कंडोम वाला ब्रम्हचर्य

वो चली गई ..उसे जाना ही था ..कब तक सहती ..जीती तो सहती मरी तो भी सहा …मर तो शायद वो उसी दिन रही होगी जब मुर्दा स्वर में दाई ने बताया होगा लड़किया हुई है …बड़ी हुई होगी तो हर कदम पर उसे एहसास दिलाया गया होगा कि भाई के मुकाबले वो कमतर है ..तब भी मर गई होगी वह … हर कदम पर पल पल मरते मरते जीने की आदत पड़ गई थी तभी तो खाली शरीर लिए ऐसा शरीर जिसमें न हाड़ बचा था न मास न आँत न …लेकिन फिर भी माँ से बोली कि माँ मैं जीना चाहती हूँ .चली गई उस दुनिया में जहाँ से कोई वापस नही आता ..कैसी है वो दुनिया लेकिन इतना तो तय है कि इस जहाँ से लाख गुना बेहतर होगी वो दुनिया ..वहाँ नही होता होगा बलात्कार ..वहाँ तो कद्र होती होगी मन की नाकि शरीर की ..हिलते कपड़े के भीतर जिस्म सूँघने वाले भेड़ियों से अलग वो दुनिया …
       लेकिन जाते जाते कई सवाल खड़ी कर गई वो ..वो कई ऐसे सवाल जिन पर समाज चुप है सरकार चुप है ..शायद जानकर भी निरुत्तर हैं लोग .सवाल ये कि कब तक दुहरा चरित्र जीते रहेंगे हम ..बात कुछ करते हैं और काम कुछ ..दिल्ली के जनपथ पर दामिनी दामिनी की पुकार लगाने वाले ऐसे कितने लड़के हैं जो बलात्कार पीड़ित लड़की को अपनी बीवी बनाने को तैयार होते ..सवाल ये भी कि वो जोश में कदम उठा भी लेते तो कितनों के घर वाले इस पंसद को स्वीकार करते ..सवाल ये कि बलात्कार पीड़ित लड़की को परिवार के साथ शहर क्यों छोड़ना पड़ता है ..सवाल ये कि सरकारें तभी क्यों जागती हैं जब दिल्ली जैसे महानगर में ऐसी घटना होती है ..मध्यप्रदेश के एक गाँव में दो साल की बच्ची जिसे अभी ढंग से हगना भी नही आता उसके साथ सामूहिक बलात्कार की घटना होती है …बलात्कार में सफल न होने पर लड़की को आग की मूर्ति बना दिया जाता है तब भी मौन साधे रहता है हमारा मीडिया …बुरा न लगे तो साफ कहूँ कि अगर दिल्ली में एक कुत्ता मर जाता है तो भी खबर बन सकती है लेकिन हमारे यहाँ तीस चालीस लोगों की मौत भी सिर्फ एक छोटी सी पट्टी में समा कर रह जाती है …
       बलात्कार के बाद जो तमाशा हुआ वह तो बलात्कार से भी बदतर था ..एक तो हमारे नेता सात आठ दिन तक जनता का मूड ही नही भाँप पाए ..अन्ना रामदेव के जमाने से टी आर पी के माहौल को परख चुके हमारे मीडिया ने तो जनता की नब्ज पकड़ ली और सीधे प्रदर्शन स्थल से बुलेटिन और कव्हरेज करने लगे ..लेकिन हमारे नेता जो खुद को जनता का प्रतिनिधी कहते नही अघाते जनता को ही नही समझ पाए ..गलतियों पर गलतियाँ होती रही महामहिम से लेकर अदना मंत्री तक ..रायसीना हिल्स पर जा पहुँचे हमारे प्रदर्शनकारियों से राष्ट्रपति ने मिलने की जहमत नही उठाई ..उनकी एक मुलाकात उन्हे कहाँ से कहाँ पहुँचा देती ..देश के सवैंधानिक पद से लेकर जनता के दिलों तक लेकिन चूक गए ..चूके तो हमारे पीएम भी ..ठीक है पूछकर ..कमसे कम इससे तो अच्छी थी खामोशी उनकी ..प्रधानमंत्री गृहमंत्री से लेकर हर मंत्री अपनी बेटियों की संख्या गिनाने लगा कि मैं तीन बेटियों का बाप हूँ इसलिए दुखी हूँ ..काश ये मंत्री कहते कि वो देश की आधी आबादी को भरोसा दिलाने की कोशिश करते कि देश की सभी बेटियाँ उनकी अपनी बेटियाँ हैं ..सोनिया गाँधी मिली लेकिन कोई भरोसा नही दिला सकीं ..बात बात पर बाँहे चढाने वाले हमारे युवराज राहुल कुछ बोले ही नही ..हाँ निकट भविष्य में कहीं चुनाव नही है ना .तो हमारे विपक्ष के नेता भी कम नही ..लेदे के कई दिन बाद भाजपा ने विशेष सत्र की माँग उठा दी ..दामिनी मर तो गई लेकिन न जाने कितनों के चेहरे से नकाब उठाती गई ..लोकतंत्र के हम्माम के भीतर का नजारा सभी को दिखाती गई..शायद भारत माँ भी कह रही होगी कि उसकी भी तीन बेटियाँ है .कार्यपालिका ,व्यवस्थापिका और न्यायपालिका इनके ठीक काम न कर पाने के कारण वो दुखी है ..झूठ बोल रहे थे मनमोहन ,झूठ बोल रहे थे शिंदे साहब कि उनकी तीन बेटियाँ हैं ..सवाल ये है कि आपकी बेटियों के साथ ऐसा गलत काम कभी भी नहीं हो सकता..कभी भी नहीं….

