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लड़कियों के व्हाटसएप्प मोबाइल नंबर से चुदाई की कहानी

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जादुई चुदाई-part-02

लड़कियों के मोबाइल नंबर

उमा उस कबीले से लौटकर वापस अपने घर पर आई।लाकिन उसका बरताव अजीब सा हो गया था।वोह कुछ उखडी उखडी रहती थी।घरवालों से कम बाते करने लगी थी।ईसकी वजह वोह अंगुठी थी जिसकी वजह से उसके हर ख्वाब पुरे होने जा रहे थे और उसका उस कबीले पर जाना भी उसी ऊगुठी के बदोलत हुआ था।एक और उसकी खुशी का ठिकाना न रहा था और दसरी और उसके सामने कई सवाल खडे हो रहे थे।उस कबीले पर उसकी सहेलिया मनमर्जी चुदा कर ले रही थी।उनके चेहरे से हवस की वोह खुशबू अजीब सी महक चहक रही थी।जिसे देख उमा दंग रह गयी।

कुछ दिन तक वोह अपने बचपन कि यादो मे गुम रहने लगी।बचपन मे जाकर वोह अपनी सहेलियों के साथ खेल खुद रही थी उन सब नज़रों के देख उसका मन अंगुठी मे रमणीय हो गया।एक दिन वोह अपने बाॅडी गार्ड के साथ माॅल मे घुमने चली गई।

वहां उसे उसकी स्कूल का उसका पुराना आशिक मिला जो उसे हमेशा प्यार करने कि बातें करता था।उसको अपने प्यार के झाॅसे मे फंसाने कि कोशीश करता था।उमा को तो ऐसा ही लगता था।उन दोंनो का आपस मे टकराव हुआ।उमा थोडी संभल गई,लेकिन संजीव उसे पहचान ने सी नही चुंका।उसने उमा से बात करने कि कौशीश कि लेकिन उमा के बाॅडीगार्ड ने उसे धक्के दे कर बाहर निकाला।उमा चेजिंग रूम जाकर रोने लग गई ।वोह समझ नही पा रही थी उसकी जिंदगी मे जो बदलाव आ रहे थे।सब उसे खुश करने कि कोशीश थी।लेकिन उमा ही थी जो नादान बनकर ईन सब से दुर रहना चाहती थी।उमा रूम मे फुट फुटकर रोई।फिर एक बाॅडीगार्ड ने आकर दरवाजा खटखटाया तब जाकर उसने रोना बंद किया और रूम से फ्रेश होकर बाहर आई।फिर बाॅडीगार्ड कि मदत से उसने अपनी शाॅपींग पुरी कि और घर वापस घर चली गई।घर पोहचकर खाना खाकर वोह अपने कमरे मे सोने गई।कमरे अपने बेड पर लेटकर वोह संजीव के खयालों मे डुब रही थी।संजीव अब पहले कि तराह दुबला पतला नही था।उसकी बाॅडी निकल आई थी एकदम सुपर स्टार लग रहा था।उसकी छाती जिससे उमा कि छाती का टकराव हुआ था वोह एक दमदार मर्द कि तराह लग रही थी।उमाने लेटे लेटे अपनी नाईट विअर निकाल दी।और अपने स्तनों को देखा तो वोह उभर आऐ थे।एकदम पोलाद कि तराह सख्त और मख्खन कि तरास मुलायम थे।उसने अपने स्तनों को हलकी से मसाज करना शुरू किया फिर अपने चुंचे पर हाथ फैलाया और फिर उसपर हलका सा दबाने मे लग गई।उमा कि सांस फुल रसी थी वोह सिसकियाँ लेते हुए अपने स्तनों को अपने हांथो से मसाज कर रही थी।फिर वोह खुद अपनी गांड पर हाथ फिराती उसे बेहद गर्मी मेहसुस हो रही थी।
ऐसा करते हुऐ उसने अपने एक हाथ को अपनी चुत पर रखा।चुत अभी व्हर्जीन थी।उमा ने उसे कभी किसी वजह से फैलाया नही था।उमा अपने हाथ चुत और स्तनों पर फिराये जा रही थी।कभी कभी बीच भे अपना हाथ अपनी गांड पर ले जाकर अपनी गांड मे उंगली कर देती।अचानक से वोह सहम ज्याती क्योकिं उसके लिए यह सब नया था।उसने अपनी गांड मे कभी उंगली नही कि थी और फिर वोह अपनी चुत पर हाथ फिराती रह ज्याती।कुछ देर बात उमा कि चुत मे से अजीब सा द्रव निकल आया उमा उसे मेहसूस कर रही थी अब उसने अपना हाथ चुत के द्रव मे डालना चाहा उसने अपना हाथ चुत कि और किया लेकिन उसका हाथ चुत मे नही कही और गया था और कही नही बल्की उसका हाथ संजीव ने थाम लिया था।उमाने अपनी ऑखे खोली और निचे चुत कि और देखा तो
संजीव उसकी चुत का द्रव सुंग रहा था और उसने उमा का हाथ अपनी हांथो मे लिया था।उमा उठने लगी लेकिन संजीव ने उसके पेर अपना हाथ रखकर उसे फिर से लेटाया।और अपना मुंह उमा कि चुत पर रख दिया।अब उसने अपनी जीभ उसके चुत की गुलाब जैसी उभरी कंटो पर डाली और उसपर लगे द्रव को जीभपर लेकर मुंह मे कुल्ला कर दी और निगल गया।और एकदम से जैसे अमृत का रसपान किया हो ऐसै पी गया।

