Indian Sasur Bahu Sex Kahani – ससुर से पहली चुदाई, Hindi Sex Story

Indian Sasur Bahu Sex Kahani – ससुर से पहली चुदाई, Hindi Sex Story

गोकुलधाम ३

गोकुलधाम २ से आगे

बापूजी से चूदाई करवाने के बाद उनसे सब सामूहिक चूदाई की बात बताकर अपने रूम में जाकर आराम कर ने लगी और शाम को अपने घर के कामों में व्यस्त हो गई।

रात को जेठालाल सोडा शॉप से वापिस आया और उसके साथ दया बेडरूम में जाकर बात करने लगी।दया ने बापूजी के साथ जो बात हुईं और जो कुछ किया वो सब बता दिया। जेठालाल खुश हो गया और बोला, वाह मेरी दया, तूने बापूजी को रोक कर बहुत बढ़िया काम किया और सामूहिक चूदाई बात कर के तूने बाहोत बड़ा काम किया। ये बात सुनकर बापूजी नाराज भी नहीं हुए और तूने साथ मिलकर चूद ने की बात कर के मेरा दिल जीत लिया।अगर बापूजी को कोई साथी मिल जाए तो घर में ही सामूहिक चूदाई का मजा रोज लिया जाए। हां मगर टपू का क्या करेंगे?ये सुनते ही दया बताती हैं कि अभी मेरे पास एक आइडिया है टपु के पापा बापूजी के लिए। जेठालाल बोल पडा,क्या?दया बताने लगी की मैंने उमर वालों का चूदाई का दर्द समझा।मेरी मां का दर्द मेरे समझ में आता है।मेरी मां भी कई साल से विधवा हैं और उसको भी कभी कभी लन्ड लेने का मन करता होगा, चूदाई का भी मन करता होगा।तो मैं क्या कहती हूं कि बापूजी के साथ उसकी जोड़ी बनाई जाए और दोनो को चूदाई का सुख प्राप्त हो।ये सुनते ही जेठालाल बोलता है कि क्या तेरी मा मान जाएगी? टपु के पापा अगर मन जाति हैं तो हम उसे बुला लेंगे?जेठालाल हां बोलता है और दया को चोद कर सो जाता हैं।

दुसरे दिन सुबह जेठालाल दुकान जाते वक्त बापूजी को पूछता है कि बापूजी अब आप को कोई तकलीफ तो नहीं है ना?अब तो आप भचाऊ तो नहीं जाएंगे न?बापूजी बताते हैं की मुझे तुम्हारे जैसा बेटा और दया जैसी बहु मिली है तो क्या चिंता? आप लोग मेरा हर तरह से मेरा ख्याल रखते हो। मे तुम लोगों को आशीर्वाद देता हूं कि तुमको भी बेटे बहु ऐसा ख्याल रखने वाले मिले। जेठिया में आज हमारे दोस्तों के साथ बाहर जा रहा हूं और कल रात को मैं आऊंगा। जेठालाल पूछता है कि बापूजी कुछ पैसे चाहिए? चाचाजी ना बोलते हैं और चल जाते हैं।दया जेठालाल को बताती हैं की वो आज महिला मंडल के साथ शॉपिंग के लिए जा रही हैं तो मुझे पैसे देकर जाना। टपु बोलता है मै भी कॉलेज जाता हूं। दोपहर को महिला मंडल शॉपिंग करने के लिए चले जाते है।शॉपिंग करने के बाद दया को मजा नहीं आया इसलिए वो और अंजली वापस आ गए और अपने घर चले गए।