क्योंकि आपकी बेटियों की सुरक्षा के लिए बहुत सारे पुलिस वाले 24 घंटों तक ड्यूटी देते हैं…

क्योंकि आपकी बेटियों को लोकल बस या ट्रेन में सफ़र नहीं करना पड़ता….उनके लिए लम्बी-लम्बी और बड़ी-बड़ी गाड़ियाँ होती हैं कहें भी लाने-ले जाने के लिए….

क्योंकि आपकी बेटियों को नौकरी करके अपना पेट भरने के लिए वक़्त-बेवक्त घर से बाहर नहीं जाना पड़ता…उनकी जिन्दगी में बड़े बड़े बंगलों, पार्टियों, सरकारी/ गैर सरकारी समारोहों में ही व्यस्त होती है…उन्हें कभी भी सड़कों पर वहशी-दरिंदों के बीच नहीं जाना पड़ता..

क्योंकि आपकी नातिन/ पोतियों को रिक्शा और स्कूल बस में अपने स्कूल नहीं जाना पड़ता…उनके लिए अलग से गाड़ियाँ और ड्राईवर होते हैं…

क्योंकि गुंडों को पता है की नेताओं और बड़े अफसरों और उद्योगपतियों की बहनों-बेटियों की तरफ आँख उठा कर भी देखा तो अंजाम क्या होगा…..

क्योंकि आप लोगों की दुनिया ही अलग होती है जहाँ आप लोग इन सब चीज़ों से सुरक्षित और अनजान भी….

एक कहावत है बड़ी पुराणी- कहते हैं की टमाटर की तुलना टमाटर से ही करनी चाहिए , सेब से नहीं……कम से कम हम आम लोगों के जख्मों पर नमक न लगाते ..

