ट्रेन में मां के साथ कश्मकश (भाग 1)

ट्रेन में चुदाई – ट्रेन में मां के साथ चुदाई की कहानी. रेलगाड़ी में चूत चुदाई की कहानियाँ, रेल में मां को चोदा ट्रेन में चुदाई 2022.

ट्रेन में मां के साथ कश्मकश (भाग 1)

दोस्तों यह कहानी तब की है जब हम शहर से हमारे गांव भागलपुर जा रहे थे. हमारी एसी टिकट थी और एक ही कंपार्टमेंट में थी. जहां एक रूम होता है और 4 सीटें होती है. मां की  नीचे खिड़की के पास वाली सीट थी और मेरी उनके सामने वाली  ऊपर की सीट थी. में मां के बारे में बता दूं मां का नाम निर्मला है. वह पेशे से हाउसवाइफ है वह घर में ही रहती है. पापा स्कूल प्रिंसिपल है उन्हें स्कूल छोड़ कर आना जाना नहीं जमता. मेरा नाम विक्की है मेरी उम्र 20  की  मैं कॉलेज में पढ़ता था मैंने दाढ़ी मूछ बढ़ा ली थी और 25 का लगता था. मां सांवले रंग की थी उनकी उम्र 40 थी लेकिन देखने में 38 की लगती थी. वह मस्त  गदराये बदन की थी  उनके  आम और उनकी गांड की  गोलाई मस्त थी. वह बहुत  सेक्सी दिखती थी उनकी आंखें नशीली थी. उनकी आंखों में अगर कोई देख लेता तो वह  जन्मों का भूखा और हवशी हो जाता. उनको साड़ियां पहनना पसंद था ब्लाउज में तरह-तरह के  स्टाइल पहनती थी. आज उन्होंने  डीप नेक वाला काला ब्लाउज पहना था और हरी साड़ी पहनी थी.  वह ट्रेन में बैठ कर  मोबाइल पर गाने सुन रही थी और मैं ऊपर बैठा गेम खेल रहा था. मैंने देखा ऊपर से मां की गली बहुत मस्त दिख रही है इतना तो चलता है. औरत कोई भी हो रिश्ते से अगर  वह बात है तो दिख ही जाता है.

करीब 2 घंटे बाद हमारे यहां एक कपल आया शायद उनकी नई नई शादी हुई थी. पूछने पर पता चला वह  बीवी को मायके से लेने आया था अब वह दोनों ससुराल जा  रहे थे. अब दोनों की काफी हरकतें चालू हो चुकी थी बातें करना  एक दूसरे को टच करना. मां यह सब देखकर  शर्मा रही थी शायद उनको अपने दिनों की याद आ रही थी. मैंने मां को होंठ चबाते हुए देखा और जब किसी की नजर नहीं थी तो मां ने साड़ी सेट करने के बहाने   चुत खुजाई जैसे ही मेरी तरफ़ देखा मैं यहां वहां देखने लगा.अब मुझे उनकी हरकतें मां के ऊपर लगे हुए शीशे में साफ दिख रही थी. तभी मुझे उसके पति ने उन्हें देखते हुए देख लिया.

तभी मुझे उसने इशारा कर बाहर आने को कहा मैं आ गया और वो भी पीछे आ गया.तो उसने कहा भाई नई नई शादी हुई है तुम ऐसा करोगे तो कैसे चलेगा.मैने कहां सॉरी तो उसने कहा it’s ok. अरे मुझे कंट्रोल नहीं होता और सामने जो औरत बैठी है मेरी पत्नी उसे समझा रही है तू  समझ गया तो मेरा एक काम करेगा तू उनके साथ बैठ जा उनको कंपनी दे हम यहां लाइट बंद कर के आते हैं.मेरा स्टेशन आने को अभी  5   6 घंटे हैं उसके बाद मुझे घर पर ऐसा मौका 4   5  दिन नहीं मिलेगा. भाई मान जा.क्या पता अगर उस आंटी ने तुझे चांस दिया तो कुछ भी हो सकता है. मजे लेले. मैने उसे कहा ठीक है.

