हिंदी चुदाई कहानी

न्यू अनुभव चुदाई की कहानी – Part 06

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पर लिंग का सुपाड़ा भी इतना मोटा था के केवल थोड़ा सा ही अंदर घुसा,मुझे मेरे यौनी के किनारों पे किचाव महसूस होने लगा और दर्द भी।मैंने लिंग टिका कर हाथ हटा लिया और फिर से पहले की अवस्था मे माइक को पकड़ लिया।माइक ने इशारा समझा और अपनी कमर को मेरी और धीरे धीरे धकेलना शुरू किया।

मेरी यौनी में धीरे धीरे लिंग घुसने लगा जिससे मुझे मेरी यौनी के चारो तरफ तेज़ खिंचाव से दर्द होने लगा।मैंने बहुत बर्दास्त किया औरपूरा सुपाड़ा किसी तरह गुस गया।माइक और दबाव दने लगा पर अभी सुपाड़े का पीछे का हिस्सा थोड़ा घुसा केमुझसे बर्दास्त नही हुआ और मैंने दोनो हाथो और टांगो की ताकत से माइक को रोक लिया।माइक समझ गयाऔर उसने भी जोर लगाना बैंड कर दिया।

माइक काफी अनुभवी था इसलिए उसने कोई जल्दबाज़ी नही दिखाई,वोजानता था के कैसे किसी औरत को अपने वश में करना है।थोड़ी देर रुकने के बाद उसने हल्के हल्के सुपाड़े को हीमेरी यौनी में अंदर बाहर करने लगा।पहले तो मुझे हल्के दर्द हुए पर कुछ देर के बाद ठीक लगने लगा।माइक ऐसेधीरे धीरे और हिसाब से धक्के मार रहा था कि केवल उसका सुपाड़ा ही अंदर जा रहा था।

वैसे मैंने भी उसे रोक रखाथा इसलिए वो ज्यादा जोर लगा भी नही रहा था।माइक मुझे देखे जा रहा था और अपनी कमर हिलाते हुए लिंगअंदर बाहर कर रहा था।मेरी नजर केवल नीचे की तरफ लिंग पर थी,मैं देख सकती थी के लिंग कितना अंदर जारहा और कितना बाहर है।अभी तो 90%लिंग बाहर ही था,धीरे धीरे मुझे राहत मिली तो मैंने अपनी पकड़ थोड़ीढीली की,टांगो को भी हल्का छोड़ दिया।माइक ने भाप लिया और हल्के से जोर लगाने लगा।उसने 2धक्के हल्केमारे और तीसरा धक्का थोड़ा जोर से दिया।मैं कुहक गयी,मेरी आधी चीख सी निकल गयी और मैंने फिर से उसेहाथो और टांगो से रोक लिया।

माइक ने खुद को रोक और जितना लिंग अंदर घुसा था उतने में ही मुझे फिर सेहल्के हल्के धक्के देने लगा।मैं थोड़ी देर सिसकती रही और धीरे धीरे शांत होने लगी,करीब 5मिनट उसने मुझेहौले हौले धक्के मारे होंगे कि मेरी पकड़ फिर ढीली हुई।माइक कुछ देर ऐसे ही मुझे धक्के मारता रहा।फिर जबउसे लगा कि अब और अंदर जाना चाहिए उसने फिर से जोर लगाया।लिंग का जो हिस्सा मेरी यौनी से बाहर थापूरा सूखा था

इसलिए जब थोड़ा और घुसा तो मुझे बहुत परेशानी हुई।मैंने अपना सिर बिस्तर पर पटक लिया,मेरीआँखें बंद हो गयी और मेरी कराह मेरे अंदर ही राह गयी।मैंने थोड़ी सांस ली और सिर उठा कर माइक को देखाउसने तुरंत अपना लिंग बाहर खिंच लिया और पास में पड़े चिकनाई वाली डिब्बी उठा ली।मुनीर ने माइक से वोडिब्बी चीन ली फिर बहुत सारा क्रीम निकाल कर माइक के लिंग पर ऊपर से नीचे जड़ तक मल दिया और थोड़ामेरु यौनी के किनारों पर भी।माइक तुरंत संभोग की स्थिती में गया और तारा ने फट से माइक का लिंग मेरी यौनीसे भिड़ा दिया। मैं सोचने लगी तारा और मुनीर शायद शुरू से ही पूरी तैयारी के साथ आये थे की मुझे इसविशालकयी सांड के साथ संभोग करवाना है।