ये आम लोगों की माँ-बहनें हैं शिंदे जी जिन्हें आपकी माँ-बहनों की तरह “ख़ास” सुरक्षा नहीं मिली है…

अगर भरोसा दिलाना ही चाहते हैं तो इस देश की हर बहन -बेटी को ये भरोसा दिलाते और वचन देते उन्हें की जब भी कोई उन्हें छेड़े तो वो भरोसे के साथ एक बात सामने वाले दरिन्दे से कह सकें की-

” मैं इस देश के गृह मंत्री,प्रधानमंत्री की बहन / बेटी हूँ” .. .
       बोलने को तो कई बोले .हमारे सांसद बोले कि पाउडर मेकअप करके रात में डिस्को में जाते हैं जिस पर उनकी बहना ने फौरन ही माफी माँग ली .हाँ फेसबुक ट्वीटर पर जरुर एक स्वर चहका.कि राष्ट्रपति ने सत्रहवी सदी के बेटे और इक्कीसवीं सदी की बेटी को कैसे एक साथ पाला होगा …
       संस्कार के कई सवाल भी उठा गई वो निर्भया ..किसी प्रदर्शनकारी ने लिखा कि मेरी स्कर्ट से छोटी तेरी नजर है .एक विधायक ने कहा कि स्कूलों में स्कर्ट पर रोक लगे .सवाल उठे तो गलत सलत उठते ही गए ..लेकिन किसी ने नही कहा कि हाँ कपड़े शरीर ढँकने के लिए होते हैं दिखाने के लिए लेकिन भीड़ के शोर के आगे भला कौन बजाता अपनी बीन ..काश कोई कह देता कि हाँ चलो आप नंगे हो जाओ हम ही नजर झुका लेते हैं लेकिन कौन बनता कोप भाजन .कौन समझाता कि यदि नंगा होना ही आधुनिकता है तो फिर तो हमारी भैंस इंसानों से लाख गुना आधुनिक है ..
       स्वर उठे तो लोग लगे कोसने ..खबर का हिस्सा बनने की कवायद ..किसी ने कहा कि माँ बाप बच्चों को संस्कार नही देते .दूध को गालियाँ दी जाने लगी .. यार लोग फोकट की बातें करते रहे  दामिनी के बहाने मसन कि माँ बाप लड़कों को क्या शिक्षा देते हैं जो बलात्कार करते हैं …बकवास का एक क्रम चालू हुआ तो चलता ही जाता है ..कोई माँ बाप अपने बेटों को नही कहता कि जाओ छेड़ो ..बलात्कार करो ..बस ऐसा फिल्मों में होता है कि मुख्य विलेन का लड़का खुलेआम बलात्कार करता है और विलेन उसे शाबासी देता है …हाँ फिर इसका अंजाम भी बुरा ही होता है ..कृपया सार्थक चर्चा करें और बाप को न कोसें ना हि माँ के दूध को गाली दें …उन आरोपियों की माँ और बाप से जब पत्रकारों ने पूछा तो उनका एक ही जवाब था कि अगर ऐसा किया है तो सजा मिले …यही है मदर इंडिया ….लेकिन किसी ने इसे हाइलाइट नही किया ..
       किसी ने हमारी संस्कृति पर ही सवाल उठा दिए कि हम बच्चियों की पूजा करते हैं लेकिन उनकी हत्या कोख से लेकर बाद तक करते रहते हैं .किसी ने ये नही कहा कि हमारी संस्कृति में नारी का दर्जा ऊचाँ रहा है बस हम भूल गए हैं .किसी ने नही कहा कि यार हमारी संस्कृति में बलात्कार के बाद महिला का दर्जा नही छीना जाता था .उसे दुत्कारा नही जाता था .अगली माहवारी के बाद उसे पवित्र मान लिया जाता था .एकाध उदाहरण को लेकर राम से लेकर ऋषि मुनि सबको कोस लिया गया ..