तो कुछ देर बाद हम अंदर आए तो मैं ऊपर न ना जाकर मां के बगल में ही बैठ गया.तो मां ने कहा उनको privacy चाहिए तू यहीं मेरे साथ बैठ जा. उन्होंने पूछा लाइट बंद करें हमने कहा हां कर दो उसके बाद अंधेरे में में और मां एक दूसरे से सट कर बैठे थे.अब हमें कुछ दिखाई तो नहीं देर रहा था पर उनकी हरकतों की आवाजें आ रही थी.उनकी चूमने की आवाज और उस लड़की का सिसकना मेरा  लंढ त्न गया था. मेरा हाथ मां की तरफ था मुझे लग रहा था मां मम्मों से मेरी कोहनी पर दबाव डाल रही है. इतने ममें मां का फोन आया लाइट जली हमने देखा उपरसे वो औरत नंगी थी वो आदमी उसकी गोदी में बैठा उसके मम्में चूस रहा था. मां ने हड़बड़ा के फोन कट किया और फोन ब्लाउज में डाल लिया और जैसे ही हाथ नीचे किया मेरी जांघों पर  रखा लंढ के करीब ना जाने क्यों मां ने हाथ सरका के लंढ पर रखा और मेरे खडे हुए लंढ को महसूस करने लगी. मां लंढ को  भांप रही थी उन्होंने लंढ को पकड़ने की कोशिश की शायद उन्हें पता चला के यह मेरा लंढ है तो उन्होंने झट से हाथ हटा लिया.

अब मेरा पारा चढ़ गया था मैंने हाथ पीछे लेकर मां की कमर पर का और वहां से हाथ मां के पेट पर मसलने लगा. मां बोली बेटा यह क्या कर रहा है. मैंने बोला क्या. तो मां कुछ नहीं बोली. अंधेरे में मां ने वापस मेरे लौड़े पर हाथ रखा इस बार उन्होंने उठाया नहीं जैसे के इशारा दे रही थी चलो हम भी कुछ करते हैं. तो मैं एक हाथ मां के मम्मों पर रखा और मसलने लगा तो मां मेरे कान में धीरे से बोली बेटा यह गलत है. मैने मां के कान में कहा छोड़ो ना मां किसे पता चले गा प्लीज मां करने दो ना बस एक बार मैं इसके बाद ना मांगूंगा ना किसी से कुछ कहूंगा. मै ऐसे कहते कहते मां के कान और उनकी गर्दन को चूमने लगा. उनकी सांसें धीरे धीरे ऊपर नीचे हो रही थी माहोल में गर्मी बढ़ रही थी मैं मां का ब्लाउज खोलने लगा मां ने मेरा हाथ पकड़ा मैं ने एक एक कर के ब्लाउज के सारे हुक खोल दिए. ब्लाउज खुल चुका था और मां का हाथ अभी भी मेरे हाथ पर ही था मैं समझ गया था मां गरम है यही मौका है हथौड़ा मरने का.

अब मैं मां की साडी ऊपर खींचने लगा मां ने फिर मेरा हाथ पकड़ लिया लेकिन इस बार उन्होंने रोका नहीं मैंने साड़ी ऊपर की ओर मां की जांघों पर हाथ फेरने लगा. मां की सांस तेज़ थी हम्मम हम्म की आवाजें जा रही थी मैं चूत पर गया और चड्डी के ऊपर हाथ फेरने लगा. चड्डी गीली सी लगी इस लिए मैंने अंदर हाथ डाला शायद मां ने 2  3 दिन पहले ही  चूत साफ की थी छोटे छोटे बाल आए हुए थे क्या फील था उसपर हाथ फेरने का. मुझे उनकी चूत के होंठ समझ नहीं आ रहे थे यह मेरा पहली बार था किसी की चूत  को टच करना. उन्होंने मेरा हाथ पकड़ कर अंदर घुसाया मेरी उंगली पकड़ कर चुत के होल के अंदर डाल दी और इशारे से अंदर बाहर करने को बोली.मैने हाथ निकाला और अब दो उंगलियां डाल कर अंदर बाहर करने लगा. तब तक सामने वाली सीट पर चूदाई चालू हो चुकी थी पच पच धक्कों की आवाजें आ रही थी. मैं उठ कर अपनी पेंट निकल नंगा हो गया और वापस मां के पास बैठ कर उनकी चड्डी निकलने लगा. पर मां पहले ही चड्डी निकाल टांगें फैला लेटी हुई थी मैं मां के ऊपर लेट गया. मां ने मेरा लंढ पकड़ चुत पर सेट किया और धक्का मरने को बोली जैसे लंढ अंदर गया मां की चीख निगल गई sssshhhhhh आराम से बेटा. फिर दो तीन धक्कों  में मां नॉर्मल हो गई अब लंढ आसानी से आ जा रहा था.

