ चोदने बोली वो करने लगा शालू भी नीचे लेट गई और चुदाने लगी वो साहिल को पूरी तरह बाहों मे भरे थी जैसे खुद को समा लेना चाहती हो।

कुछ देर मे सब झड़ गए सब खुद को साफ कर एक दूसरे से चिपक कर सो गए।

अब हम काफी खुश थे अगले दिन मै सोची कि शालू सबके होने से शर्मा रही है तो अगली रात मै उन दोनो को अकेले सोने बोली और सागर को हिदायत दी कि प्यार से करना।

मै साहिल के साथ सो गई।
अगले दिन मै शालू से पूछी कैसा लगा।
शालू: (शर्माते हुए) पहले से तो बहुत अच्छा लगा पर जीजू के बिना मुझे रात भर नींद आने मे दिक्कत हुई।
मै: अरे तेरे जीजू भी तेरे बिना कहां सोए रात भर।
हम दोनो हंसने लगी

शालू; ऐसा करेगें आज से सब साथ ही सोएंगे।
मै: ठीक है।

अब हम सभी साथ ही सोने लगे और चुदाई करने लगे शालू तो साहिल के साथ ही चिपकी रहती और उनके जिस्म को चूसती रहती।

कुछ दिन गुजरे फिर हम शहर आ गए यहां हम अपने अपने रूम मे सोते। पहली ही रात शालू उठ कर हमारे रूम का दरवाजा खटखटाई। मै साहिल से चुदवा रही थी।

मै: क्या हुआ?
शालू: मुझे नींद नही आ रही है।
साहिल: तो आ जाओ सागर को भी बुला लो।
शालू: वो सो गए हैं आप दोनो करो मेरे पिरियड हैं।

वो कम्बल मे जा साहिल से चिपक गई और उन्हे चूसने लगी।
मै साहिल पर चढ चुदाने लगी।

कुछ देर मे झड़ गई और सभी सो गए।

कुछ दिन ऐसा ही चला कभी सभी साथ सो जाते कभी अपने अपने रूम मे।

एक महीने बाद सागर को एक साल के लिए ऑस्ट्रेलिया जाना था तो वो कुछ हफ्तों के लिए मुम्बई गया हुआ था अपने विश्व विद्यालय से डॉक्यूमेंट्स लाने और कुछ पासपोर्ट वीजा करने।

हम तीनो साथ सोए थे रात मे शालू के कुछ बात करने से मेरी नींद खुल गई।

शालू; जीजू एक बात बोलूं आप मानोगे।
वो बहुत धीरे से बोल रही थी।
साहिल: हां बोलो ना जान।
शालू: जीजू आप मुझे मां बना दो।
साहिल: मां बनना है तो सागर से बोलो ना जान।
शालू: जीजू वो अभी नही मानेगा।
साहिल: क्यों?
शालू: वो मुझे आस्ट्रेलिया ले जाना चाहता है और मै आपसे अलग नही हो सकती।
साहिल: ओ तो ये बात है।
शालू: हां जीजू मै मां बनने के लिए रह जाऊंगी तो मुझे नही जाना पड़ेगा और मै आपसे दूर भी नही जाऊंगी।

साहिल: (शालू को स्मूच करते हुए।) वाह मेरी साली क्या उपाय सोची है, लेकिन क्या तुम अपनी दीदी से पहले मां बनना चाहती हो।

शालू: आप उसे भी बना दो।
साहिल: ठीक है दीदी के अभी पिरियड हैं 10 दिन बाद दोनो को बना दूंगा।

शालू: मुझे अभी कर दो ना प्लीज।
साहिल: लेकिन..
शालू उन्हे स्मूच करने लगी।
शालू: अगर मै पहले बन जाऊंगी तो मै अपना दूध आपको पिलाऊँगी।

साहिल:(हंसते हुए) चल पागल।
अब शालू साहिल को स्मूच करने लगी वो दोनो एक दूसरे को सहलाने लगे एक दूसरे के अंगों को चूसने चाटने लगे।

शालू: आह जीजू अब घुसा दो।
वो साहिल को अपने ऊपर खींच ली और चुदवाने लगी।
मै उन्हे बिना डिस्टर्ब करे लेटी रही।

कुछ देर मे साहिल शालू के बूर मे झड़ गए शालू उन्हे अपने से चिपकाई हुए थी कुछ देर मे दोनो की सांसे नॉर्मल हुई।

शालू: आह जीजू कितना गर्म है आपका माल।
साहिल उसे स्मूच करते हुए सहलाते रहे।

शालू: जीजू एक बार और करो ना।

वो दोनो फिर चुदाई करने लगे और झड़ कर सो गए।

अगले दिन दोपहर मे हम दोनो बहने बैठी थीं। शालू मेरी गोद मे सिर रख लेटी थी मै उसके बाल सहला रही थी।