मैं अभी भी उसी अवस्था मे टांगे ऊपर किये माइक के पेट पर टिकायेदोनो हाथो से उसे पकड़ी हुई थी।उसने लिंग पर दबाव दिया लिंग मेरी यौनी को चीरता हुआ अंदर जाने लगा।मेंखिंचाव के साथ मेरी यौनी की भीतरी दीवारों से लिंग के सुपाड़े का रगड़ना महसूस करने लगी।लिंग करीब 4इंचअंदर चला गया था।वैसे बता दु के खड़े होने पर माइक का लिंग लगभग 9इंच का हो गया था।माइक का लिंग बीचमे थोड़ा और मोटा था और जैसे ही वो हिस्सा मेरी यौनी की छेद तक पहुचा मैं फिर से कार्रह उठी और पूरी ताकतसे उसे रोक लिया।करीब आधा घंटा होने चला था और मैं अब थकान महसूस करने लगी थी,

मैंने अपनी बहुत सीऊर्जा केवल माइक को रोकने में लगा दी थी।माइक भी धक्के मार मार कर पसीने पसीने होने लगा था पर मैंउसका साथ नही दे पा रही थी।अंत मे जब मेरी टांगो पे ज्यादा अकड़न होने लगी तो मैंने खुद ही कह दिया “इतनेमें ही कर लो और नही होगा मुझसे”।माइक के चेहरे पे उदासीनता दिखी पर उसने कोई जबरदस्ती नही की।बल्कीउसने हाँ में सिर हिला कर हल्के हल्के धक्के मारने शुरू कर दिए।

उसने हौले हौले काफी देर धक्का मारा मैं बसकराहती रही हर धक्के पे,धीरे धीरे मेरी यौनी में उत्तेजना आनी शुरू हुई और मेरे अंदर से भी पानी आना शुरूहुआ।इस प्रक्रिया से मेरी यौनी चिकनी हो गयी और यौनी के किनारे भी धीरे धीरे फैलते चले गए।माइक अबहाँफने लगा था पर वो लगातार मुझे खुद को काबू में रख धक्के मार रहा था जिससे मुझे ज्यादा तकलीफ न होऔर मैं उसके झड़ने तक उसका साथ दे सकू।

मैंने हल्के हल्के अपने हाथो और टांगो को ढीला करना शुरुकिया।माइक भी हल्के हल्के धक्कों के साथ लिंग को और अंदर घुसाने का प्रयास करने लगा।थोड़ा थोड़ा कर केकिसी तरह उसने आखिरकर अपना सबसे मोटा हिस्सा भी मेरी यौनी के भीतर घुसा ही दिया।मैं हर धक्के परसिसकी लेती रही और वो धक्के मारता रहा।मुझे उसका सुपाड़ा मेरी बच्चेदानी के मुह पर महसूस होने लगाथा।उसका लिंग मुझे बहुत गर्म लग रहा था,जैसे कोई तपता हुआ लोहा हो।मैं सोचने लगी के अब और भीतर कहातक जाएगा मेरी अंतिम छोर तक तो वो भीतर अहिगया हौ।पर मिकने रुका नही उसने थोड़ा और जोर लगायाइस बार उसकी तातक पहले के मुकाबले ज्यादा थी।मैं कराहते हुए उठ बैठने जैसा हुई और मैंने फिर से दोनो हाथो और टांगो से पूरी ताकत से उसे पीछे धकेल कर रोकना चाहा।