अब हम भी पच पच की आवाज़ें करने लगे मां गांढ उठा उठा कर चूदवा रही थी. अब मैंने मां के मम्मे चूसने को हाथ ऊपर किए तो वो नंगे थे मां ने ब्रा पहले से ही ऊपर कर ली थी. तो मैं बुरी तरह से मम्मे चूसने लगा और काट भी रहा था. मां ssss oofffff काट मत बेटा सिर चूस और ऐसे ही धक्के मरते मरते मैं मां के अंदर झड़ गया मां भी मुझे कस के पकड़ कर झाड़ गई. हमने अपने आप को संवारा मैंने मां की चड्डी अपनी जेब में छुपा ली थोड़ी देर ऐसे ही एक दूसरे के साथ लेटे रहे. एक स्टेशन आया तो खिड़कियां खटखटाने लगी चाय चाय. तो पास की सीट वाले उस आदमी ने भी चाय ली और मेरी मम्मी ने भी चाय ली वो मुझे देख कर हस रहा था तो हम बाहर गए पानी लेने के बहाने. बाहर आकर वो मुझे बोला भाई सही खेल गया तू तो क्या माल बजाया है. और वैसे एक बात बोलूं यह मेरी बीवी नहीं है मेरी बड़ी बहन है. में शॉक्ड हो गया मैंने कहा चल झूठे ऐसा कहां होता है. क्यों नहीं होता आज तूने क्या किया तुझे क्या लगा मुझे पता नहीं चलेगा जिसको तूने चोदा वो कोन है. मैने बाहर के पोस्टर पर तुम्हारे नाम पढ़े थे अब मेरी बोलती बंद हो गई मैं उदास हो गया यह मुझसे क्या हो गया.तो वो बोला भाई टैंशन क्यों लेता है साले मजे ले इतना बड़ा कांड किया है तूने. ऐसे होता है हर फैमिली में बस कोई बताता नहीं अब मुझे ही देख ले अपनी बहन को बीवी की तरह चोदता हू.

अभी मौका है हम लोग तो एक और शॉट मरने वाले हैं जहां से जाने से पहले. अब तक मेरी बहना ने तेरी मां का दिमाग सेट कर दिया होगा. अब तुझे जब चाहे चुत मिलेगी नहीं भी मिली तो अब मौका है जो चाहे वो करले. फिर हम ट्रेन में चढ़ गए मां और उस लड़की की बातों से लग नहीं रहा था के उनका कोई डिस्कशन हुआ था हंसी मजाक चल रहा था. फिर टीसी टिकट चेक करने आया फिर उस आदमी ने बोला लाइट बंद करदू कोई आपत्ती तो नहीं आपको. मैं हस कर बोला जी जरूर जरूर. फिर मैं ऊपर बर्थ पर जाने लगा तो मां बोली बेटा कहां जा रहा है यहीं मेरी बगल में सो जा. अब मैं बाहर की तरफ सो रहा था और मां अंदर की तरफ सीट पर जगह काम पड़ रही थी इस लिए हम चिपक कर सो रहे थे. अब यह लोग वापिस से शुरू हो चुके थे उसकी चूड़ियों की आवाज गूंज रही थी. मैं सोच रहा था अब क्या होगा अब आगे क्या करू तभी मां की हरकतें शुरू हो गई  मां अपनी गांढ को मेरे लंढ पर रगड़ने लगी. मैं करना नहीं चाहता था लेकिन इस बार मां सामने से मौका दे रही थी मां ने मेरा हाथ पकड़ अपने पेट पर घुमाते घुमाते अपनी चूत पर रखा. मां ने अपनी साड़ी ऊपर कर ली थी और एक हाथ से मेरी पेंट उतरने की कोशिश कर रही थी.

