सई बाबा और एक वैश्या की कहानी – Life Changing Story

सांई विरोध में मुहिम चला रहे स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के विवादित बोलों का सिलसिला नहीं थम रहा है। अब उन्होंने साईं को वैश्या पुत्र बताया है। बुधवार को जिला मुख्यालय से सटे लूघरवाड़ा में एक प्रेस कांफ्रेंस को संबोधित करते हुए उन्होने ये बात कही।  
वैश्या पुत्र साईं
सई बाबा और एक वैश्या की कहानी - Life Changing Story

स्वामी स्वरूपानदं सरस्वती के विवादित बोलांे का सिलसिला जिला मुख्यालय में भी जारी रहा। उन्होंने इंटरनेट का हवाला देते हुए कहा कि साईं के पिता बदरूद्दीन अफगानिस्तान से आए थे और अहमद नगर में एक  वैश्या के साथ रहने लगे जिससे उन्हें दो संतानें हुईं। जिनमें से एक था चांद मिंया उर्फ सांई।  हांलाकि उन्होंने यह स्पष्ट किया कि यह बात वे खुद नहीं कह रहे है बल्कि इंटरनेट में इस तरह की बातें लिखी गई हैं। 

सफाई देते नजर आए
स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती इस प्रेस कांफ्रेस में अपने पहले के बयानों पर सफाई देते नजर आए। उन्होंने उमा भारती की नाराजगी पर पूछे गए सवाल के जवाब में कहा कि उमा भारती उन्हंे मानती हैं। उनका कहना था कि वे हिंदू समाज को बचा रहे हैं, बांट नहीं रहे। उन्होनंे कुछ तस्वीरें दिखाई जिसमें विष्णु का विराट रूप था। इस तस्वीर में विष्णु की जगह साईं दिखाए गए थे। शंकराचार्य का कहना है कि इस तरह की तस्वीरंे दिखाकर लोगांे को बरगलाया जा रहा है। कलयुग में विष्णु के दो ही अवतार होने हैं उसमें चांद मियां का कही जिक्र नहीं है। 
हमारे राम हमारी गंगा
स्वामी स्वरूपानदं सरस्वती ने अपने गंगा स्नान वाले बयान का बचाव करते हुए कहा कि जो शिर्डी नहीं जाता है उसके ही राम, उसके ही तीर्थ और उसकी ही गंगा है। उन्होंने यह कहा कि यदि साईं सब कुछ कर रहा है तो उसके भक्तों को गंगा, तीर्थ जाने की जरूरत क्या है। साईं के चमत्कारों पर स्वामी स्वरूपानदं का कहना है कि वे ईश्वर को मानते हैं और सिर्फ ईश्वर ही कर्मो का दंड दे सकता है। यदि कर्मो का दंड देने वाला न रहे तो कानून का डर किसे होगा। चमत्कार के पीछे दौड़ने की जरूरत नहीं है। पहले स्कूलों में धर्म की शिक्षा मिलती थी जिससे बच्चांे को धर्म का ज्ञान हो जाता था। अंग्रेजों के शासन में भी यह जारी रहा। अब धर्म की शिक्षा बंद हो जाने से बच्चों को संस्कार मिल ही नहीं रहे वे धारावाहिक देखकर सांई को मानने लगे हैं। 
पहले भी उठाया मुद्दा
स्वामी स्वरूपानदं सरस्वती  ने कहा कि वे बहुत पहले से यह मुद्दा उठाते रहे हैं लेकिन पहले मीडिया सरकारी हाथों में था जिसमें उनकी खबरें नही दिखाई जाती थी। उन्होंने यह भी कहा कि वे किसी धर्म विशेष के खिलाफ नहीं है न ही किसी धर्म के खिलाफ कभी कोई बयानबाजी की है। साईं के उपासक पहले अपने धर्म के बारे में स्पष्ट करंे। यदि वे हिंदू हैं तो हिंदू धर्म में व्यक्ति पूजा नहीं की जाती। चूंकि साईं इंसान था इसलिए वैदिक धर्म के अनुसार उसकी पूजा नहीं की जा सकती।
उठा काले धन का मुद्दा
स्वामी स्वरूपानदं सरस्वती का कहना है कि शिर्डी में जो चढ़ावा चढ़ रहा है वह काली कमाई का पैसा है। जो हिंदुओं को ठग कर वसूला गया है। उन्होंने सवाल किया कि बजाय शिर्डी में पैसा चढ़ाने के लोग गरीबी, अशिक्षा आदि के लिए दान करंे। उन्होंने बताया कि उनके विभिन्न् आश्रमों में लोगांे के लिए शिक्षा, खाने-पीने, नेत्रालय और रोगियों को मुफ्त दवाई के इंतजाम हैं। उन्होंने मीडिया से कहा कि आप उन लोगांे का विज्ञापन करते हैं इसलिए पैसा आता है। मेरे पास विज्ञापन के लिए पैसा नहीं है।
मानें या न माने लोग
 स्वामी स्वरूपानदं सरस्वती ने कहा कि उन्होंने लोगों को सिर्फ सनातन धर्म से जुड़ी जानकारी दी है अब मानना या न मानना लोगों के ऊपर है। स्वरूपानंद ने वेदों का हवाला देते हुए कहा कि मरते समय जो चीज दिखती है उसी के अनुसार अगला जन्म निर्धारित होता है। इसलिए लोगों को घर में सांई की मूर्ति नहीं रखनी चाहिए। 
भंडारे में मांस
साईं भक्तों द्वारा हर गुरूवार को भंडारा आयोजित किए जाने पर स्वामी स्वरूपानदं सरस्वती के  तेवर तल्ख नजर आए। उनका कहना था कि भंडारे में जो पुलाव का प्रसाद दिया जाता है उसमें लहसुन प्याज के साथ मांस भी हो सकता है ऐसे में लोग इससे बचे।
चढ़ावे का पैसा हमारा
स्वामी स्वरूपानदं सरस्वती से जब यह सवाल पूछा गया कि यदि सांई मुसलमान हैं तो क्या शिर्डी का पैसा वफ्फ बोर्ड को जाना चाहिए इस पर उनका कहना था कि पैसा हमारे हिंदू धर्म के भक्तों से ठगा गया है उनसे एकत्र किया गया है तो वफ्फ को क्यांे दें।
अगला निशाना कौन
सई बाबा और एक वैश्या की कहानी - Life Changing Story

स्वामी स्वरूपानदं सरस्वती से यह पूछा गया कि उनका अगला टारगेट कौन है तो वे कहने लगे कि एक यदि हट जाएगा तो बाकी भी हटा दिए जाएंगे। उन्होंने शिर्डी में स्थित मंदिर को मंदिर या मस्जिद माने जाने के सवाल पर टाल दिया। उनका कहना था कि वे लोगों का अंधविश्वास खत्म करना चाह रहे हैं।   

खाकी भी नतमस्तक
पत्रकार वार्ता के बाद शंकराचार्य भक्तों और पत्रकारों को प्रसाद देने लगे। लोग उनके कदमों में झुक रहे थे। ऐसे समय में कोतवाली टीआई व्यवस्था बनाते हुए खुद ही बावर्दी स्वरूपानंद के कदमों में झुक गए।

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