माइक भले रुक गया था पर उसने मुझे अपनी ताकत से दबा लिया और मुझे उठने नही दिया।आकिर मैं एक औरत ऐसे मर्द के आगे कितना ताकत लगती जबउसके भीतर उतनी उत्तेजना थी।मुझे बहुत पीड़ा हो रही थी,यौनी के चारो दीवारों के बीच बहुत खिंचाव महसूस होरहा था मैं रोने जैसी हो गयी थी।मैंने सिर उठा के अपनी यौनी की तरफ देखा लिंग अभी भी काफी बाहर था।मुझेऐसा लग रहा था जैसे मेरी यौनी फटने वाली है इतना ज्यादा खिंचाव हो रहा था।मैंने पूरी ताकत लगा दी और बोलपड़ी “बस अब और नही”।माइक थोड़ा रुका और मेरी आंखों में गौर से देखने लगा,उसकी आँखों मे अजीब सी भूखथी।मैं कुछ कहने वाली थी पर माइक ने फिर से बहुत ही हौले और प्यार से अपने लिंग को मेरी यौनी में घुमानेलगा।

उसने मुझे मेरे कंधो से पकड़ लिया ताकि मैं उठ न सकू।उसकी ताकत मुझसे कही ज्यादा थी में पूरी ताकतलगा कर भी उसे हिला न पाई।उसने धीरे धीरे लिंग को हिलाते हुए थोड़ा लिंग बाहर निकाला और फिर हौले सेदोबारा उतना ही अंदर डाला जितना वो अंदर था।अब वो अपने अनुभव से काम ले रहा था,क्योकी उसे अब झड़नेकी इच्छा शायद हो रही थी।वो पूरा पसीने से भर गया था,उसके माथे से पसीना चेहरे,सीने, पेट से होता हुआ उसकेलिंग के सहारे मेरी यौनी के किनारों से होता हुआ बिस्तर पर गिरने लगा था।तारा और मुनीर को शायद मेरीस्तिथी देख बहुत उत्तेजना होने लगी थी दोनो मेरे बगल उठ आपस मे आलिंगन में लग गयी।मैं भगवान से मनानेलगी के माइक जल्दी से झड़ जाए।पूरी प्रक्रिया के दौरान न जाने मैं कितनी बार उत्तेजित हुई और कई बार मेरीउत्तेजना शांत हो गयी।

मेरी फिलहाल उत्तेजना शांत हो गई थी,पर ये माइक के लिंग से निकलता चिकनाई वालापानी था और क्रीम जिसकी वजह से मेरी यौनी के भीतर नामी थी।उस चिकनाई का ही सहारा राह गया था केमाइक धीरे धीरे धक्के मारता रहा।माइक का लिंग खून के दबाव से काफी गर्म और पत्थर से भी ज्यादा सख्तलगने लगा।वो मुझे लगातार हल्के हल्के धक्के मारे जा रहा था और मैं कराहती हुई उसे झेल रही थी।उसे धक्केमारते हुए काफी देर हो चुकी थी और अब मेरा दर्द भी कम होने लगा था,मेरी यौनी उसके लिंग के मोटापे के हिसाबसे अपनी स्थिती बना ली थी।मुझे लगता है करीब एक घंटा होने को गया था,

इतनी देर से मैन उसे रोक रखाथा,पर जैसे जैसे उसने मेरी यौनी में लिंग से जगह बनाई वैसे वैसे मेरी पकड़ ढीली होती रही।उसका लिंग जैसे जैसेमेरी यौनी की दीवारों से रगड़ता वैसे वैसे मुझे उत्तेजना पैदा होने सा लगता।थोड़ी देर में मुझे कुछ और अच्छालगने लगा मैंने अपनी टांगो पर जोर देना कम कर दिया।माइक ने अपनी रफ्तार बढ़ानी शुरू कर दी पर लिंगउतना ही अंदर घुसा रहा था जितना अभीतक अंदर गया था।उसने धीरे धीरे फिर अपने धक्कों की तेजी बढ़ाई, वो बिनारुके लगातार धक्के नियंत्रित तरीके से मार रहा था।उसका हांफना भी तेज होता जा रहा था …