कोई ये नही सिखाता कि एक पति एक पत्नी व्रत हमारी रिवायत है .ब्रम्हचर्य हमारी संस्कृति का अटूट हिस्सा है .कोई ये नही सिखाता .क्योंकि हम पश्चिम की अधी नकल में इस तरह व्यस्त हैं .हमे अब सिखाया जात है कि कंडोम का ज्ञान बचाए जान .हम एड्स सिखाते हैं लेकिन ब्रम्हचर्य नही .कुछ हुआ नही कि हम उदाहरण देने लगते हैं कि खुजराहो के मंदिरों में यौनासनों के चित्र बने हैं .लेकिन हम ये नही कहते कि मंदिरों के बाहर ऐसी मूरत इसलिए बनाई गई थी कि मंदिरों में प्रवेश के पहले आप पूरी तरह से हर मनोकामना मनोविकार से खाली हो जाओ फिर प्रवेश करो लेकिन नही हमें तो बस बोलना है ..
सवका चरित्र खुल गया .पब्लिक से लेकर पुलिस तक का ..पुलिस ने निहत्थों पर जमकर लाठियाँ भाँजी .महिलाओं बच्चों लड़कियों को तक नही बख्शा गया .सबपर जलियाँवाला बाग की तरह लाठियाँ बरसीं .लेकिन एक पुलिस वाला मर गया तो हल्ला बोल दिया गया .कमिश्नर ने तो जज को तक नही बक्शा .उन पर भी आरोप लगा डाले .जनता पर भी हल्ला बोला गया ..
और हमारे देश के भारत भाग्य विधाता लाश को लेकर सिंगापुर गए और वापस लाए ढकोसला किया गया ..फिर शुरु हुआ रुदाली का संस्करण .फिर मुआवजे का घोषणा पैंतीस लाख रुपए की घोषणा और नौकरी का आश्वासन .मेरा तो सुझाव है कि सरकार को एक नया मुआवजा मंत्रालय बना दिया जाना चाहिए .जो किसी भी घटना के होते ही तत्काल मुआवजे की घोषणा कर दे .
किस किस की बात करें .जोश चढ़ा तो फाँसी की सजा ,नपुसंक बनाने का प्रावधान कई उदाहरण दे दिए गए .किसी ने कहा कि जिस तरह बेहतर इलाज के लिए सिंगापुर भेजा गया उसी तरह से अपराधियों को साउदी अरब भेजा जाए .लेकिन ये सवाल सामने है कि अब तक लाखों केस बिना सजा के चल रहे हैं उनका निबटारा नही हो पाया है तो फिर ये नए कायदे क्या कर लेगें .वैसे भी भारत की न्याय व्यवस्था के बारे में कहा जाता है कि यहाँ अदालत की सीढिया वही चढ़ पाता है जिसके पैर लोहे के और हाथ सोने के हों .दर्जनों माननीयों पर ऐसे केस चल रहे हैं .
कई दोस्तों ने मैसेज कर कर के सिर पका दिया कि वो नया साल नही मना रहे हैं तो …क्या करें आप नही मना रहे नया साल .भैया तो क्या आपको भारत रत्न की सिफारिश करें .नही मना रहे तो मत मनाओ पर कमसे कम हमें तो अवसाद ग्रस्त मत करो ..फेसबुक पर काली बिंदी लगाने वाले कितने लोग बलात्कार पीड़ित से शादी को राजी होंगे ..नकाब सबके उतरे .भोपाल में संस्कृति बचाने का दिखावा करने वाले एक दो संगठनों ने दामिनी की मौत के चलते नए साल न मनाने देने की चेतावनी दी थी .दामिनी का नाम न होता तो कोई और वजह निकाल लेते ये ठेकेदार .होटलों से पैसा वसूलने वाले ये तथाकथित संस्कृति के रक्षक एक बार फिर आपको 14 फरवरी को दिखेंगे .बाकि समय ये लोग शीतनिद्रा में सोए रहते हैं ..
ऐसे हर मौके का फायदा उठाने वाले हमारे मद्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने वाहवाही लूटने के लिए कई तरह की घोषणाएं करके राष्ट्रीय मीडिया में सुर्खियाँ तो बटोर लीं लेकिन शिवराज यह बात छिपा गए कि मप्र में हर साल देश भर में सबेस ज्यादा महिलाएं बलात्कार की शिकार होते हैं लेकिन सजा के नाम पर सिर्फ एक प्रतिशत को ही सजा हो पाती है .पिछले आठ साल से क्या सो रही थी शिव”राज ”..बस फिलहाल इन्ही सवालों पर करें विचार अगले आलेख में फिर कुछ औऱ बात …  

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