अन्तर्वासना चुदाई की कहानियाँ

न्यू अनुभव चुदाई की कहानी – Part 04

अन्तर्वासना चुदाई की कहानियाँ सेक्स कहानियाँ : Antarvasna Sex Stories Hindi Sex Stories

अन्तर्वासना चुदाई की कहानियाँ

तारा माइक के सीने को चूमती हुई नीचे झुक गयी और घुटनों के बल बैठ कर माइक के लिंग को उसके पैंट के ऊपर से ही चूमने और सहलाने लगी।मेरी उत्सुकता काफी बढ़ गयी माइक के लिंग को देखने की क्योकी मैंने मोबाइल में देखा था इसलिए अंदाज नही लगा सकी थी उस समय।थोड़ा और सहलाने के बाद तारा ने माइक का पैंट खिंच कर उसे नंगा कर दिया।मेरी आँखें फटी की फटी रह गयी,भूल गयी के मुनीर मेरे बदन से खेल रही है।माइक का लिंग किसी सामान्य व्यक्ती की भांति 3-4 गुना बड़ा था।

उसका लिंग अभी उत्तेजित भी नही था पर उसकी मोटाई और लुम्बई देख मैं तो डर गई।मैंने मैन ही मन निश्चय किया मुनीर जो चाहे मेरे साथ कर ले मगर माइक को मैं कुछ नही करने दूंगी।तारा ने माइक के लिंग को हाथ मे लेकर हिलाया डुलाया।लिंग तारा की मुठ्ठी में नही आरहा था इतना मोटा था।अंदाज से कह सकती हूं कि 4इंच मोटाई होगी इस अवस्था मे और लंबाई करीब 6 से 7इंच।तारा के हाथ मे उसका लिंग ऐसे लग रहा था

जैसे कोई काला नाग सोया हो जिसे तारा जगाने का प्रयास कर रही थी।मैंने दोबारा माइक की और देखा तो अभी भी मेरे स्तनों को ललचाई नजरो से घूर रहा था।तभी मुनीर ने कहा मैं तुम्हे चख के देखती हूं।और उसने मेरी साड़ी ऊपर उठा दी कमर तक।माइक की नजर तुरंत मेरी मोटी मोटी जांघो की और चली गयी।मैं एकदम से शर्मा गयी क्योकी माइक से मेरी ये पहली मुलाकात थी और सहज होने में थोड़ा तो समय लगता ही है।मैंने तुरंत अपनी साड़ी वापस नीचे कर ली इसपर मुनीर ने कहा “अब शर्माओ मत इतने दिनों के बाद मिली हो थोड़ा देखने तो दो आखिर तुम्हारा स्वाद कैसा है”।माइक ने भी अपनी चुप्पी तोड़ी और कहा “प्लीज अब इतना भी न तड़पाओ हमे।“

मुनीर ने विनती भरे स्वर से दोबारा बात दोहराती हुई मेरी साड़ी धीरे धीरे ऊपर मेरी कमर तक उठा दी।उसने मेरी जांघो को सहलाया फिर नाक लगा कर सूंघते हुए मेरी जांघो को चूमने लगी।मेरी जाँघे आपस मे चिपकी हुई थी उसने हौले हौले उन्हें फैलाना शुरू किया और छुमते हुए मेरी यौनी के पास गई।उसने मेरी पैंटी के ऊपर से ही मेरी यौनी को छुआ फिर नाक लगा कर सुघने लगी।उसने मेरी यौनी में नाक लगा कर एक लंबी सांस खिंची और माइक को देख कर बोली “बहुत मादक और सौंधी ख़ूबसू है,मेरे मुह में तो पानी गया”।फिर उसने मेरी यौनी को पैंटी के ऊपर से ही चूम और मुझे मेरी यौनी चाटने की विनती करने लगी।