शालू:दीदी आप मां बन जाओ।
मै:(उसके गाल चूमते हुए) अच्छा मेरी प्यारी बहना।

शालू; आप रात को जाग रही थीं क्या?
मै; हां मेरी प्यारी बहना।

मै हंसते हुए बोली।
शालू: (मुझे चूमते हुए) आई लव यू दी। आप मेरी जान हो। मै आपका दूध पिऊंगी।
मै; (हंसते हुए) तू अपना दूध अपने जीजा को पिलाएगी मेरा तू पी जाएगी तो बच्चे क्या पिएंगे।

शालू हंसने लगी।

अब कुछ दिन हमने जम कर चुदाई करी और बूर मे माल लेती रही ठंड मे बूर मे जब गर्म माल जाता है तो अलग ही मजा आता है।

अब जब सागर आया तो घर मे बता दी की शालू मां बनने वाली है उसने टेस्ट नही किया था फिर भी।
सभी बहुत खुश हुए मां जी बोली कि सागर अब अकेले ही जाएगा।

अगले महीने मे हम दोनो ने टेस्ट किया दोनो प्रेग्नेंट थीं सभी बहुत खुश हुए कुछ दिन बाद सागर चला गया शालू साहिल को दिन भर अकेले मे चूमती रहती और बोलती जीजू देखना मै आपको अपना दूध पिलाऊंगी।

मै शालू को इतना खुश देख फुली नही समाती। कुछ तीसरे महीने तक हमने खूब चुदाई कराई फिर कम कर दी । साहिल और मेरी सास हम दोनो का खूब ख्याल रखते।

मेरी मां पापा भाई भी हमसे मिलने आई बूआ भी आई सब खुश थे।

कुछ महीने बाद पहले शालू को एक लड़का हुआ बहुत ही प्यारा और सुंदर फिर अगले महीने मेरी एक सुन्दर बेटी हुई। हम पिछले एक तीन महिने से नीचे ही अपनी सास के साथ सोती थीं।
साहिल अकेले सोते थे।

जब बच्चा हो गया तो दोनो बहने एक दिन दोपहर मे नीचे कमरे मे बच्चों के साथ थीं हॉल मे सभी गेस्ट थे जो बच्चों के जन्मोत्सव मे आए थे।

शालू: दीदी जीजू को बुलाओ ना।
मै: क्यों?
शालू: बहुत दिन से उन्हे चूमी नही हुं और दूध भी पिलाना है उन्हें।

मै:(हंसते हुए) तो तू ही बुला ले ना।
शालू: मै कैसे बुलाऊं सबके सामने।

मै: ठीक है बुलाती हूं।

मै उन्हे आवाज दे अंदर बुलाई।
साहिल: क्या बात है।
मै: शालू को कुछ कहना है।
मै हंसते हुए बोली।

शालू: हां बोलो?
शालू सीधा खड़ी हो उनके होंठ चूसने लगी साहिल थोड़ा हड़बड़ा गए क्यूंकि गेट खुला था।

शालू: मेरा दूध नही पियोगे जीजू।

वो अपनी ब्लाउज उठा अपना निप्पल साहिल के मुंह मे डाल दी साहिल पीने लगे मै गेट पर नजर लगाई थी। वो जोर जोर से दूध पी रहे थे शालू उनके बाल मे हाथ फिरा रही थी।

अब उसका दूध खत्म हो गया तो वो गेट पर नजर रखने लगी और मै साहिल को स्मूच करने लगी उनके होंठ काटने लगी उन्हें अपना दूध पिलाने लगी जब वो दूध खिंचते तो अजीब सी सिहरन नसों मे दौड़ जाती और आह निकल जाती, कुछ देर वो मेरे मम्मे चूसते रहे और दूध पीते रहे फिर दूध खत्म हो गया तो वो चले गए।

कुछ दिन बाद हम दोनो बहने ऊपर सोने आ गई और खूब प्यार करती साहिल को। खूब चुदवाती।
शालू तो अपना सारा दूध साहिल को ही पिला देना चाहती थी। वैसे उसे बहुत दूध निकल रहा था। कभी दोनो बच्चों को पिलाने पर भी खाली नही होता था उसका ब्लाउज भीगा रहता।

मै जब दोनो बच्चों को पिला देती तो खत्म हो जाता।
उसके दोनो बच्चे और बच्चों के पापा के भी पीने पर बचा रहता।

कुछ महिने बाद सागर आ गया हम साथ ही रहने लगे खुशी खुशी।

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कहानी पूरी पढ़ने के लिए धन्यवाद।

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