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अपनी जीभ से वोह उमा कि चुत को चाटता रह गया।उमा कि साॅसे फुल रही थी।उसकी मुंह धीरे-धीरे आहह-आहह-धीमे करो संजीव मुझे मत तडपावों आहहह ऐसी आवाज़ निकलने लगी।फिर वोह कहने लगी,”तुम तो मेरे मेरे ख्वाबों मे निकलकर आऐ हो बच्चु आज तो मै तुमसे हर वोह काम करवावुंगी जो मेरे जिस्म मे लगी अग्नी को राहत कि थंडक दे।और चुसो और चुसो मेरा बदन सिकुड रहा है ।तुम अपने जिस्म कि गर्मी मेरे जिस्म के चूल्हे मे फुंक दो संजीव……come onn…sanjeev…fuck me hard….like a bitch….aaahhhhhh….aaaahhhh…sanjeev….your a great ……your a heman……comeooooon….fuck me…चोदो मुझे मेरी चुत को…मेरी गांड को….मेरा कोई भी होल मत छोडना…पुरी रात बस्स तुमसे ही है चोदना।आओ मेरे आशिक लेट मी fuck…suck my cunt…its seems like a moutant….your my fucking mutunt.संजीव यह तुमने क्या कर दिया मेरी चुत का द्रव पलक झपकाते ही पी गया।its not a driking water…it is a fucking water.
“Don’t be shy my dear…it’s a real fucking matter…i like too like to drink it as a freash butter”संजीव ने कहां।
उसपर उमा बोली,”संजीव तुम तो सच मे मेरे खाबो के चुद्दकड निकले..अब तो अपना लंड मेरी चुत मे घुसा दे…मुझे वोह जवानी से भरा सुकुन आज तुही मुझे दिला दे।”