दया दूसरी चाबी से घर खोल कर घर में जाती हैं तो वो टपू के रूम से आवाजे आती हैं तो वो डरते हुए टपू की रूम में प्रवेश करती हैं तो चौंक जाति हैं,वो देखती है कि टपू सोनू को चोद रहा था। दोनो नंगे थे।दया बोलती हैं कि तुमलोग क्या कर रहे हों?दया की ओर देख कर टपु जोर से लुंड को सोनू की चूत में अंदर बाहर करने लगा और उसने चूदाई करते हुए कहा की मम्मी जरा रुको,और वो थोड़ी देर में झर गया और सोनू पर ढल गया।ये देख कर दया चिल्लाती है और टपु को पकड़ कर सोनू पर से खड़ा करती हैं।वो देखती है की सोनू की चूत से लहू और वीर्य निकल रहा हैं।वो धीरे से सोनू को उठाती हैं सोनू रोती हुई बोलती हैं कि आंटी बहुत दर्द होता हैं।दया बोलती हैं आज तुम दोनों ने पहली बार चूदाई की है? दोनों सर हिलाते हुए हा कहते हैं।दोनो को दया बाथरूम में जाकर कर सफाई करने को बोलती हैं और अंदर से कुछ दवाइयां ला कर सोनू को देती हैं और बोलती हैं की एक गोली दर्द में राहत मिलेगी और एक गोली प्रेगनेंसी रोकने की हैं।और किसीको बता ये बिना सोनू तुम अपने घर जाओ और आराम करो।ये जो हुआ है उसका जिक्र किसी से नहीं करना।सोनू कपड़े पहन कर घर चली जाती हैं और दया टपु की और देखती हैं तो उसका लुंड अभी भी खड़ा था और वो जेठालाल जैसा ही था।वो टपु को डांट ती हैं और कपड़े पहन कर बाहर आने को बोलती हैं।

दया टपु को पुछती हैं कब से चल रहा हैं ये?तब वो बताता है कि आज हम ने पहली बार ही किया है। कॉलेज से आते वक्त मैं और सोनू साथ हो गए।घर पर कोई नहीं था।उसके घर पर भिड़े अंकल भी नहीं थे।तो वो मेरे साथ आ गई और बताने लगी की उसने उसके आई बाबा की चूदाई देखी थी तो मैंने भी बताया कि मैंने भी मेरे मम्मी पापा की चूदाई देखी है।ऐसी बात करते हुए हम लोग चूदाई करने लगे।तब दया बताती हैं कि ये तुम लोगों ने ठीक नही किया।भिड़े भाई को पता चले गा तो वो आगबबूला हो जाएंगे।तुम लोगों किसी को बताना नही और थोड़े दिन के लिए तुम सोनू से दूर ही रहना।

फिर वो अपनी मां से बात करने लगी और उनको यहां बापूजी से संबंध रखने के लिए राजी करती हैं और उसे आज रात्रि को निकल के कल आने को बोलती है। मगर उसकी मां सुबह निकल कर आम को आने को तैयार होती हैं।रात को जेठालाल सोडा पीकर आता है और दया के पास जाकर बैठ जाता हैं और बोलता है कि क्या तुम आज इतनी चिंता में हो।दया टपु वाला किस्सा पूरा सुना देती है और बोलती हैं की अब क्या होगा? नालायक टपु ने ऐसा किया? में उसकी अभी खबर लेता हूं।आप ऐसा मत कीजिए।वो दोनो ने अपने मां बाप की चूदाई देख कर ही चूदाई की है।कल बापूजी को आने दो फिर उससे सलाह मशवरा करके बात करते हैं।फिर वो अपनी मां आने वाली है वो भी बात करती हैं।तब जेठालाल बोलता है कि अच्छा हुआ बापूजी के लिए चूत की  व्यव्स्था हो गई।क्या नसीब पाया है,बाप के लिए भी चूत मिल गई और बेटे ने चूत ढूंढ ली।अगर सब साथ मिल जाए तो घर में ही मज़ा आ जाएगा।तब दया बोली कि क्या बोल रहे हो।ऐसा मज़ा ठीक नही। फिर जेठालाल दया की चूदाई करके उसको बाहों मे भर कर बोलता है यही स्वर्ग का सुख प्राप्त होता हैं।