मैने उठकर अपनी पैंट उतारी और मां मेरा लंढ पकड़ हिला हिला कर टाइट कर रही थी. मां मूड में थी अब मां मेरी तरफ मुंह कर मेरे ऊपर आने को चाह रही थी तो मैं मां को मेरे ऊपर खींच लिया. अब मां ने अपनी ब्लाउज उतरी मां ऊपर से नंगी थी और मां ने मेरे भी कपड़े उतार दिए मैंने भी जोश मैं मां की साड़ी उतार दी और मैं मां के नीचे था और वो मेरे ऊपर. मां मुझे दूध चुसवा रही थी और मेरे लंढ को मां चूत में लेकर खुद ऊपर नीचे करने लगी मैं नीचे से धक्के दे रहा था ऐसे ही चुदाई हुई हम दोनो झड़ गए. मामेरे ऊपर नंगी ही सोई रही हमें जो कंबल दिया था उसमे ही हम दोनो सोए रहे. सुभा अचानक उन दोनो ने हमें जगाया उनका स्टेशन आ गया था हमने कुंडी लगाई. हम ऐसे ही नंगे बैठे थे मैने पहली बार मां का नंगा गोरा बदन देखा था.

मां मुझसे चिपक कर सोई थी.

हम एक दूसरे को देख रहे थे मां ने मुझसे कहा विकी बेटा देख जो ट्रेन में हुआ वो किसी को पता नहीं चलना चाहिए. और यह सब यहीं पर हुआ. ट्रेन से उतरने के बाद गलती से भी नहीं होगा. ना हीं मेरी तरफ से ना ही तेरी तरफ से ओके. मैने मां को ओके कहा और उनके दूध चूसने लगा मां मेरे बालों में हाथ डाल सहलाने लगी मेरी एक जांघ मां की जांघो के बीच गई मुझे चूत की गर्मी महसूस हुई में मां की चूत में लौड़ा घिसने लगा. मां कुछ नई बोली मैने मां को कहा मां अभी ट्रेन से उतरने में दो घंटा बाकी है क्यू ना एक आखिरी बार और हो जाए. मां हंसी और बोली बदमाश मुझे पता था तू इतनेमें नहीं मानेगा तब हमने किस करना चालू किया.अब मैं मां को चूमे जा रहा था चूसे जा रहा था यह आखरी मौका था. मां लंढ हिला रही थी मैंने मां को चूसने को कहा मां खड़ी हुई और मेरा लंढ चूसने लगी क्या मजा आ रहा था मैने मां को सीट पर बिठाया और उनके पैर फैला कर चूत चाटने लगा.

अब मैं मां को गोद में बिठा कर चोद रहा था. फिर मां को खिड़की के पास डॉगी स्टाइल में चोदने लगा मां खिड़की की सलाखों को पकड़ कर गांढ उछाल उछाल कर लंढ अंदर ले रही थी. क्या माहोल था मां का ऐसा जंगली रूप रात को भी नहीं था मैं मां को खड़ा कर झुका के पीछे से चोद रहा था. मैने मां को नीचे बिठाया और उनपर अपने माल की बरसात कर दी और मां का सारा बदन अपने माल  से भर दिया. दोनो हांफते हांफते एक दूसरे के ऊपर सो गए अब मुझे मां को और चोदना था लेकिन मां जुबान की पक्की थी वो मुझे ट्रेन के बाहर कभी चोदने नहीं देती. तो कैसे मैं मां को पटाया और अगली चुदाई कब की पढ़िए इसके दूसरे भाग में।

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