मैं चुप रही समझ नही रह था क्या जवाब दु।मेरा कोई उत्तर न पाकर उसने मेरी पैंटी स्वयं थोड़ा नीचे खिंचा और नाभि और यौनी के बीच हिस्से को चूमने लगी।अभी भी मेरी यौनी नही दिख रही थी मैंने देखा के माइक काफी उत्सुक था मेरी यौनी के दर्शन को।उधार तारा ने माइक का लिंग अपने मुह में भर लिया था।उसने दोबारा लिंग मुह से बाहर निकाला और दोनों हाथों से पकड़ लिंग के सुपाड़े को उसके ऊपर की चमड़ी पीछे खींच कर खोल दिया।तारा ने उसके सुपाड़े को जीभ से चाट कर पूरा गिला कर दिया,फिर उसके मूत्र द्वार को जीभ से चाटने लगी।माइक का लिंग धीरे धीरे उत्तेजीत होने लगा और उसका आकार भी बढ़ने लगा।माइक का सूपड़ा भी काला था और उसके लिंग की चमड़ी कोयले सा काला था

बस बदन गेहुआ रंग का दिख रहा था।तारा ने फिर से लिंग को मुह में भर कर उसे अंदर बाहर करने लगी।मुनीर ने मेरी पैंटी खिंचनी शुरू कर दी जिससे मेरी यौनी दिखने लगी पर मैं बैठी थी इस वजह से पैंटी बाहर नही आरही थी।मैंने अपनी चूतड़ थोड़ा उठा दी मेरी पैंटी सटाक से बाहर हो कर तलवो तक चली गई।माइक ने जब मेरी यौनी के दर्शन किये उसके चेहरे पे रौनक सी गयी।मैंने उसका मन पढ़ लिया वो भीतर से बहुत खुश हो गया था।पर अभी भी उसे मेरी यौनी ठीक से नही दिख रही थी केवल उसे मेरी यौनी के दरार और फूली हुई यौनी की ऊपरी हिस्सा ही दिख रहा था

क्योंकि वो मेरे बगल में बैठा था।उधर मुनीर ने मेरी जाँघे फैला कर यौनी पे हाथ फेरा तो मेरे बदन में करंट से दौड़ गया।उसने मेरी यौनी की ताराफ करनी शुरू कर दी।माइक से भी नही रहा गया और उसने भी मेरी यौनी को छुआ और कहा “कितनी मुलायम और गर्म है”।मुनीर ने अपनी जुबान मेरी यौनी के ऊपरी हिस्से के दाने पर टिका कर उसे चाटने लगी।मैं अब उत्तेजित होने लगी पर खुद पे काबू किया और अपनी आंखें बंद कर सिर सोफे पे टिका दिया।मुनीर ने मेरी टांगो को ऊपर उठाया और अपने कंधे पे टिक कर दोनो हाथो से मेरी यौनी को फैला कर दोनो तरफ की पंखुड़ियों को खोल दिया।

मेरी यौनी का छेद खुल गया था मुनीर ने अपनी जुबान मेरी यौनी के एकदम निचले वाले हिस्से पे रखा और चाटते हुए ऊपर दाने तक आयी और बोली “मममम कितनी प्यारी सुगंध है,और स्वाद भी लाजवाब है”।उसके कहते ही मैंने मुनीर की तरफ देखा वो अपना सिर उठाये मुझे देख मुस्कुराई और अपनी नजर मेरी नजर से मिलकर दोबारा यौनी को नीचे से ऊपर तक चाटने लगी।मुनीर के जीभ के पानी से मेरी यौनी गीली हो गयी थी पर अब मेरी यौनी में भी नामी आने लगी थी।जैसे जैसे वो मेरी यौनी से खेल रही थी वैसे वैसे मेरी वासना की ज्वाला तेज़ होती जा रही थी।मैंने कामुकता में आकर उसके सिर को दोनो हाथो से पकड़ लिया।