अपनी जीभ से वोह उमा कि चुत को चाटता रह गया।उमा कि साॅसे फुल रही थी।उसकी मुंह धीरे-धीरे आहह-आहह-धीमे करो संजीव मुझे मत तडपावों आहहह ऐसी आवाज़ निकलने लगी।फिर वोह कहने लगी,”तुम तो मेरे मेरे ख्वाबों मे निकलकर आऐ हो बच्चु आज तो मै तुमसे हर वोह काम करवावुंगी जो मेरे जिस्म मे लगी अग्नी को राहत कि थंडक दे।और चुसो और चुसो मेरा बदन सिकुड रहा है ।तुम अपने जिस्म कि गर्मी मेरे जिस्म के चूल्हे मे फुंक दो संजीव……come onn…sanjeev…fuck me hard….like a bitch….aaahhhhhh….aaaahhhh…sanjeev….your a great ……your a heman……comeooooon….fuck me…चोदो मुझे मेरी चुत को…मेरी गांड को….मेरा कोई भी होल मत छोडना…पुरी रात बस्स तुमसे ही है चोदना।आओ मेरे आशिक लेट मी fuck…suck my cunt…its seems like a moutant….your my fucking mutunt.संजीव यह तुमने क्या कर दिया मेरी चुत का द्रव पलक झपकाते ही पी गया।its not a driking water…it is a fucking water.
“Don’t be shy my dear…it’s a real fucking matter…i like too like to drink it as a freash butter”संजीव ने कहां।
उसपर उमा बोली,”संजीव तुम तो सच मे मेरे खाबो के चुद्दकड निकले..अब तो अपना लंड मेरी चुत मे घुसा दे…मुझे वोह जवानी से भरा सुकुन आज तुही मुझे दिला दे।”

लेकिन संजीव उसे पहचान ने सी नही चुंका।उसने उमा से बात करने कि कौशीश कि लेकिन उमा के बाॅडीगार्ड ने उसे धक्के दे कर बाहर निकाला।उमा चेजिंग रूम जाकर रोने लग गई ।वोह समझ नही पा रही थी उसकी जिंदगी मे जो बदलाव आ रहे थे।सब उसे खुश करने कि कोशीश थी।लेकिन उमा ही थी जो नादान बनकर ईन सब से दुर रहना चाहती थी।उमा रूम मे फुट फुटकर रोई।फिर एक बाॅडीगार्ड ने आकर दरवाजा खटखटाया तब जाकर उसने रोना बंद किया और रूम से फ्रेश होकर बाहर आई।फिर बाॅडीगार्ड कि मदत से उसने अपनी शाॅपींग पुरी कि और घर वापस घर चली गई।घर पोहचकर खाना खाकर वोह अपने कमरे मे सोने गई।कमरे अपने बेड पर लेटकर वोह संजीव के खयालों मे डुब रही थी।संजीव अब पहले कि तराह दुबला पतला नही था।उसकी बाॅडी निकल आई थी एकदम सुपर स्टार लग रहा था।उसकी छाती जिससे उमा कि छाती का टकराव हुआ था वोह एक दमदार मर्द कि तराह लग रही थी।उमाने लेटे लेटे अपनी नाईट विअर निकाल दी।और अपने स्तनों को देखा तो वोह उभर आऐ थे।एकदम पोलाद कि तराह सख्त और मख्खन कि तरास मुलायम थे।उसने अपने स्तनों को हलकी से मसाज करना शुरू किया फिर अपने चुंचे पर हाथ फैलाया और फिर उसपर हलका सा दबाने मे लग गई।उमा कि सांस फुल रसी थी वोह सिसकियाँ लेते हुए अपने स्तनों को अपने हांथो से मसाज कर रही थी।फिर वोह खुद अपनी गांड पर हाथ फिराती उसे बेहद गर्मी मेहसुस हो रही थी।

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ऐसा करते हुऐ उसने अपने एक हाथ को अपनी चुत पर रखा।चुत अभी व्हर्जीन थी।उमा ने उसे कभी किसी वजह से फैलाया नही था।उमा अपने हाथ चुत और स्तनों पर फिराये जा रही थी।कभी कभी बीच भे अपना हाथ अपनी गांड पर ले जाकर अपनी गांड मे उंगली कर देती।अचानक से वोह सहम ज्याती क्योकिं उसके लिए यह सब नया था।उसने अपनी गांड मे कभी उंगली नही कि थी और फिर वोह अपनी चुत पर हाथ फिराती रह ज्याती।कुछ देर बात उमा कि चुत मे से अजीब सा द्रव निकल आया उमा उसे मेहसूस कर रही थी अब उसने अपना हाथ चुत के द्रव मे डालना चाहा उसने अपना हाथ चुत कि और किया लेकिन उसका हाथ चुत मे नही कही और गया था और कही नही बल्की उसका हाथ संजीव ने थाम लिया था।उमाने अपनी ऑखे खोली और निचे चुत कि और देखा तो
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उसपर उमा बोली,”संजीव तुम तो सच मे मेरे खाबो के चुद्दकड निकले..अब तो अपना लंड मेरी चुत मे घुसा दे…मुझे वोह जवानी से भरा सुकुन आज तुही मुझे दिला दे।”