दुसरे दिन जेठालाल दुकान जाके अपनी सास को लेने के लिए रेलवे स्टेशन जाता हैं।वो उसकी सास को लेकर घर चला गया।उसकी सास निरूपा रॉय जैसी लगती थी।दया अपनी मां को देख कर खुश हो गई और दोनो एक दूसरे से लिपट गए।दया अपनी मां का सामान रखवा कर अपने रूम में ले गई और उसको फ्रेश होने को बोल कर बाहर निकल गई। इतने में बापूजी आ जाते हैं तो जेठालाल बताता है कि दया की मां आई है।फिर बापूजी अपने रूम में जाते हैं।थोड़ी देर बाद टपु आ जाता हैं और सब रात का खाना खाने के डाइनिंग टेबल पर बैठ गए।उसी वक्त टपु बताता है कि वो आज पिंकू के घर सोने वाला है।तो दया उसे हां बोलती हैं।खाना खाने के बाद सब टीवी देखते हैं और जेठालाल सोडा पीने लिए निकलने वाला था तब दया बोली आज आप मत जाइए हमें टपु के बारे में साथ में बात करनी है।

चारों दया के बेड रूम में जाते हैं और बेड पर बैठ जाते हैं।दया और दया की मां साथ में थी और बापूजी और जेठालाल साथ बैठे थे।दया टपु और सोनू की चूदाई की बात बता देती हैं और पूछती हैं कि अब क्या करना चाहिए।चाचाजी बता ते हैं कि इस जमाने में ये सब आम बात हैं तो भिड़े और माधवी को कल बुला कर मना लेना अब आप लोगो ने साथ में चूदाई की है तो वो समझ जाएगा इस में गभरा ने वाली बात नहीं है।इतने में जेठालाल बोलता है आज हम सब साथ मिल कर यहीं सो जाते हैं।क्या कहती हो सासुमा?दया बोलती हैं कि हां आज रात हम चारों मिल कर मजा करते हैं,क्या कहती हो मां? चाचाजी बोले कि क्या बोलती हैं समधनजी? दया की मां बोलती हैं जैसा आप लोग को ठीक लगे।जेठालाल बोलता है कि मैं सासुमा की चूदाई करूंगा और बापूजी दया को चोदेंगे। दूसरी बार बापूजी समधन को चोद देंगे।क्या बोलती हो दया?दया हा बोलती है और वो बापूजी के पास चली जाती हैं।और दया की मां के साथ जेठालाल चला गया।जेठालाल ने पहल करते हुए सासुमा को अपने सीने से लगा लिया और उसके होंठ पर अपने होंठ रख कर किस करने लगा।दूसरी ओर दया बापूजी से लिपट गई और बापूजी को नंगा कर दिया। जेठालाल ने सासु की साड़ी उतार दी और वो ब्लाउज और पेटीकोट में आ गई। जेठालाल खुद नंगा हो गया और सासु के बाकी कपड़े निकाल कर उसे सुला देते हुए कहा की मम्मी जी आपकी चूंचियां तो दया से भी बड़ी हैं और निपल भी बड़ी बड़ी हैं।वो सासु मां पर बैठ गया और चूंचियां मसलने और चूसने लगा।इधर बापूजी ने भी दया को नंगा कर के उस पर बैठ कर चूंचियां मसलने लगा और मुंह में लेकर चूस ने लगा।दोनो मां बेटी की सिसकारियां बाप बेटे निकालने लगे।जेठालाल सासु मां पर से नीचे उतर कर उसके पांव चौड़ा कर के बीच में बैठ कर सासु मां की चूत चूसने लगा।उनकी चूत गीली हो चुकी थी।सासु मां बोली कि दामाद जी धीरे से करिए।कई साल से चूत में लन्ड नहीं गया है।जेठालाल चूत में जीभ डाल के चूत में घुमाता है और चूत के दाने को हाथ की उंगलियों से मसल ने लगा। इससे सासुमा उत्तेजित हो कर अपने कूल्हे ऊंचकाने लगी और जेठालाल के मुंह पर चूत ले जाने लगी।थोड़ी ही देर में चूत पानी छोड़ देती हैं और निढाल होकर कर शांत हो गई।अब जेठालाल ने चूत के होंठ को फ़ैला के लन्ड का सुपाड़ा  चूत के सेंटर पर रख कर धीरे धीरे अंदर डाल ने लगा। सासु मां की चूत में बहुत दिनों से लन्ड नहीं गया था इसी लिए सिकुड़ गई थी तो लन्ड पर पकड़ ज्यादा महसूस होने लगी।फिर भी जेठालाल ने थोड़ा ज्यादा जोर लगा कर चूत में पूरा लन्ड घुसा दिया जिसे सासु की जोर से आह निकल गई।जेठालाल थोड़ी देर चूत में लन्ड डाल कर ही पड़ा रहा और चूंचो के साथ खेलने लगा। थोड़ी देर बाद जब सासु मां ने कूल्हे हिला ना शुरू किया तो जेठालाल ने लन्ड अंदर बाहर करना शुरू कर दिया।