मुनीर ने अपनी दोनों हाथों की एक एक उंगलिया मेरी यौनी के द्वार में घुसा कर यौनी को पूरा खोल दिया और अपनी जीभ उसमे घुसाने का प्रयास करने लगी।मुझे ऐसा आभास हो रहा था जैसे कोई रुई का लिंग मेरी यौनी से मैथुन कार रहा हो।मैंने माइक की और एक बार देखा वो मुझे देख मुस्कुरा रहा था पर उसकी आँखों मे वासना की चमक थी।मैंने फिर तारा की तरफ देखा तो वो लिंग को चूस रही थी

और लिंग पूरी तरह से खड़ा हो चुका था।इस अवस्था मे लिंग इतना मोटा था के तारा के मुह में केवल सुपाड़ा ही घुस रहा था,और उसने दोनो हाथो से लिंग पकड़ रखा था।थोड़ी देर और चूसने के बाद उसने माइक से कहा के तुम्हारा हथियार तैयार हो गया है।

दोनो हसने लगे इस बात पे फिर तारा ने मुनीर को कहा “जरा मुझे भी तो चखने दो बहुत दिनों के बाद मिली है और मैंने कभी नही चखी इसकी यौनी”।ये सुनते ही मुनीर ने मुझे छोड़ दिया और मेरी टांगे नीचे रख अलग खड़ी हो गयी।तारा मेरी तरफ आयी तो मैंने बिना कुछ कहे अपनी टांगे उठा कर सोफे पे रख टांगे फैला दी।तारा फिर झुक कर अपना मुह मेरी यौनी में भिड़ा कर चाटने लगी।थोड़ा चाटने के बाद बोली “कितनी गीली हो चुकी है तुम्हारी यौनी,भीतर से पानी रिस रहा,अब समझ आया के मर्द क्यो तुम्हे चाहते है”।अपनी तारीफ सुन कर में भीतर से बहुत खुश हुई पर सोच भी रही थी के कैसे भी में स्खलित हो जाऊं।तभी माइक का स्वर गरजा और ठीक मेरे सामने खड़ा होकर बोला “अब मेरी बारी है”।मैंने देखा उसका लिंग किसी लोहे के समान मेरी आंखों के पास टनटना रहा था।वो एक दानव की तरह दिख रहा था।तारा मेरी जांघो के बीच से अलग हुई तो माइक नीचे बैठ गया और उसने भी मेरी यौनी का स्वाद चखना शुरू कर दिया।

तारा और मुनीर से कही ज्यादा ही उत्तेजना दिख रही थी माइक में। माइक भले ही बहुत उत्तेजित था पर बहुत अनुभवी भी था,वो अपनी उत्तेजना को काबू में करना जानता था।उसने मेरी जांघो को बहुत प्यार से पकड़ रखा था और यौनी में अपनी जुबान ऐसे फिरा रहा था जैसे कोई बच्चा आइस क्रीम को चाट रहा हो।मैं तो समझ गयी के कुछ देर अगर ये चला तो मैं उसके मुह पे ही अपना पानी उगल दूंगी।उधर तारा और मुनीर खड़े होकर एकदूसरे को चूमने और प्यार करने लगे।माइक वाकई में बहुत ही अनुभवी था उसने मेरी बदन की गर्मी और बदन की स्थिती से भाप लिया मुझे।शायद वो नही चाहता था के मैं ऐसे झाड़ जाऊ इसलिए उसने मुझे छोड़ दिया।उसने खड़ा होकर अपना लिंग मेरे सामने कर दिया शायद ये इशारा था

के मैं उसके लिंग को प्यार करू पर उसे देख तो मेरी कामुकता काम होने लगी और भीतर से डर भी गयी।माइक समझ गया उसने मुझसे कहा “तुम्हे न तो शरमाने की जरूरत है ना ही घबराने की,मैं ऐसा कोई काम नही करूँगा जिससे तुम्हे तकलीफ होगी”…