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संजीव ने उसकी चुत को चाटना बंद किया और और उसके बदन पर अपना बदन फैला दिया।उसके मुंह के एकदम पास अपना मुंह लाया और बोला,”क्यों उमा कैसा लगा।आ गया अपने आशिक पर यकीन देखो आज मै ही आ गया तुम्हारी चुत चाटने नमकीन।”

“आहहह ..संजीव सच मे तुम ही हो मेरे आशिक।अब मत झिझको चलो मेरी किस लेलो।और चोदना सुरू करो।”उमा लेटे लेटे कहने लगी।

संजीव बोला,”जरा तुम भी तडपो मेरी जान…कितना सुकून होता है प्यार मेतडपने का यह जरा तु भी ले जान।वोह नो यह तुम्हारे चुत का खुला द्वार मेरे लंड को प्रेवेश चरने कि bell बजा रहा है ।”

सच है संजीव तुम और बेल मत बजावो जल्दी घुस जावो अंदर,lolu…मै तो कब से ईतजार कर रही हुं,तुम्हे अपना प्यार देने के लिए।चलो अब बचपना बंद करो और असली heman कि तराह मेरी चुत का बाजा बजावो।

संजीव ने कहाँ,” नही उमा मे तुम्हारी चुत का बाजा नही बजाना नही चाहता।बल्की तुम्हे अपना प्यार देना चाहती हुं।।”

उमा बोली,”चुप करो चुद्दकड अब अपने वही घिसे पिटे प्यार के बहाने,आज मेरे प्यार का जादु चल गया और तुम्हें भेजा है मेरे जादुगार ने मुझे चुद्दवाने।”

“जादुगार यह कौन जो तुम्हारे और मेरे प्यार के बीच मे आ रहा है।उमा बताव नही तो तो मै चला जावूंगा।मुझे भी यकीन हो रहा मै आज तुम्हारी बाहो मे हुं।बताव उमा यह क्या हो रहा है।”,संजीव सच्चाई जानना चाहता था।

लेकिन उमा ने अपनी अंगुठी से अनुरोध किया कि वह यह बात संजीव कि याददाश्त से मिटा दे।और फिर क्या सब उसके कहने जैसा हुआ।

अब संजीव उसके बदन पर से उठ गया।और उसने उमा के दोनो पैर फैलाये उसकी सुंदर और नक्षीदार कुवारी चुत देख उसे बडा सुकून मिला।फिर उमाने उसका लंड अपने हांथो मे लिया और उसकी मसाज करने लगी फिर बेड पर से उठ गई और संजीव का लंड अपने मुंह मे लिया।उमा को अपनी चुत को चुसते देख संजीव को बेहद खुशी मिली।ब
फिर उमा के हाथ मे दर्द होने लगा।ईसलिए उसने उसका लंड अपने स्तनों के बिचो बीच रख दिया और दोनो हाथो से लंड को टाईट पकडे रखा।संजीव अपने लंड को स्तनों के बीच रगडता रहा।उ
ऐसा करने मे उसे और उमा को भी बहोत मजा आ रहा था।

फिरसे एकबार उमाने उसका लंड अपने मुंह लिया और तब तक मुखमैथून करती रही जब तक संजीव का पानी न निकल जाऐ।
संजीव के लंड से पानी निकल गया और संजीव ने उसे उमा कि मुंह पर फैला दिया।
उमा हस रही थी।उसे आज पहली बार किसीका नही बल्कि उसके आशिक संजीव का साथ मिला था।अपने प्यार कि हवस पुरी करने मे।

जादुई चुदाई- ०२,(आगे शेष)