दूसरी ओर दया और बापूजी उलट गए और दया बापूजी का लन्ड चूसने लगी और बापूजी दया की चूत पर मुंह रख कर जीभ से दया की चूत को चोदने लगे और अंगुली से दाने को रगड़ ने लगे इससे दया को डबल मज़ा आने लगा और जोर से सिसकारियां भरने लगी।दया ने बापूजी के लन्ड से एक बार पानी निकाल कर लन्ड साफ कर के सिकुड़ा हुआ लन्ड फिर से चूसने लगी।थोड़ी देर चूसने के बाद फिर से लन्ड खड़ा हो गया।बाद मे दया बोली बापूजी अब आप लंबे समय तक मुझे चोद पाएंगे।अब चाचाजी खड़े होकर दया के पांव के बीच में बैठ कर अपना लन्ड दया की चूत पर रख कर धक्का लगा दिया और आधा लन्ड घुस गया और फिर से एक बार धक्का लगा के लन्ड को जड़ तक घुसा दिया और दया के शरीर पर लेट के चूंची दबा दिया और चूसने लगे।फिर दया की चूत में लन्ड अन्दर बाहर करने लगे और गति बढ़ा ने लगे।

दोनो बाप बेटे मां बेटी को चोद रहे थे।कमरे में फच फच की आवाज के साथ थप थप की आवाज सुनाई दे रही थी उसमे मादक सिसकारियां भी सुनाई दे रही थीं। थोड़ी देर में दया की मां बोली:दामादजी आपने मुझे सातवें आसमान पर पहुंचा दिया,इतना माझा कई सालों बाद मिला,दया बेटी,ये सब तेरी वजह से हुआ, भगवान तूझे ऐसा सुख सदा देता रहे और तु चुदवाती रहे।और सासु मां की चूत ने पानी छोड़ दिया और जेठालाल के लन्ड को भिगो दिया।जेठालाल ने गति कम करदी और सासु मां पर पड़ा रहा। दूसरी ओर बापूजी दया की चूत में झरने के कगार पर पहुंच गए तो दया ने उसे रोक दिया और बोली,बापूजी आप मेरी मां को चोदो और टपु के पापा आप मुझे चोदीये।दोनो मर्द अपना स्थान बदल दिया और चूत साफ करने बाद चाचाजी समधन को चोद ने लगे और जेठालाल दया को।फिर से दोनो बड़ बड़ाने लगी।दया बोलने लगी की आज तो तुम मेरी चूत को फाड़ ही दोंगे मगर मैं तुम्हारे लन्ड के चिंथड़े उड़ा दूंगी।उधर दया की मां बोली की समधीजी भी मुझे स्वर्ग लोक में सैर करा रहे हैं। हाय कितना मजा आ रहा हैं,अब मैं फिर से झर ने वाली हूं, हैईईई मैं गई समधिजी और दया की मां ने चाचा जी को जकड़ लिया और चाचाजी भी झर गए और वो भी जोर लगा के समधन की चूत में पूरा पानी छोड़ दिया।वो भी समधन को चिपक कर सो गए। बाद मे दया और जेठालाल भी साथ में झर गए और एक दूसरे से चिपक कर सो गए।सुबह पांच बजे चंपक चाचा की नींद खुल गई और उसने देखा कि समधन भी जाग रही हैं।समधन को किस करके चाचाजी ने गुड मॉर्निंग किया और बोले की कल की चूदाई कैसी लगी,साथ साथ चूदाई करने में कैसा लगा।तो दया की मां बोली की इतना मजा जिंदगी में पहली बार आया और सेक्स में ऐसा मज़ा ले सकते हैं ऐसा कभी सोचा ही नहीं था।बेटी के सामने ही उसके पति से मां चूद ती हैं,बाप के सामने बेटा मां समान सास को चोदता है और तो और बाप भी बेटी समान बहु को चोद रहा हैं, मां भी बेटी के सामने चूदती हैं,बेटी भी मां के सामने ही चूदवाती हैं,ये सब सोच कर ही उत्तेजित हो जाती हूं।एक ही रात में ये सब देख लिया।इतने में दया और जेठालाल उठ जाते है और दया अपनी मां से पुछती हैं कि कैसा रहा,आपको मजा आया था या नहीं।तब दया की मां बोली कि मैं समधीजी को, की एक रात में लग्न जीवन में होने वाली कभी कभी बोरिंग चूदाई इतना मजेदार बन शक्ति है ये बता रही थी और हमारे जैसे अकेले स्त्री या पुरुष साथी न हो तो बच्चे उसका कैसे खयाल रख सकते हैं वो भी किसी भावनात्मक लगाव के बिना। इससे किसी को कुछ पता नहीं चलता, समाज में बदनामी नहीं होती और घर की बात घर में ही रहती हैं।

तब दया बोलती हैं कि अभी सुबह के साढ़े पांच बजे हुआ है और क्या एक बार चूदाई हो जाए?तब दया की मां बोली कि नहीं नही तुम और दामाद करो,मुझे अभी आराम चाहिए क्या कहते हैं समधीजी?तो चाचाजी बोले कि जैसे आप की इच्छा।तो जेठालाल और दया चूदाई में लग गए और दोनों की चूदाई की आवाज गूंजने लगी।ये देख कर दया की मां भी उत्तेजीत हो गई और चाचाजी के लन्ड को हाथ से सहलाने लगी।चाचाजी ने भी अपना हाथ समधन की चूत पर रख कर मसल ने लगा और थोड़ी देर में दया की मां की चूत भी गीली हो गई।ये देख कर चाचाजी ने समधन को सुला दिया और उसके पैरों के बीच आकर पैरों को चौड़ा कर के अपना लन्ड घुसा दिया और दया की मां पर सो गए और चूंचियां मुंह में लेकर चूसने लगे।दया की मां ने भी कमर हिलाना शुरु किया और लुंड का स्वागत किया।फिर से दोनो बाप बेटे मां और बेटी को चोदने लगे।थोड़ी देर बाद चारों झर गए और एक दूसरे से चिपक कर सांसे तेज तेज लेने लगते हैं।सबकुछ सामान्य होने के बाद जेठालाल और दया बाथरूम में जाकर चूत और लन्ड साफ कर ने लगे और उनको चूम कर बाहर आ कर कपड़े पहन लिए।चाचाजी और दया की मां भी बाथरूम में गए और साफ सफाई करके बाहर आ गए और कपड़े पहन लिए।दया और उसकी मां बाहर निकल कर काम में लग जाते हैं और चाचाजी अपने रूम में जाते हैं और सो जाते हैं।जेठालाल भी अपने रूम में सो गया।

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कहानी पूरी पढ़ने के लिए धन्यवाद।

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